पहाड़ी सिंगर–पहाड़ी डांसर का जलवा: सरस मेले में गूंजा देवभूमि का दम, गांधी पार्क बना सांस्कृतिक रणभूमि”पहाड़ की धुनों पर झूमा रुद्रपुर

Spread the love

रुद्रपुर, 20 फरवरी 2026 | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
✍️ अवतार सिंह बिष्ट
सरस मेला: गांधी पार्क से त्रिशूल चौक तक गूंजा उत्तराखंड का आत्मविश्वास
उधम सिंह नगर कार्निवाल सरस आजीविका मेला 2026 के सातवें दिवस पर गांधी पार्क का दृश्य केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भर नहीं था, बल्कि यह उत्तराखंड की आत्मा, अस्मिता और आत्मविश्वास का जीवंत उत्सव बन गया। जिस ऊर्जा और जोश के साथ उत्तराखंड के कलाकारों ने मंच संभाला, उसने साफ संदेश दिया—“हम किसी से कम नहीं।”
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स ने इस ऐतिहासिक संध्या का लाइव प्रसारण प्रमुखता से किया—मुख्यमंत्री के आगमन से लेकर त्रिशूल चौक तक सरकार की उपलब्धियों की झलक और मेले की रंगीन धड़कनों को दर्शकों तक पहुँचाया। यह  कवरेज  उत्तराखंड के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दस्तावेज था।
पहाड़ की धुनों पर झूमा रुद्रपुर
उत्तराखंडी गायक गोविंद दिगारी, खुशी जोशी, फौजी ललित मोहन जोशी, राकेश पनेरू और राकेश जोशी की टीम ने नंदा-सुनंदा की स्तुति से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। जैसे ही ढोल-दमाऊं की थाप गूंजी, गांधी पार्क का वातावरण देवभूमि की सुगंध से भर उठा।
खुशी जोशी की मधुर आवाज, ललित मोहन जोशी की जोशीली प्रस्तुति, गोविंद दिगारी की पहाड़ी तान, राकेश पनेरू और राकेश जोशी की ऊर्जावान मंचीय उपस्थिति ने देर रात तक दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। भीड़ में युवा थे, बुजुर्ग थे, महिलाएं थीं, बच्चे थे—और सब एक ही लय में बंधे थे।
सच कहा जाए तो उस रात बॉलीवुड और हॉलीवुड की चकाचौंध फीकी लग रही थी। पहाड़ के कलाकारों ने अपने दम पर दिखा दिया कि प्रतिभा किसी महानगर की मोहताज नहीं होती।
सरकार की उपलब्धियों का उत्सव
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, शंकर कोरंगा और मंजीत सिंह राजू ने मेले की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरस मेला ग्रामीण आजीविका और स्वावलंबन का सशक्त मंच बन चुका है।
मुख्यमंत्री के आगमन से लेकर त्रिशूल चौक तक विकास योजनाओं की झलकियां प्रस्तुत की गईं—सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया। मेयर विकास शर्मा और विधायक शिव अरोड़ा की सक्रियता और सहयोग की भी मंच से सराहना हुई।
यह मेला केवल मनोरंजन का मंच  “विकास का विश्वास” का संगम बन चुका है।
कलाकारों का बढ़ता क्रेज
पिछले दिनों श्वेता मेहरा ने जिस तरह गांधी पार्क में अपनी प्रस्तुति से महफिल लूटी थी, उसी क्रम में सातवें दिवस पर एक नया चेहरा उभरकर सामने आया। उत्तराखंड की युवा प्रतिभाएं अब मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ी हैं।
कल फिर गांधी पार्क में एक सुपरस्टार सजेगा—वह नाम जिसने पूरे भारत में अपनी गायकी से लोगों को दीवाना बनाया। मेले में लोगों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि अब रुद्रपुर केवल एक औद्योगिक शहर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
इस अवसर पर दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, पार्वतीय समाज समिति के अध्यक्ष गिरीश चंद्र जोशी, शंकर कोरंगा, मंजीत सिंह राजू के साथ मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी, परियोजना निदेशक हिमांशु जोशी, जिला विकास अधिकारी सुशील मोहन डोभाल, उपजिलाधिकारी ऋचा सिंह, मुख्य शिक्षा अधिकारी के. एस. रावत, तहसीलदार दिनेश कुटौला, अधिशाषी अभियंता लघु सिंचाई सुशील कुमार, सहायक निदेशक मत्स्य संजय छिम्वाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नंदनी तोमर सहित अनेक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
उनकी उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम  प्रशासनिक प्रतिबद्धता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।
सरस मेला: आजीविका से आत्मगौरव तक
सरस आजीविका मेला 2026 ग्रामीण उत्पादों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों को बाजार उपलब्ध करा रहा है। हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद, स्थानीय व्यंजन और पहाड़ी परंपराओं का संगम इस मेले को विशिष्ट बनाता है।
यहां गांव की महिलाएं अपने उत्पाद बेच रही हैं, युवा उद्यमी अपनी पहचान बना रहे हैं, और शहरवासी स्थानीयता का स्वाद चख रहे हैं। यह “वोकल फॉर लोकल” का वास्तविक स्वरूप है।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दस्तक
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन की आत्मा सदैव सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी रही है। आज जब गांधी पार्क में पहाड़ी गीतों पर हजारों लोग एक साथ थिरकते हैं, तो यह केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उस आंदोलन की स्मृति और उसके सपनों का उत्सव भी है।
सरस मेला 2026 ने साबित किया है कि विकास और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां एक ओर सरकार की योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कलाकार अपनी प्रतिभा से समाज को जोड़ रहे हैं।
भीड़, जोश और उम्मीद
गांधी पार्क का पंडाल खचाखच भरा रहा। दर्शकों की तालियां, मोबाइल की फ्लैशलाइट्स, बच्चों की खिलखिलाहट और बुजुर्गों की संतुष्ट मुस्कान—यह दृश्य किसी राष्ट्रीय महोत्सव से कम नहीं था।
लोगों में उत्साह इस कदर था कि कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा और फिर भी ऊर्जा कम नहीं हुई। यह क्रेज केवल एक कार्यक्रम का नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक है।
हम नहीं हैं किसी से कम
सातवें दिवस की सांस्कृतिक संध्या ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड के कलाकारों में वह दम है जो किसी भी बड़े मंच को मात दे सकता है। यह मेला केवल व्यापार और मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि आत्मगौरव की घोषणा है।
जब गांधी पार्क से लेकर त्रिशूल चौक तक विकास और संस्कृति की गूंज सुनाई देती है, तो यह संदेश दूर तक जाता है—उत्तराखंड आगे बढ़ रहा है, अपनी पहचान के साथ, अपने कलाकारों के साथ, अपने लोगों के साथ।
सरस मेला 2026 की यह संध्या लंबे समय तक याद रखी जाएगी—एक ऐसी रात, जब रुद्रपुर ने पहाड़ की धड़कन को पूरे देश के सामने गर्व से प्रस्तुत किया।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
(उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)


Spread the love