लं बे समय से संसाधनों के अभाव से जूझ रहे मैदानी लेखपालों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। मैदानी क्षेत्रों में लगातार जन घनत्व बढ़ने से लेखपाल के बस्ते का बोझ भी लगातार बढ़ता चला गया, लेकिन सरकार के द्वारा लेखपालों को पर्याप्त मानव तकनीकी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

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उत्तराखंड लेखपाल संघ के प्रदेश महामंत्री ताराचन्द्र घिल्डियाल ने प्रेस को जारी बयान में बताया कि राजस्व उपनिरीक्षकों पर एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदारों की ओर से अनावश्यक दवाब बनाया जा रहा है। जबकि मैदानी जनपदों में भूमि की खरीद फरोख्त ज्यादा होने से अधिकांश खतौनी खाते संयुक्त और जटिल है।

लेखपाल पूर्ण मनोयोग से सीमित संसाधनों के साथ अंश निर्धारण व फॉर्मर रजिस्ट्री का कार्य कर रहे है। राजस्व उपनिरीक्षकों को पर्याप्त मानव व तकनीकी संसाधन उपलब्ध नही कराये जाने की दशा में उत्तराखंड लेखपाल संघ की ओर से 27 मई से 29 मई तक प्रदेशव्यापी सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार व धरना शुरू कर दिया जायेगा। 29 मई को अग्रिम रणनीति तैयार की जायेगी, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मदारी उत्तराखण्ड शासन तथा राजस्व परिषद की रहेगी।


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