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देश के स्वतंत्रता दिवस जैसे नेशनल फेस्टिवल पर ‘वंदे मातरम’ की खास अहमियत है. 15 अगस्त 2026 को लाल किले से पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ बजाया गया.

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उत्तराखंड के गांधी इंद्रमणि बडोनी को शहीद स्थल पर दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

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उत्तराखंड अपडेट: हत्या, मौसम, राजनीति, शिक्षा, पर्यावरण और चुनावी तैयारियों के बीच कई बड़े घटनाक्रम

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मिशन 2027 की तैयारी के बीच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बड़ी सौगात की तैयारी, मानदेय बढ़ाने के संकेत

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राष्ट्रीय स्वतंत्रता का नया विमर्श: नरेंद्र रावत ‘नरेन’ के ‘राष्ट्रीय स्वतंत्रता चतुष्टय’ की अवधारणा:राष्ट्रीय स्वतंत्रता चतुष्टय; संवैधानिक, लोकसंपदा, आर्थिक एवं भोगोलिक स्वतंत्रता

80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लेखक नरेंद्र रावत ‘नरेन’ ने अपने वैचारिक लेख “राष्ट्रीय स्वतंत्रता चतुष्टय- संवैधानिक, लोकसंपदा, आर्थिक…

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भाजपा जिला कार्यालय रुद्रपुर में श्रद्धापूर्वक मनाई गई भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि

रुद्रपुर। भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय रुद्रपुर में भारत रत्न एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी…

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गोला नदी में छात्र के बहने से मचा हड़कंप, NDRF-SDRF का सघन रेस्क्यू अभियान जारी

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विकास के नाम पर विनाश: उत्तराखंड में कब थमेगा मौत का सिलसिला?

मिशन 2027: रुद्रपुर में विकास की नई पटकथा, विधायक शिव अरोरा का एक और वादा पूरा होने की ओर! 23.32 करोड़ रुपये की लागत से मोदी मैदान में आउटडोर स्टेडियम निर्माण को मिली विभागीय स्वीकृति, रुद्रपुर के खिलाड़ियों के सपनों को मिलने जा रही नई उड़ान

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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नाम-कंचन नाथ। उम्र-17 साल। कर्म-मानव कल्याण के लिए तप। संपत्ति-करोड़ों की मालकिन और स्थान ढाकल गांव, हरियाणा। यह परिचय उस किशोरी का है, जिसने सांसारिक मोह-माया त्यागकर साध्वी का जीवन अपना लिया।

कंचन नाथ इन दिनों चिलचिलाती धूप में ‘अग्नि तप’ कर रही हैं, और उनके तप की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/…

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देहरादून। उत्तराखंड आंदोलनकारी संयुक्त परिषद की ओर से मंगलवार को देहरादून स्थित शहीद स्थल पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रणेता और उत्तराखंड के गांधी के रूप में विख्यात स्वर्गीय इंद्रमणि […]

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 2022 के उत्तराखंड चुनावों में हारी हुई 23 विधानसभा सीटों पर संगठन के काम की देखरेख के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को काम सौंपा है. यह 2027 के चुनावों से पहले पार्टी को मजबूत करने के मकसद से एक माइक्रो-मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी का हिस्सा है.

2022 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी अपनी पारंपरिक सीट खटीमा हार गए थे. उन्हें इस बार खुद से इस सीट की जिम्मेदारी सौंपी र्गई है. वह […]

राजनीति का हवन: जब आमने-सामने बैठे चैंपियन और उमेश कुमार, तो जनता बोली- वाह रे मिशन 2027

उत्तराखंड की राजनीति भी गजब है। कल तक सोशल मीडिया पर तल्ख बयान, आरोप-प्रत्यारोप, वीडियो, प्रेस कॉन्फ्रेंस और तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर चल रहा था। ऐसा माहौल बनाया गया कि […]

वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में “प्रारंभ-2026” का शुभारंभ, नवप्रवेशित विद्यार्थियों को मिला नवाचार और समग्र विकास का संदेश

देहरादून, 17 अगस्त 2026। वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आयोजित इंडक्शन कार्यक्रम “प्रारंभ-2026” का भव्य शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी […]

एसआईआर 2026: वोटर लिस्ट का महाअभियान, फॉर्म भरना क्यों है जरूरी? जानिए वोट, नागरिकता और सरकारी सुविधाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव

भारत में वर्ष 2026 में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए इस अभियान का […]

देश के स्वतंत्रता दिवस जैसे नेशनल फेस्टिवल पर ‘वंदे मातरम’ की खास अहमियत है. 15 अगस्त 2026 को लाल किले से पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन से पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ बजाया गया.

इसके बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया गया. मशहूर लेखक और साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के रचे हुए ‘वंदे मातरम’ मूल रूप से 6 […]

राष्ट्रीय स्वतंत्रता का नया विमर्श: नरेंद्र रावत ‘नरेन’ के ‘राष्ट्रीय स्वतंत्रता चतुष्टय’ की अवधारणा:राष्ट्रीय स्वतंत्रता चतुष्टय; संवैधानिक, लोकसंपदा, आर्थिक एवं भोगोलिक स्वतंत्रता

80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लेखक नरेंद्र रावत ‘नरेन’ ने अपने वैचारिक लेख “राष्ट्रीय स्वतंत्रता चतुष्टय- संवैधानिक, लोकसंपदा, आर्थिक एवं भौगोलिक स्वतंत्रता” के माध्यम से स्वतंत्रता की व्यापक और […]