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भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 13 मई का विशेष महत्व है। यह दिन स्वतंत्र भारत की संसदीय व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। आजादी के बाद देश में पहली बार गठित संसद का पहला सत्र 13 मई, 1952 को आयोजित किया गया था, जिसने भारतीय लोकतंत्र को संस्थागत रूप देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम रखा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले शुक्रवार से पांच देशों की यात्रा पर निकलने वाले हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह विदेश यात्रा छह दिनों की होगी, जिसके दौरान वे संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे।

मां के सम्मान और संस्कारों का संदेश: विजडम पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मना था मदर्स डे”

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चारधाम यात्रा 2026 : आस्था, सुरक्षा और उत्तराखंड के नए युग का संदेश

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दिल्ली। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में ईंधन के दाम बढ़ सकते हैं।

साथ ही, उन्होंने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि हाल ही…

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दुनिया

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भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 13 मई का विशेष महत्व है। यह दिन स्वतंत्र भारत की संसदीय व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। आजादी के बाद देश में पहली बार गठित संसद का पहला सत्र 13 मई, 1952 को आयोजित किया गया था, जिसने भारतीय लोकतंत्र को संस्थागत रूप देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम रखा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले शुक्रवार से पांच देशों की यात्रा पर निकलने वाले हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह विदेश यात्रा छह दिनों की होगी, जिसके दौरान वे संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे।

45 घंटे का उपवास: आस्था, विज्ञान और शरीर की अद्भुत यात्रा

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वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान परम्परा केंद्र का विधिवत संचालन प्रारम्भ हो गया। इस अवसर…

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श्रीनगर विधानसभा में HKP की बड़ी सेंध, पूर्व प्रधान जयपाल सिंह नेगी समेत दर्जनों ग्रामीण पार्टी में शामिल

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: केदारनाथ यात्रा से लौटते समय नंदा देवी एक्सप्रेस ट्रेन से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुईं 29 वर्षीय प्रज्ञा सिंह आखिरकार बिहार के बेगूसराय में सुरक्षित मिल गई हैं।

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चारधाम यात्रा 2026 : आस्था, सुरक्षा और उत्तराखंड के नए युग का संदेश

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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चारधाम यात्रा 2026 : आस्था, सुरक्षा और उत्तराखंड के नए युग का संदेश

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उत्तराखंड 2027 : क्या बंगाल का राजनीतिक संदेश देवभूमि की दिशा तय करेगा?

भारत की राजनीति में चुनाव परिणाम केवल सरकारें नहीं बदलते, वे समाज की मनःस्थिति, सांस्कृतिक चेतना और भविष्य की वैचारिक दिशा भी तय करते हैं। पश्चिम बंगाल में हुए हालिया […]

पश्चिम बंगाल के साथ पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के पश्चात् जो तस्वीर निर्मित हुई है, वह कड़वाहट और मिठास दोनों का ही स्वाद दे रही है। विपक्ष के राजनीतिक दल जहाँ एक ओर तमिलनाडु और केरल के मनमाफिक परिणाम देखकर मिठास का स्वाद ले रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम को सभी विपक्षी दल भाजपा की प्रायोजित जीत के रूप में प्रचारित करने का असंवैधानिक कार्य कर रहे हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को इस बार जनता ने विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है, लेकिन ममता बनर्जी कुर्सी से चिपके […]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में आयोजित भव्य सोमनाथ अमृत महोत्सव में शामिल हुए. यह आयोजन सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं और गुजरात के लोगों में खास उत्साह देखने को मिला.मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं.

इस विशेष अवसर पर देश के 11 पवित्र तीर्थ स्थलों से लाए गए जल से विशेष कुंभाभिषेक किया गया. मंदिर परिसर में पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच […]

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में 13 मई का विशेष महत्व है। यह दिन स्वतंत्र भारत की संसदीय व्यवस्था की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। आजादी के बाद देश में पहली बार गठित संसद का पहला सत्र 13 मई, 1952 को आयोजित किया गया था, जिसने भारतीय लोकतंत्र को संस्थागत रूप देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम रखा।

स्वतंत्र भारत में आम चुनाव के बाद संसद के उच्च सदन राज्य सभा का गठन 03 अप्रैल, 1952 को किया गया। इसके बाद राज्यसभा का पहला सत्र 13 मई, 1952 […]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले शुक्रवार से पांच देशों की यात्रा पर निकलने वाले हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह विदेश यात्रा छह दिनों की होगी, जिसके दौरान वे संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे।

यह ध्यान देने योग्य है कि मौजूदा वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच इस यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य […]

मां के सम्मान और संस्कारों का संदेश: विजडम पब्लिक स्कूल में धूमधाम से मना था मदर्स डे”

रुद्रपुर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान Wisdom Public Senior Secondary School में मातृ दिवस का आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं भारतीय संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का […]