

रुद्रपुर के बागवाला क्षेत्र में बीजा पोल्ट्रीफार्म के खिलाफ उठी जन-आवाज़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से खिलवाड़ होता है, तो जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल बयान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। विधायक शिव अरोड़ा ने धरनास्थल पर पहुंचकर जो भूमिका निभाई, वह एक संवेदनशील और सक्रिय जनप्रतिनिधि की पहचान है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
पोल्ट्रीफार्म से फैल रही गंदगी, दुर्गंध, मक्खी-मच्छरों की भरमार ने ग्रामीणों का जीवन दूभर कर दिया था। बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर मंडराते खतरे ने लोगों को धरने पर बैठने को मजबूर किया। ऐसे में विधायक शिव अरोड़ा ने मौके की गंभीरता को समझते हुए न केवल पीड़ितों की बात सुनी, बल्कि स्वयं दूषित वातावरण का निरीक्षण कर प्रशासन को तत्काल एक्शन मोड में लाया। तहसीलदार से फोन पर वार्ता कर जांच समिति गठित कराने और ठोस कार्रवाई के निर्देश देना दर्शाता है कि जनहित उनके लिए प्राथमिकता है।
एक दिन पहले कूड़े के ढेर में लगी आग से हजारों लोगों की तबीयत बिगड़ने पर भी विधायक की त्वरित पहल सामने आई थी। लगातार दो जनहित मामलों में सक्रिय हस्तक्षेप से यह संदेश गया है कि रुद्रपुर का नेतृत्व जमीनी समस्याओं के प्रति सजग है।
ग्राम प्रधान भगवानपुर विनीत सोलंकी, भरत मिश्रा, सुधीर चौधरी, राजीव शुक्ला, राम सिंह, रामजी सिंह, हरजीत सिंह, बंटी त्रिपाठी, कुलदीप सिंह, आयुष चिलाना, सत्यसुकांत गुप्ता, राजू सिंह, अरविन्द यादव, हरीश चंद, हरि किशन, सुकेश, मनीष कुमार, राजा राम, राजदेव सागर, साधु सरण, अंकित वर्मा, मनोज चौधरी, महगूप्रसाद शर्मा, कविता, कुसुम चौधरी, इंदु चौधरी, मुनेश चौधरी, पूनम चौधरी, लक्ष्मी जायसवाल, महेंद्र गुसाई सहित सभी ग्रामीणों की एकजुटता और विधायक के हस्तक्षेप से धरना शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त हुआ।
आज सोशल मीडिया पर विधायक शिव अरोड़ा का वायरल होना केवल प्रचार नहीं, बल्कि उस भरोसे का प्रतिबिंब है जो जनता अपने जनप्रतिनिधि में देखना चाहती है। यह कार्रवाई न केवल रुद्रपुर बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए एक संदेश है—जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं।




