रुद्रपुर की यह घटना सत्ता, धन और भ्रष्टाचार के गठजोड़ का कड़वा सच उजागर करती है। गरीबों के आशियानों पर चलने वाले बुलडोज़र न केवल उनके घरों को, बल्कि उनके सपनों और आशाओं को भी ध्वस्त कर रहे हैं। यह समय है कि हम सब मिलकर इस अन्याय के खिलाफ खड़े हों और एक न्यायसंगत समाज की स्थापना करें, जहाँ हर व्यक्ति को सम्मान और अधिकार मिले।

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संपादकीय लेख;रुद्रपुर: गरीबों के आशियानों पर बुलडोज़र और सत्ता का साया

उत्तराखंड के रुद्रपुर में हाल ही में लोक निर्माण विभाग द्वारा रोडवेज़ के सामने स्थित दुकानों को हटाने की कार्रवाई की गई, जिसमें पाँच हिंदू परिवारों के घरों पर बुलडोज़र चलाया गया। यह घटना स्थानीय नेताओं, नौकरशाहों और बिल्डरों के बीच गहरे गठजोड़ की ओर इशारा करती है, जहाँ गरीबों के आशियानों को उजाड़कर निजी स्वार्थों की पूर्ति की जा रही है।

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)

नेताओं और बिल्डरों का अपवित्र गठबंधन

इतिहास साक्षी है कि जब-जब गरीबों की बस्तियाँ उजाड़ी गईं, तब-तब सत्ताधारी नेताओं का संरक्षण उन ठेकेदारों और बिल्डरों को प्राप्त था, जिन्होंने सत्ता की सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए गरीबों के घरों को निशाना बनाया। ठेकेदारों की यह हिम्मत तभी बढ़ती है जब उन्हें नेताओं और अधिकारियों का समर्थन मिलता है, जो मौके पर पहुँचकर कानूनी प्रक्रिया की आड़ में गरीबों को समझाने का ढोंग रचते हैं।

गरीबों की मेहनत पर चलता बुलडोज़र

वर्षों की मेहनत से गरीबों ने अपनी छोटी-छोटी झोपड़ियाँ बनाई थीं, जो एक झटके में जमींदोज़ कर दी गईं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन लोगों ने अपनी जिंदगी की पूंजी लगाकर सिर पर छत बनाई, उन्हें सत्ता और पैसे के खेल में बेघर कर दिया गया। यह अमानवीयता और अन्याय का चरम उदाहरण है।

इतिहास का सबक: सत्ता का चक्र

इतिहास गवाह है कि जब सत्ता का दुरुपयोग होता है और गरीबों का शोषण किया जाता है, तो अंततः वही सत्ता धारियों को भी हिसाब देना पड़ता है। मुगल बादशाहों के वंशज आज दिल्ली की गलियों में साधारण जीवन जी रहे हैं। यह सत्ता के चक्र का संकेत है कि जो आज गरीबों को सताते हैं, कल उनकी संततियाँ भी उसी दर्द से गुजर सकती हैं।

आध्यात्मिक न्याय: जैसा करोगे, वैसा भरोगे

हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक ग्रंथों में स्पष्ट कहा गया है कि कर्मों का फल अवश्य मिलता है। उत्तराखंड की पवित्र भूमि पर यदि भ्रष्टाचार और अन्याय किया जाएगा, तो देवभूमि के देवी-देवता सात पीढ़ियों तक उसका दंड देंगे। यह विश्वास हमारी संस्कृति की जड़ में है कि अन्याय और शोषण का अंत निश्चित है।

समाज की पुकार: न्याय और समानता की मांग

यह समय है कि समाज जागरूक हो और ऐसे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाए। गरीबों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें न्याय दिलाना हम सबकी जिम्मेदारी है। सत्ता, नेता, अधिकारी और बिल्डर यदि अपने स्वार्थों के लिए गरीबों का शोषण करते हैं, तो समाज को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए।


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