उत्तराखंड में लोकायुक्त की आवश्यकता: भ्रष्टाचार पर लगाम का एक कारगर उपाय

Spread the love

मध्यप्रदेश के ग्वालियर से सामने आई हालिया घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि भ्रष्टाचार किस हद तक हमारे सिस्टम में जड़ें जमा चुका है। एक मामूली ट्रैफिक कांस्टेबल, जिसकी मासिक आय ₹30,000–₹40,000 के बीच होती है, उसके पास से लोकायुक्त की छापेमारी में करोड़ों की संपत्ति बरामद होना न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी बताता है कि जवाबदेही और पारदर्शिता की कितनी सख्त जरूरत है।

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)संवाददाता]

जब एक छोटे स्तर का कर्मचारी इतनी संपत्ति अर्जित कर सकता है, तो सोचिए उन अफसरों और प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों की असलियत क्या होगी? यही वह बिंदु है, जहाँ से उत्तराखंड जैसे relatively शांत और कम आबादी वाले राज्य में भी चिंतन शुरू होना चाहिए।

उत्तराखंड के संदर्भ में बात करें तो:

उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है, जहाँ संसाधनों की सीमितता है और सरकारी योजनाओं पर आम जनता की निर्भरता अधिक है। भ्रष्टाचार यहाँ विकास की रफ्तार को धीमा कर देता है। सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और जलप्रबंधन जैसी जरूरी योजनाओं में जब धन का दुरुपयोग होता है, तो उसका सीधा असर ग्रामीण जनता पर पड़ता है।

फिलहाल उत्तराखंड में लोकायुक्त की संस्था नाम मात्र की है — प्रभावशाली नहीं, और ना ही पर्याप्त अधिकारों से सुसज्जित। जबकि लोकायुक्त का एक मजबूत, स्वतंत्र और सक्रिय ढांचा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में बेहद अहम भूमिका निभा सकता है।

मध्यप्रदेश की घटना से सीख लेते हुए, उत्तराखंड सरकार को चाहिए कि:

  1. लोकायुक्त को संवैधानिक और कानूनी ताकत दी जाए।
  2. उसे स्वतः संज्ञान लेने और छापेमारी करने का अधिकार मिले।
  3. राज्य में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति का नियमित ऑडिट किया जाए।
  4. जनता को भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत करने के लिए आसान और सुरक्षित माध्यम दिए जाएं।

मध्यप्रदेश की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार केवल बड़े पदों तक सीमित नहीं, बल्कि यह नीचे से लेकर ऊपर तक फैला हुआ है। उत्तराखंड में यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो हालात किसी भी अन्य राज्य से अलग नहीं रहेंगे। अब वक्त आ गया है कि उत्तराखंड भी एक सशक्त लोकायुक्त की स्थापना कर भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की शुरुआत करे।

उत्तराखंड में लोकायुक्त का होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह संस्था भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का एक प्रभावी उपकरण हो सकती है। राज्य में आए दिन घोटालों, अफसरशाही की मनमानी और नेताओं की जवाबदेही की कमी की खबरें सामने आती हैं। ऐसे में एक स्वतंत्र और सशक्त लोकायुक्त आम जनता का भरोसा बहाल कर सकता है।

लोकायुक्त की शक्तियाँ

  1. जांच का अधिकार: लोकायुक्त को किसी भी सरकारी अफसर, मंत्री, मुख्यमंत्री तक के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर जांच का अधिकार होता है।
  2. साक्ष्य जुटाना: वह दस्तावेज जब्त कर सकता है, पूछताछ कर सकता है, गवाह बुला सकता है।
  3. सिफारिश देने का अधिकार: जांच पूरी होने पर लोकायुक्त सरकार को कार्रवाई के लिए सिफारिश दे सकता है।
  4. स्वतंत्रता: लोकायुक्त एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था होती है, जिस पर सरकार का सीधा नियंत्रण नहीं होता।
  5. जनहित के मामलों में दखल: कई राज्यों में लोकायुक्त को सरकारी योजनाओं की निगरानी और जनहित में दखल देने का भी अधिकार होता है।

उत्तराखंड सरकार लोकायुक्त लागू क्यों नहीं करना चाहती?

अब यह सवाल जरा कड़वा है, पर हकीकत यही है कि—

  1. राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी: लोकायुक्त से सबसे ज़्यादा खतरा भ्रष्ट नेताओं और अफसरों को होता है। इसलिए सत्ता में बैठे लोग नहीं चाहते कि उनके ऊपर कोई निगरानी रखे।
  2. ‘रबर स्टैम्प’ संस्थाओं की आदत: सरकारें ऐसी संस्थाएँ पसंद करती हैं जिनका नियंत्रण उनके पास रहे। जबकि लोकायुक्त स्वतंत्र होता है।
  3. पूर्ववर्ती सरकारों का उदाहरण: 2011 में जब जनलोकपाल आंदोलन के असर से लोकायुक्त विधेयक पास हुआ, तो सरकारें खुद घबरा गईं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इसे लागू करने का दिखावा किया, पर वास्तव में आज तक इसे मजबूत रूप में नहीं लागू किया गया।
  4. भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की मंशा: अगर लोकायुक्त लागू हो गया तो घोटालों की परतें खुलेंगी, और कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। इससे राजनीतिक नुकसान का डर होता है।

लोकायुक्त उत्तराखंड जैसे छोटे और संवेदनशील राज्य के लिए ज़रूरी है, जहाँ संसाधन सीमित हैं और जनता की अपेक्षाएँ ज़्यादा। लेकिन जब तक जनता खुद इस मुद्दे पर आवाज़ नहीं उठाएगी, नेताओं को कोई दबाव महसूस नहीं होगा। लोकायुक्त का मुद्दा जनता के एजेंडे में लाना पड़ेगा—तभी बदलाव संभव है।


Spread the love