

देहरादून/रुद्रपुर – फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के बैग अब सिर्फ खाना नहीं, बल्कि महंगी विदेशी शराब की अवैध खेप भी ढो रहे हैं। देहरादून में आबकारी विभाग की जनपदीय प्रवर्तन टीम ने सहारनपुर निवासी अखिल बंसल के घर पर छापा मारकर हरियाणा मार्का अवैध विदेशी शराब की 46 बोतलें बरामद कीं। इनमें ब्लैक डॉग, ब्लैक एंड वाइट और एब्सोल्यूट वोडका जैसी महंगी ब्रांड शामिल हैं। इन बोतलों पर स्पष्ट लिखा था – “सिर्फ हरियाणा में बिक्री के लिए”।

पूछताछ में आरोपी ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि वह इन शराब की बोतलों को जोमैटो और ब्लिंकिट जैसे फूड डिलीवरी बैग्स में भरकर देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में ग्राहकों तक पहुंचाता था, ताकि किसी को शक न हो।
आबकारी अधिनियम की धारा 63 के तहत दर्ज हुआ मुकदमा
इस कार्रवाई में आबकारी निरीक्षक प्रेरणा बिष्ट, उप निरीक्षक उमराव राठौर और प्रधान सिपाही राकेश, हेमंत, गोविंद शामिल रहे। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
रुद्रपुर में भी “डिलीवरी बॉय माफिया” का खतरा: बिना सत्यापन के घूम रही हैं संदिग्ध गाड़ियां
देहरादून की इस कार्रवाई ने रुद्रपुर समेत पूरे कुमाऊं क्षेत्र में एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। क्या रुद्रपुर में भी जोमैटो, ब्लिंकिट, स्वीगी और अन्य प्लेटफॉर्म्स के नाम पर अवैध गतिविधियाँ हो रही हैं?
शहर में दर्जनों फूड डिलीवरी बॉय बिना किसी पुलिस सत्यापन के गाड़ियों में खुलेआम घूम रहे हैं। इनमें से कई दोपहिया वाहन बगैर नंबर प्लेट या फर्जी नंबर के देखे जाते हैं। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि रात्रि के समय इनकी गतिविधियां संदिग्ध लगती हैं और इनका कोई स्थानीय रजिस्ट्रेशन भी नहीं होता।
एक स्थानीय व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,
“कई बार देखा है कि डिलीवरी बैग में शराब की बोतलें या दूसरी संदिग्ध चीजें रखी होती हैं। लेकिन पुलिस जांच नहीं करती। ये लोग कानून से ऊपर हैं क्या?”
क्या कहता है कानून?
आबकारी अधिनियम की धारा 63 के अनुसार, किसी अन्य राज्य के लिए चिन्हित शराब की उत्तराखंड में बिक्री, परिवहन, भंडारण अथवा वितरण पूर्णतः गैरकानूनी है। पकड़े जाने पर आरोपी को कठोर सजा हो सकती है।
मांग: प्रत्येक डिलीवरी बॉय की हो सत्यापन जांच
रुद्रपुर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों की मांग है कि हर फूड डिलीवरी एजेंसी के डिलीवरी बॉय का स्थानीय पुलिस से सत्यापन अनिवार्य किया जाए।
इसके अलावा, हर डिलीवरी वाहन पर स्पष्ट नंबर प्लेट, कंपनी का आईडी कार्ड, और जीपीएस ट्रैकिंग की सुविधा होनी चाहिए ताकि अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके।
निष्कर्ष
देहरादून में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब अपराधी पारंपरिक तस्करी के रास्ते नहीं, बल्कि तकनीकी सेवाओं और आम लोगों के बीच विश्वास का फायदा उठाकर अपने गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं। यदि रुद्रपुर प्रशासन समय रहते सचेत नहीं हुआ, तो यह ट्रेंड यहां भी विकराल रूप ले सकता है।
रिपोर्ट: अवतार सिंह बिष्ट
विशेष संवाददाता, शैल ग्लोबल टाइम्स / हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
रुद्रपुर, उत्तराखंड




