

रुद्रपुर ट्रांजिट कैंप का बैंगन फील्ड, जहां बच्चों को खेलने की जगह मिलनी चाहिए थी, आज जुए, शराब और अपराध की मंडी बन चुका है। और इस अंधेरे साम्राज्य का खुद को राजा मानने वाला एक पार्षद बीती रात पुलिस की लाठियों की मार झेलकर भी शायद सुधरने को तैयार नहीं।

एक जनप्रतिनिधि जब अपराध का रक्षक बन जाए, तो समाज की आत्मा घायल होती है। यही हो रहा है ट्रांजिट कैंप में। लाठी खाकर भागा यह पार्षद अब न सिर्फ अपने पुराने काले कारनामों की वजह से शर्मसार है, बल्कि अब पुलिसिया कार्रवाई के बाद भी खुद को पीड़ित बताने का ढोंग रच रहा है।
पार्षद या अपराधी? – जनता पूछ रही सवाल,बीते गुरुवार की रात ट्रांजिट कैंप के बदनाम “बैंगन फील्ड” में जब पुलिस ने तितली जुए के अड्डे पर छापा मारा, तो वहां मौजूद दर्जनों लोगों के साथ-साथ एक पार्षद भी पकड़ा गया। सूत्रों के अनुसार, पुलिस को पहले से सूचना थी कि यह अड्डा वर्षों से चल रहा है और स्थानीय पार्षद ही इसका संचालन करता है।
पुलिस ने मौके पर लाठियां भांजीं। पार्षद साहब को भी ‘सौगात’ मिली, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर सभी भाग निकले।अब सवाल यह है कि एक निर्वाचित पार्षद आखिर ऐसी जगह क्या कर रहा था? और वह भी उस समय, जब खुद उसी के खिलाफ पहले से कई संगीन आरोप दर्ज हैं।
होली की ‘हरकत’: महिला से छेड़छाड़ के मामले में पहले ही हो चुका है निष्कासन,यह वही पार्षद हैं जो होली के दिन एक महिला से अभद्रता और छेड़छाड़ करने के आरोप में पहले ही अपनी पार्टी से 6 वर्षों के लिए निष्कासित किए जा चुके हैं।
लेकिन सवाल यही है – क्या निष्कासन से कुछ फर्क पड़ा? बिल्कुल नहीं। सूत्रों के अनुसार, यह पार्षद पार्टी से बाहर होने के बावजूद कुछ नेताओं की ‘छाया’ में फल-फूल रहा है।यही छाया उसे अब तक सजा से बचाती आई है – लेकिन अब जनता और कानून दोनों की नजरें गड़ी हैं।कच्ची शराब से जुए तक – एक पूरा ‘सिस्टम’ चला रहा है पार्षद!
स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्षद का मुख्य पेशा अब जनसेवा नहीं, बल्कि अवैध धंधों से ‘सेवा शुल्क’ वसूलना हो गया है।
बैंगन फील्ड में जुआ, ट्रांजिट कैंप में कच्ची शराब और नशे का सामान खुलेआम बिकता है – और यह सब स्थानीय पार्षद के संरक्षण में।
एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया –
“यह पार्षद चुनाव लड़कर नहीं, ‘धंधा’ करके करोड़ों का मालिक बना है। वह किसी अधिकारी से डरता नहीं, क्योंकि उसे ऊपर से संरक्षण मिला है।”बीजेपी की छवि पर बट्टा – लेकिन कोई एक्शन नहीं!भले ही पार्टी ने निष्कासित कर दिया हो, लेकिन आज भी यह पार्षद खुलेआम पार्टी के झंडे का इस्तेमाल करता है।
यह न सिर्फ भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि सरकार की भ्रष्टाचार-विरोधी बातों पर भी सवाल खड़े कर रहा है। क्या बीजेपी सिर्फ दिखावे के लिए ऐसे लोगों को पार्टी से निकालती है, लेकिन पर्दे के पीछे उन्हें बचाने का काम जारी रहता है?
सोशल मीडिया बना जनाक्रोश का आईना
पार्षद पर लाठियों की बरसात की खबर वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
“ये लाठियां कम थीं, अब जनता की बारी है”,
“पार्षद नहीं, माफिया है ये!”,
“जनप्रतिनिधि के भेष में जनता का दुश्मन”
जैसी टिप्पणियों से सोशल मीडिया भरा हुआ है। लोग खुलकर कह रहे हैं – ट्रांजिट कैंप को इस ‘कालिख’ से मुक्त कराना ही होगा।
जनता के लिए अपील – अपराधियों को वोट न दें,यह समय सिर्फ निंदा करने का नहीं, आत्मनिरीक्षण का भी है। जब हम ऐसे लोगों को वोट देते हैं, तो हम अपनी ही गली-कूचों को अपराध का अड्डा बनने देते हैं।
जनता को यह समझना होगा कि पार्षद सिर्फ पानी की पाइप और सीवर नहीं होता – वह समाज की सोच का चेहरा होता है।
जो पार्षद महिलाओं से छेड़छाड़ करता है, शराब बिकवाता है, जुए के अड्डे चलवाता है – उसे सत्ता से नहीं, सलाखों के पीछे होना चाहिए।
पुलिस की कार्रवाई सराहनीय, लेकिन अब FIR होनी चाहिए
पुलिस की रेड और लाठीचार्ज निश्चित रूप से साहसिक कदम था, लेकिन केवल दौड़ाकर भगाना काफी नहीं।
इस पार्षद और उसके साथियों पर विधिवत एफआईआर होनी चाहिए। चुनावी हलफनामों की जांच होनी चाहिए – कि कैसे एक मामूली जनप्रतिनिधि करोड़ों का मालिक बन गया।
अंत में: ट्रांजिट कैंप को चाहिए असली नेतृत्व, नशे का नहीं
ट्रांजिट कैंप रुद्रपुर का वह क्षेत्र है जहां मेहनतकश मजदूर रहते हैं। जहां बच्चों को स्कूल चाहिए, महिलाओं को सुरक्षा चाहिए, और युवाओं को रोजगार।
लेकिन जब वहां का पार्षद ही नशे और जुए का कारोबारी हो, तो यह क्षेत्र गुनाहों की गली बन जाता है।
आज जरूरत है कि जनता ऐसे नकली नेताओं को पहचान कर नकार दे। पुलिस को चाहिए कि वह दबाव से न डरे और कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ाए। और सरकार को चाहिए कि वह ऐसे अपराधी प्रतिनिधियों की कोई ‘राजनीतिक छत्रछाया’ न बनाए रखे।




