उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में करोड़ों का वेतन घोटाला! तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण, फर्जी पदोन्नति और बदले गए रोस्टर पर उठे सवाल

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हरिद्वार। उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय एक बार फिर बड़े घोटाले की आंच में है। विश्वविद्यालय पर करोड़ों रुपये के वेतन घोटाले, फर्जी पदोन्नतियों, तदर्थ शिक्षकों के मनमाने विनियमितीकरण और नियमों के खिलाफ रोस्टर बदलकर भर्ती करने के गंभीर आरोप लगे हैं। विश्वविद्यालय के ही वरिष्ठ शिक्षक डॉ. सत्य प्रकाश मिश्रा ने शासन को भेजे शिकायती पत्र में समूचे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

संवाददाता,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/ अवतार सिंह बिष्ट/उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी!

डॉ. मिश्रा के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने 2014, 2015 और 2018 में शिक्षकों की पदोन्नति बिना स्पष्ट नियमों के की। विश्वविद्यालय में UGC की Career Advancement Scheme (CAS) लागू होने के बावजूद, मौजूदा प्रशासन ने खुद के पदोन्नति नियम बनाने के लिए शासन में प्रस्ताव भेजा, जिससे संदेह और गहरा हो गया है।

विनियमितीकरण पर सवाल

डॉ. मिश्रा ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2014-15 में 8 तदर्थ शिक्षकों को बिना शासन की अनुमति के उच्च वेतनमान पर विनियमित कर दिया। इस प्रक्रिया में न तो राज्य की विनियमितीकरण नियमावली-2013 का पालन किया गया और न ही शासन से कोई अनुमति ली गई। दिलचस्प बात यह है कि जिन शिक्षकों को 2015 में विनियमित किया गया, उनमें से चार शिक्षकों को मात्र तीन वर्ष के भीतर ही CAS के तहत एसोसिएट प्रोफेसर बना दिया गया।

दोहरी लाभ योजना का खुलासा

शिकायत में बड़ा खुलासा यह भी किया गया है कि विश्वविद्यालय ने तीन शिक्षकों—डा. अजय कुमार गुप्ता, डा. प्रेमचंद शर्मा और डा. सुमन मिश्रा—को एक साथ Assured Career Progression Scheme (ACP) और CAS के तहत दोहरा लाभ दे दिया। इनमें डॉ. अजय कुमार गुप्ता अभी एसोसिएट प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं लेकिन उन्हें प्रोफेसर स्तर का वेतनमान (ग्रेड पे ₹10,000) एसीपी के जरिए दिया जा रहा है। जबकि शासन का स्पष्ट आदेश है कि UGC समतुल्य वेतनमान केवल उन्हीं शिक्षकों को मिलेगा जो UGC के मानकों को पूरा करते हों। परन्तु अधिकांश शिक्षक इन मानकों पर खरे नहीं उतरते।

रोस्टर में फेरबदल और भर्ती घोटाला

2016 में विश्वविद्यालय ने विभिन्न पदों के लिए रोस्टर तैयार किया और विज्ञापन जारी किया था। लेकिन विधानसभा चुनावों के कारण प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी। डॉ. मिश्रा का आरोप है कि मात्र छह महीने बाद, विश्वविद्यालय के कुछ प्रभावशाली लोगों ने रोस्टर बदलकर नया विज्ञापन जारी किया। आरोप है कि इस नई भर्ती प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हुईं। कई विभागों में विज्ञापित पदों से अधिक नियुक्तियां की गईं। कई चयनित अभ्यर्थी निर्धारित अनुभव और योग्यता नहीं रखते थे। राज्य के क्षैतिज आरक्षण में भी गंभीर गड़बड़ी की बात सामने आई है। महालेखाकार की रिपोर्ट में भी इन अनियमितताओं का जिक्र है।

फर्जी कुलपति और कार्यपरिषद के निर्णय

सबसे गंभीर आरोप यह है कि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, जिन्हें शिकायतकर्ता ‘फर्जी कुलपति’ बता रहे हैं, ने इन सारी अनियमितताओं को संरक्षण दिया। उनकी अध्यक्षता में कार्यपरिषद की बैठकों में अवैध निर्णय लिए गए। डॉ. मिश्रा ने सवाल उठाया है कि जब कुलपति ही भ्रष्टाचार में लिप्त हों, तो उनकी अध्यक्षता में लिए गए फैसले कैसे वैध माने जा सकते हैं?

स्पेशल ऑडिट से बचने की कोशिश

शिकायत के अनुसार, मौजूदा विश्वविद्यालय प्रशासन भी शासन के निर्देशों के बावजूद स्पेशल ऑडिट से बचने की कोशिश कर रहा है। डॉ. मिश्रा का कहना है कि अगर विशेष ऑडिट हुआ, तो विश्वविद्यालय के शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक अनेक अधिकारी और शिक्षक फंस सकते हैं।

न्यायालय का सहारा

विवादित पदोन्नति और वेतन मामलों में कई शिक्षकों ने न्यायालय की शरण ले ली है। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सही तथ्यों को कोर्ट में नहीं रख रहा, जिससे कई मामलों में निर्णय शिक्षकों के पक्ष में जा रहे हैं। आलम यह है कि रिटायर शिक्षकों को प्रोविजनल पेंशन पर ही संतोष करना पड़ रहा है।

डॉ. मिश्रा ने अपनी शिकायत में मांग की है कि—

  • अवैध पदोन्नति प्रक्रिया को निरस्त किया जाए।
  • अवैध वेतन भुगतान की वसूली दोषी शिक्षकों और अधिकारियों से की जाए।
  • भ्रष्टाचार में लिप्त कुलपति और अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  • तदर्थ शिक्षकों का विनियमितीकरण रद्द किया जाए।
  • रोस्टर घोटाले की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

शासन की चुप्पी

गौरतलब है कि अभी तक शासन की ओर से इस पूरे घोटाले पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि मामला काफी गंभीर है और शासन स्तर पर स्पेशल ऑडिट कराने पर विचार चल रहा है।

इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस प्रकरण पर कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। क्रमशः पार्ट1


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