संपादकीय:रुद्रपुर में नई सोच और नई दिशा : विधायक शिव अरोड़ा और महापौर विकास शर्मा की जोड़ी से जनता को उम्मीदें

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रुद्रपुर। उत्तराखंड की परिकल्पना सिर्फ़ एक भौगोलिक इकाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह व्यवस्था, पारदर्शिता और विकास के उन सपनों से भी जुड़ी है, जिन्हें राज्य आंदोलन के दौरान जनता ने देखा था। रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों विधायक शिव अरोड़ा और नवनिर्वाचित नगर महापौर विकास शर्मा की कार्यप्रणाली को लेकर एक सकारात्मक ऊर्जा महसूस की जा रही है।

विधायक शिव अरोड़ा ने अपने कार्यकाल के दौरान खुद को एक सशक्त, स्पष्ट और प्रतिबद्ध जनप्रतिनिधि के रूप में स्थापित किया है। अतिक्रमण हटाने की मुहिम हो या हाईवे किनारे पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करना—उन्होंने बार-बार यह साबित किया है कि रुद्रपुर के विकास के लिए वे कठिन से कठिन निर्णय लेने में भी पीछे नहीं हटते। शहर की बढ़ती यातायात समस्या को देखते हुए रिंग रोड निर्माण कार्य को तेज़ी से आगे बढ़ाना उनकी दूरदर्शिता का उदाहरण है। यही नहीं, उन्होंने राज्य की सरकारी जमीनों को बचाने और अवैध कब्ज़ों के खिलाफ ठोस कार्रवाई कर जनता को विश्वास दिलाया है कि विकास किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर (उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी)

इसी कड़ी में नगर निगम के नवनिर्वाचित महापौर विकास शर्मा भी रुद्रपुर की उम्मीदों पर खरे उतरते दिखाई दे रहे हैं। भाजपा संगठन से जुड़े रहने और सामाजिक सरोकारों से लगातार सक्रिय रहने का लाभ उन्हें जनता के विश्वास के रूप में मिला है। अब उनकी प्राथमिकता नगर निगम क्षेत्र में स्वच्छता, जलनिकासी, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना है। महापौर के रूप में विकास शर्मा का साफ़ संदेश है कि नगर निगम की नीतियों में भाई-भतीजावाद या पक्षपात को स्थान नहीं मिलेगा, बल्कि पारदर्शिता और जनहित सर्वोच्च रहेंगे।

रुद्रपुर की जनता भी यह महसूस कर रही है कि विधायक और महापौर की यह नई जोड़ी राज्य की परिकल्पना को सार्थक दिशा देने वाली है। एक ओर विधानसभा स्तर पर शिव अरोड़ा का सशक्त नेतृत्व है, तो दूसरी ओर नगर निगम स्तर पर विकास शर्मा की प्रशासनिक निष्ठा। दोनों की प्राथमिकता में केवल विकास, जनहित और पारदर्शिता है।

भारतीय जनता पार्टी का जनसेवा का संस्कार और अनुशासन इन दोनों नेताओं की कार्यशैली में साफ झलकता है। यही कारण है कि रुद्रपुर की जनता को भरोसा है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र उत्तराखंड की परिकल्पना का एक आदर्श उदाहरण बनेगा।



रुद्रपुर की राजनीति में अक्सर यह कहा जाता है कि विधायक शिव अरोड़ा और महापौर विकास शर्मा का आपसी समीकरण प्रत्यक्ष तौर पर 36 का आंकड़ा दर्शाता है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि दोनों का मकसद एक ही है—रुद्रपुर को पूरे उत्तराखंड का सबसे व्यवस्थित और शुभ अवस्थित नगर बनाना।

फैजलपुर महरौला के संदर्भ में विधायक शिव अरोड़ा की हालिया सकारात्मक पहल इस दिशा में एक नया अध्याय जोड़ती है। कभी इस क्षेत्र को लेकर जो शंकाएं और विवाद खड़े किए गए थे, आज वही क्षेत्र विधायक के प्रयासों से संवाद और समाधान का केंद्र बन रहा है। यहां के निवासियों की धार्मिक आस्था और जीवन से जुड़े अधिकारों को मान्यता देना न केवल एक संवेदनशील राजनीतिक निर्णय है, बल्कि यह संदेश भी है कि विधायक की प्राथमिकता जनता का विश्वास और उनका सम्मान है।

विधायक अरोड़ा का यह रुख दर्शाता है कि विकास की प्रक्रिया केवल सड़क, रिंग रोड या अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक समरसता और नागरिक अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस दृष्टिकोण से देखा जाए तो फैजलपुर महरौला जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विधायक की पहल न केवल क्षेत्रीय राजनीति को परिपक्वता देती है, बल्कि रुद्रपुर को पूरे राज्य के लिए आदर्श नगर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

महापौर विकास शर्मा भी अपने स्तर पर नगर निगम की बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में सक्रिय हैं। ऐसे में विधायक और महापौर की भूमिकाएं भले अलग-अलग दिखाई दें, मगर उद्देश्य एक ही है—रुद्रपुर को उत्तराखंड की परिकल्पना का जीवंत उदाहरण बनाना।


रुद्रपुर में विधायक शिव अरोड़ा अतिक्रमण के मुद्दे पर बेहद गंभीर दिखाई दिए हैं और बुलडोज़र कार्रवाई कर यह सिद्ध भी किया है कि विकास के मार्ग में किसी भी अवैध कब्ज़े को स्थान नहीं मिलेगा। वहीं, महापौर विकास शर्मा भी नगर निगम क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाने के प्रयासों में जुटे हैं। उत्तराखंड की परिकल्पना केवल राज्य निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी भूमि और संसाधनों की रक्षा से जुड़ी है। ऐसे में विधायक और महापौर की प्रतिबद्धता यह संदेश देती है कि आने वाले समय में रुद्रपुर ही नहीं, पूरा उत्तराखंड अतिक्रमण मुक्त होकर वास्तविक राजकीय परिकल्पना को साकार करेगा।

अतिक्रमण मुक्त रुद्रपुर की परिकल्पना?रुद्रपुर की वास्तविक परिकल्पना तभी सार्थक होगी जब प्रत्येक भू-माफिया से उत्तराखंड राज्य सरकार की भूमि को मुक्त कराया जाएगा और सड़क किनारे हो रहे अतिक्रमण का अंत होगा। अवैध गतिविधियों का संचालन रोकना, नशा तस्करी पर विराम लगाना और स्पा सेंटरों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना भी उतना ही आवश्यक है। शहर में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर रोक, स्थानीय युवाओं को न्यूनतम 70% रोजगार सुनिश्चित करना और महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना रुद्रपुर के सुनहरे भविष्य की नींव रखेगा। साथ ही, बढ़ते अपराधों पर कड़ी लगाम और पारदर्शी प्रशासन ही जनता को विश्वास दिला सकता है कि रुद्रपुर अपराध मुक्त होकर उत्तराखंड की परिकल्पना का आदर्श उदाहरण बनेगा।

विधायक शिव अरोड़ा ने बुलडोज़र कार्रवाई से अतिक्रमण पर अपनी गंभीरता पहले ही साबित कर दी है, वहीं महापौर विकास शर्मा भी नगर निगम स्तर पर ठोस प्रयास कर रहे हैं। जनता की ओर से एक बड़ा सवाल यह है—क्या विधायक और महापौर मिलकर आने वाले समय में रुद्रपुर को अतिक्रमण, अपराध और भ्रष्टाचार से मुक्त कर वह नगर बना पाएंगे, जिसकी कल्पना राज्य आंदोलन के समय की गई थी?


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