

पौड़ी गढ़वाल। देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) दिवंगत जनरल बिपिन रावत के पैतृक गांव सैंणा में इन दिनों एक बार फिर सैनिक उत्साह और जोश की लहर दौड़ रही है। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर (जीआरआरसी), लैंसडौन की पहल पर यहां अग्निवीरों का एडवांस प्रशिक्षण कैंप चल रहा है। दिन-रात युद्धाभ्यास करते जवानों की मौजूदगी से पलायनग्रस्त यह गांव अब फिर से गुलजार हो उठा है।

गांव में पहली बार रेजिमेंट का कैंप
सैंणा गांव, जो द्वारीखाल प्रखंड में स्थित है और लैंसडौन से करीब 38 किमी दूर है, में यह पहली बार है जब रेजिमेंट का ऐसा कैंप लगाया गया है। ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी की देखरेख में चल रहे इस कैंप में करीब 450 अग्निवीर दिन-रात कठोर सैन्य प्रशिक्षण ले रहे हैं। गांव की शांत वादियों में अब बंदूकों की आवाज, युद्धाभ्यास की गूंज और सैनिकों के कदमों की आहट सुनाई दे रही है।
टेंटों से सजा गांव, रात में भी चहल-पहल
अग्निवीरों के रहने के लिए गांव में सैकड़ों टेंट लगाए गए हैं। इनमें भोजनालय, विश्राम स्थल और प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। रात के समय भी गांव में रोशनी और चहल-पहल का माहौल रहता है। ग्रामीणों के अनुसार, यह नजारा पहली बार देखने को मिल रहा है।
जनरल रावत की मिट्टी से मिल रही प्रेरणा
गांव की मिट्टी की महक अग्निवीरों को जनरल रावत की वीरता और समर्पण की याद दिला रही है। रेजिमेंट का यह कैंप जनरल रावत को श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित किया गया है। ब्रिगेडियर नेगी के अनुसार, “यह प्रशिक्षण केवल सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि जनरल रावत की वीरता को नमन करने का प्रतीक है।”
साफ-सफाई और नवजीवन का अभियान
कैंप की शुरुआत के समय सैंणा गांव में झाड़ियां और बंजर खेत थे। अग्निवीरों ने स्वयं अभियान चलाकर झाड़ियां हटाईं, रास्तों की मरम्मत की और गांव को फिर से जीवन से भर दिया। जनरल रावत के पैतृक आवास के पास स्थित सेल्फी प्वाइंट को भी सैनिकों ने पुनर्जीवित किया और निकटवर्ती मैदान को खेल योग्य बना दिया है।
ग्राम प्रधान ने किया स्वागत
ग्राम प्रधान अनीता देवी ने कहा, “गढ़वाल राइफल्स की यह पहल न केवल युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि गांव में नई ऊर्जा भी लेकर आई है। आज सैंणा की मिट्टी फिर से गूंज रही है, जैसे जनरल रावत के समय में हुआ करती थी।”
दो चरणों में होगा प्रशिक्षण
पहले चरण में 450 अग्निवीर दो सप्ताह तक यहां प्रशिक्षण लेंगे, इसके बाद दूसरे दल में 550 अग्निवीरों का आगमन होगा। इस दौरान उन्हें युद्धाभ्यास, टीम वर्क, पर्वतीय प्रशिक्षण और शारीरिक दक्षता के साथ-साथ देशभक्ति का पाठ भी सिखाया जाएगा।
अग्निवीरों के कारण फिर जागा सैंणा गांव
जो गांव कभी पलायन से वीरान हो गया था, वहां अब जवानों की उपस्थिति ने रौनक लौटा दी है। खेतों में कदमताल की ध्वनि और सुबह के परेड से निकलती ऊर्जा पूरे गांव को जागृत कर रही है। सैंणा की वादियां एक बार फिर वीरता, अनुशासन और त्याग के गीत गा रही हैं।
यह कैंप सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि उस मिट्टी के प्रति नमन है जिसने देश को एक महान सेनानी—जनरल बिपिन रावत—दिया।




