

रुद्रपुर में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उमड़ा शोक और क्रोध का सैलाब — शिक्षक संघ ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा से न्याय सुनिश्चित करने की मांग की, दोषियों को फांसी या आजीवन कारावास देने की अपील

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
रुद्रपुर ,सुषमा पंत की दर्दनाक मौत ने पूरे शिक्षक समाज को झकझोर कर रख दिया है। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ, रुद्रपुर ने आज एक विशेष श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर न केवल दिवंगत शिक्षिका को भावभीनी श्रद्धांजलि दी, बल्कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने की आवाज बुलंद की। सभा में उपस्थित सैकड़ों शिक्षकों ने एक स्वर में कहा — “सुषमा हमारी नहीं, पूरे समाज की बेटी थी; उसकी चिता की राख न्याय की पुकार बन चुकी है।”
श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता संघ की अध्यक्षा आशा और धैर्य नयाल ने की, जबकि संचालन हरीश देनाई मंत्री अर्चना रानी ने किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ उपाध्यक्ष मो. आरिफ मलिक, उपाध्यक्ष गायत्री पांडे, जीवन सिंह नेगी, शालिनी शर्मा, धीरज पांडे, कीर्ति निधि शर्मा, पंकज मिगलानी, सुमन दुमका, संगठन मंत्री शिखा गंगवार, अभय चौहान, कुसुम पाल, प्रचार मंत्री रोशन लाल, लेखाकार नीरज भारद्वाज, समेत सभी कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।
सभा में उस टीम को भी आमंत्रित किया गया जिसने सुषमा पंत का अंतिम संस्कार किया — ललित बिष्ट, अरुण चुग, मनीष कुमार, और नरेश। इन सभी को संघ की ओर से सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने हेतु सम्मानित किया गया।
न्याय की मांग में एकजुट हुआ शिक्षक समाज
सभा में संघ ने सामूहिक रूप से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा और उधम सिंह नगर पुलिस प्रशासन से मांग की कि “दोषियों को सिर्फ गिरफ्तार न किया जाए, बल्कि ऐसा मुकदमा चले जो फांसी तक ले जाए।” संघ ने कहा कि इस निर्मम कांड में पुलिस इंस्पेक्टर सिद्धार्थ की जांच भूमिका भी महत्वपूर्ण है और उन्होंने दोषियों तक पहुंचने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, परंतु अब समाज की अपेक्षा है कि “न्याय का समापन केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि फांसी की सजा से हो।”
शिक्षक संघ ने यह भी कहा कि यदि दोषियों को सख्त सजा नहीं मिली तो यह केवल सुषमा पंत के प्रति अन्याय नहीं होगा, बल्कि प्रदेश की हर शिक्षिका, हर महिला की सुरक्षा भावना पर कुठाराघात होगा।
‘हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स’ के माध्यम से शिक्षक संघ की अपील
संघ ने हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, डीजीपी उत्तराखंड और राज्य सरकार से भी अपील की कि इस प्रकरण को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए, ताकि पीड़िता के परिवार को शीघ्र न्याय मिल सके।
संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष में ऐसी घटनाएं उत्तराखंड की अस्मिता पर धब्बा हैं। अब जरूरत है कि कानून अपना असली रूप दिखाए — “न्याय में देरी, अन्याय के समान है।”
समाज सेवा की मिसाल बनी शिक्षिका सुषमा पंत
सुषमा पंत न केवल एक शिक्षिका थीं, बल्कि वे छात्राओं को आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने के लिए निरंतर कार्यरत थीं। वे गरीब बच्चों की निशुल्क ट्यूशन लेती थीं और समाज में महिला शिक्षा को लेकर सक्रिय थीं। संघ के सदस्यों ने कहा कि “सुषमा ने जीवन भर ज्ञान दिया और अंत में हमें न्याय का पाठ पढ़ा गईं।”
सभा के अंत में दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई और यह संकल्प लिया गया कि “जब तक दोषियों को फांसी नहीं मिलती, शिक्षक समाज मौन नहीं रहेगा।”
“ईश्वर सुषमा पंत को अपने चरणों में स्थान प्रदान करें और हमें इतना साहस दें कि हम अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज उठाते रहें।”
— उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ, रुद्रपुर




