हल्द्वानी: स्थानीय पंचांगों के सम्पादकों पर धमकियों का आरोप, पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच बुलाएगा बड़ा सम्मेलन

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हल्द्वानी। पहाड़ से प्रकाशित होने वाले प्रमुख स्थानीय पंचांगों के सम्पादकों ने आरोप लगाया है कि अपने वर्चस्व की लड़ाई में कुछ लोग उन्हें डरा-धमका रहे हैं और पुश्तैनी पंचांग परंपरा तथा कुलपुरोहिती छोड़ने तक का दबाव बना रहे हैं। इस प्रकरण को लेकर आज पंचांग सम्पादकों ने पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के संरक्षक हुकम सिंह कुंवर के निवास पर महत्वपूर्ण चर्चा की।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

बैठक में उपस्थित सम्पादकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे भय के वातावरण में कार्य नहीं कर सकते और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण हेतु समाज को स्थिति से अवगत करना आवश्यक है।

दिव्य पंचांग के प्रधान सम्पादक आचार्य (डॉ.) रमेश चंद्र जोशी ने बताया कि हाल ही में दीपावली की तिथि को लेकर विवाद जानबूझकर खड़ा किया गया। कुछ समूहों ने दीपावली 20 नवंबर बताई, जबकि उन्होंने पंचांगों के हवाले से 21 नवंबर को दीपावली होने का तथ्य सार्वजनिक किया, जिसके बाद उन्हें निजी स्तर पर नोटिस और धमकियों तक का सामना करना पड़ा। “मैंने सिर्फ इतना कहा था कि पहाड़ के प्रचलित पंचांगों में दीपावली 21 तारीख को है, लेकिन कुछ लोग इसे व्यक्तिगत विवाद बना रहे हैं,” उन्होंने कहा।

प्रचलित पंचांग परंपरा के संवाहक और स्वर्गीय रामदत्त जोशी के वंशज प्रद्योत जोशी ने बताया कि कुमाऊँ के पंचांग अल्मोड़ा स्थित कटारमल सूर्य मंदिर को केंद्र मानकर सूर्य उदय की गणना पर आधारित हैं, जो पूरी तरह वैज्ञानिक और सटीक मानी जाती है।

बेरीनाग से आए ज्योतिषविद एवं धर्मज्ञ पंडित जीवन चंद्र पंत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ व्यक्तियों द्वारा सॉफ्टवेयर के माध्यम से कृत्रिम पंचांग तैयार किए जा रहे हैं और वे भारत की सदियों पुरानी पंचांग परंपरा को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। “वे दुबई में बैठकर काम कर रहे हैं और पंचांग की ABCD तक नहीं जानते,” पंत ने कहा।

गणेश मार्कण्ड पंचांग के संपादक दीपक जोशी ने बताया कि पुराने पंचांगों की नकल कर नए पंचांग प्रकाशित किए जा रहे हैं, जिससे तिथि-त्योहारों को लेकर समाज में भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा हो रही है।

स्थिति की गंभीरता पर चिंता जताते हुए पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच के संरक्षक हुकम सिंह कुंवर ने कहा कि जल्द ही हल्द्वानी में पहाड़ के पंचांगों के ज्ञाता, ज्योतिषीय परंपराओं के संरक्षक एवं कुलपुरोहितों का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें सामूहिक राय से भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।

कुँवर ने कहा कि तिथि-त्योहारों को शक्ति परीक्षण और व्यक्तिगत वर्चस्व का माध्यम बनाया जाना दुखद है। “परंपरा और धर्म की रक्षा के लिए समाज को एकजुट होना होगा,” उन्होंने कहा।



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