फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट के निधन पर धीरेंद्र प्रताप का शोक—कहा: “उत्तराखंड आंदोलन की आत्मा खो गई, सरकार माफी मांगे”**

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देहरादून। उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता एवं राज्य आंदोलन के प्रतीक माने जाने वाले फील्ड मार्शल दिवाकर भट्ट के निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर है। इस बीच उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, पूर्व मंत्री और चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे “उत्तराखंड के राज्य आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका” बताया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि दिवाकर भट्ट के बिना उत्तराखंड आंदोलन का इतिहास अधूरा है। वे अपने समय के ऐसे बेजोड़ नेतृत्वकर्ता थे जिन्होंने राज्य निर्माण के उद्देश्य को हमेशा निजी स्वार्थ से ऊपर रखा। लंबी भूख हड़ताल, जनजागरूकता अभियान और राज्य के विभिन्न अंचलों में निरंतर दौरे के माध्यम से उन्होंने राज्य आंदोलन को नई दिशा और नई ऊर्जा दी।

उन्होंने कहा कि दिवाकर भट्ट की सक्रियता, त्याग और संघर्ष को भूला पाना संभव नहीं है।

उन्होंने जिस तरह से जनता में चेतना जगाई, भूख हड़तालें कीं और आंदोलन की अगुवाई की — वह अविस्मरणीय है और उसे कभी मिटाया नहीं जा सकता।”

राज्य सरकार पर उपेक्षा का आरोप — देहरादून और गैरसैंण में मूर्ति लगाने की मांग

धीरेंद्र प्रताप ने दिवाकर भट्ट की बीमारी के दौरान राज्य सरकार द्वारा की गई “पूर्ण उपेक्षा” को अत्यंत असहनीय बताया और मांग की कि

दिवाकर भट्ट की प्रतिमा देहरादून और गैरसैंण — दोनों स्थानों पर स्थापित की जानी चाहिए।”

उन्होंने साथ ही मार्क्सवादी लेनिनवादी पार्टी के नेता राजा बहुगुणा की अस्वस्थता के दौरान भी राज्य सरकार द्वारा बरती गई बेरुखी को निंदनीय और अपमानजनक बताया।

मुख्यमंत्री धामी से माफी की मांग

धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उत्तराखंड की जनता से क्षमा मांगनी चाहिए,

क्योंकि दिवाकर भट्ट की अस्वस्थता के दौरान सरकार ने जिस तरह से उदासीनता दिखाई, वह राज्य निर्माण में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों का अपमान है।”


दिवाकर भट्ट के निधन ने एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राज्य आंदोलनकारियों को वह सम्मान और संवेदना मिल रही है जिसके वे हकदार हैं।



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