✍️ संपादकीय — ऐपन की लाली, उत्तराखंडी अस्मिता की रखवाली!उत्तराखंड की आत्मा की प्रदर्शनी

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हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित एम.एस. इंटर कॉलेज मैदान में सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित “सहकारिता मेला 2025” केवल व्यापार और बिक्री का मंच नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा को पुनर्जीवित करने वाला पर्व साबित हो रहा है। थीम — “सहकारिता से पर्यटन विकास” के तहत 25 नवम्बर से 1 दिसम्बर तक चल रहे इस मेले ने प्रदेश के कारीगरों, विशेषकर महिला स्व-सहायता समूहों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का स्वर्णिम अवसर दिया है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

इसी मेले में उत्तराखंड लोक संस्कृति की अमर चमक लिए एक स्टॉल उन सभी दर्शकों को अपनी ओर खींच लेता है — “लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह, गली नं-8, रामपुर रोड, हल्द्वानी (जनपद नैनीताल)”
यह समूह कला, सम्मान, परंपरा और महिला सशक्तीकरण की जीवंत प्रतिमूर्ति है जिसकी अध्यक्ष रितिका और समूह सदस्य बरखा शर्मा, — रितिका सुमन (Mobile: 7017820436) अपनी साधारण मुस्कान और असाधारण कला के साथ वहां उपस्थित थीं।

वे दो महिलाएं — जिनमें बसती है पूरी उत्तराखंडी संस्कृति

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के संपादक अवतार सिंह बिष्ट जब मेले में पहुंचे तो सैकड़ों स्टॉल-दर्शकों के बीच, अचानक ध्यान गया दो महिलाओं की ओर —
दोनों जमीन पर पारंपरिक आसन में बैठी, आपस में सांस्कृतिक चर्चा में तल्लीन…
उनकी वाणी में लोक परंपरा का गौरव, हाथों में ऐपन की रचनात्मकता, और आंखों में अपने पहाड़ की पहचान बचाने का जज्बा साफ दिखाई दे रहा था।

लंबी वार्ता के बाद स्पष्ट हुआ —
ये महिलाएं केवल कला नहीं बेच रहीं, वे उत्तराखंड की विरासत को बचा रही हैं।

जब उनसे पूछा गया कि इतने आधुनिक समय में भी वे इस सांस्कृतिक कला को जिन्दा क्यों रखे हुए हैं?
वे मुस्कुराकर बोलीं —

क्योंकि अगर हमारी पीढ़ी इसे नहीं बचाएगी, तो अगली पीढ़ी इसे जान भी नहीं पाएगी।”

उनकी इस बात ने पूरे संपादकीय कक्ष को सोचने पर मजबूर कर दिया —
सचमुच, संस्कृति किताबों से नहीं, कलाकारों से जीवित रहती है।

ऐपन — महज कला नहीं, देवी संस्कृति का लाल आंचल

ऐपन वह कला है जो कुमाऊं और उत्तराखंड की पवित्रता का प्रतीक है —
चावल के घोल, सिंदूर की लालिमा, और पूजा-अनुष्ठानों के प्रतीक चिह्न जिनमें मंगल, सौभाग्य और समृद्धि बसती है।

इन महिलाओं के स्टॉल पर रखी कलाकृतियां इतनी मनमोहक थीं कि देखने वाला ठहरने पर मजबूर हो जाए —

  • थाली
  • लोटा
  • चौकी
  • प्लेट
  • घड़ी
  • दीवार सजावट
  • नामपट्टिकाएं
  • पूजा घर की सज्जा
  • विवाह एवं नए घर प्रवेश के लिए शुभांकित कलाकृतियां
  • और विशेष आकर्षण — हाथ पर बनाया गया ऐपन-टैटू / सुहाग के शुभ प्रतीक

एक-एक रेखा, एक-एक आकृति मानो मूक होकर कहती थी —
पहाड़ की लाली जिंदा है।

और सच कहा जाए तो —
यह महिलाएं जितनी सुन्दर फोटो में दिखती हैं, उससे कहीं ज्यादा उनकी सुंदरता उनके ऐपन में निखर कर आती है।

बाजार में आधुनिकता की बाढ़, पर संस्कृति की रक्षा कौन करेगा?

अफसोस की बात यह है कि मोबाइल, रील और फैशन की दुनिया में लोककला आज संघर्ष कर रही है।
बड़ी कंपनियां मशीनों से बने नकली डिज़ाइन बेचकर असली कलाकारों को दरकिनार कर रही हैं।

ऐसे समय में —
बरखा शर्मा और रितिका जैसी महिलाएं वह मजबूत दीवार हैं, जो परंपरा को टूटने नहीं देतीं।
वे लाभ के लिए नहीं, समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए काम करती हैं।

उनका संदेश सरल है —

हमने ऐपन को व्यवसाय नहीं, विरासत की सेवा समझकर चुना है।”

संस्कृति बचानी है तो केवल वाहवाही से नहीं — खरीद से भी

यह सच है कि कला की प्रशंसा करने वाले बहुत मिलते हैं,
लेकिन कलाकार का हाथ तभी थामना है जब उसकी कला खरीदी जाए।

संपादक के रूप में मैं यह स्पष्ट कहना चाहता हूं —  यदि हम चाहते हैं कि हमारी संस्कृति जीवित रहे, तो हमें इन कलाकारों का आर्थिक समर्थन करना ही होगा।
मेले में जाएं, देखें, और खरीदें
और अगर मेले में नहीं जा पा रहे हैं, तो फोन करें और ऑर्डर दें — 7017820436

उत्तराखंड के पार्वतीय समाज की ओर से संदेश

हम, उत्तराखंड के पार्वती समाज की ओर से, इन दोनों महिलाओं को प्रणाम करते हुए एक संदेश देना चाहते हैं —

आप दोनों केवल महिला नहीं, उत्तराखंड की सांस्कृतिक प्रहरी हैं।
जब तक आपके हाथों में ऐपन की लालिमा है, तब तक हमारी सभ्यता सुरक्षित है।
हम आपके साथ हैं — आर्थिक रूप से भी, सामाजिक रूप से भी, सम्मान के रूप में भी।”

आज आवश्यकता है कि हम समाज के रूप में आगे आएं और ऐसी कलाकारों की रक्षा करें — क्योंकि जो संस्कृति हमें पहचान देती है, उसका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है।

अंत में,सहकारिता मेला 2025 अपने उद्देश्य में तभी सफल होगा
जब उत्तराखंड का हर व्यक्ति वहां पहुंचकर इन महिलाओं जैसी कलाकारों को
सिर्फ सराहे नहीं — अपनाए, खरीदे और सहारा दे।और विश्वास कीजिए…
मेले में स्थापित यह स्टॉल केवल कला का स्टॉल नहीं —
उत्तराखंड की आत्मा की प्रदर्शनी है।


सम्पर्क कलाकार
बरखा शर्मा / रितिका सुमन
📞 7017820436
लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह, गली नं-8, रामपुर रोड, हल्द्वानी (जनपद नैनीताल)



sअगर आप उत्तराखंड से प्रेम करते हैं,
अगर आपको अपनी मिट्टी की खुशबू प्यारी है,
तो एक बार इन कलाकारों का हाथ अवश्य थामिए…क्योंकि संस्कृति तभी बचती है
जब समाज उसके रक्षक बनते हैं।


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