

रामपुर रोड की नवनिर्मित अनाज मंडी आज भले ही घास–फूस, जंग लगे शटरों और नशेड़ियों के अड्डे के रूप में बदहाली की तस्वीर पेश कर रही हो, लेकिन गुरुवार को इस खंडहरनुमा परिसर में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वर्षों से उपेक्षित पड़े गल्ला व्यापारियों और किसानों के मन में फिर से उम्मीद जगा दी। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल जब समर्थकों के साथ धरने पर बैठे, तो ऐसा लगा मानो रुद्रपुर की धरती पर अव्यवस्थाओं से लड़ने के लिए कोई “सुपरमैन” उतर आया हो।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
यह वही अनाज मंडी है, जिसके लिए ठुकराल ने अपने विधायक काल में आदित्य नाथ झा राजकीय इंटर कॉलेज की भूमि हस्तांतरित कराकर वर्षों की लड़ाई लड़ी थी। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों को एक सुव्यवस्थित और सुरक्षित बाजार देने का सपना देखा गया था। लेकिन आज वही सपना सरकारी फाइलों, अधूरी दुकानों और लापरवाह व्यवस्था के नीचे दबता नजर आ रहा है।
धरना स्थल से ठुकराल की आवाज किसी एक नेता की नहीं, बल्कि उस हर किसान और आढ़ती की आवाज बन गई, जो वर्षों से दुकान आवंटन के इंतजार में है। उन्होंने साफ कहा—“मंडी परिषद 62 दुकानें मंडी समिति को सौंप चुकी है, फिर आवंटन क्यों नहीं?” यह सवाल सिस्टम के सीने पर सीधा प्रहार था। आज मंडी की हालत यह है कि घास उग आई है, चोरी की घटनाएं हो रही हैं, निर्माण की घटिया गुणवत्ता उजागर हो चुकी है और करोड़ों की सरकारी संपत्ति कबाड़ बनती जा रही है।
यही वह क्षण था जब “सुपरमैन” ठुकराल आम लोगों के बीच खड़े दिखाई दिए—बिना किसी सत्ता के, सिर्फ जनहित की ढाल और संघर्ष की ताकत के साथ। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी कि यदि पारदर्शिता के साथ, बिना किसी सुविधा शुल्क के दुकानों का आवंटन नहीं हुआ, तो वे मंडी परिषद कार्यालय के सामने आमरण अनशन करेंगे। यह चेतावनी नहीं, व्यवस्था के लिए अल्टीमेटम था।
दोपहर में मंडी समिति के सचिव विश्व विजय सिंह देव वार्ता के लिए पहुंचे और तकनीकी कमियों का हवाला देते हुए शीघ्र कार्य पूर्ण कर आवंटन का आश्वासन दिया। तभी धरना स्थगित हुआ। लेकिन यह सिर्फ धरने का अंत नहीं था, बल्कि उस चेतावनी की शुरुआत थी कि अब जनहित से खिलवाड़ और नहीं चलेगा।
इस पूरे आंदोलन में व्यापारियों और आम लोगों की भारी मौजूदगी यह बताने के लिए काफी थी कि ठुकराल आज भी जनता के बीच वही भरोसेमंद चेहरा हैं, जो सत्ता में रहते हुए भी और सत्ता से बाहर रहकर भी सवाल खड़े करता है। संजीव गुप्ता, विकास बंसल, संजय ठुकराल, गगन ग्रोवर, आनंद शर्मा, ललित सिंह बिष्ट, विक्रमजीत सिंह, अमृतपाल सिंह सहित तमाम लोगों की मौजूदगी ने इस संघर्ष को जनांदोलन का स्वरूप दिया।
आज जब राजनीति अक्सर मंच, भाषण और सोशल मीडिया तक सिमटती जा रही है, ऐसे में अनाज मंडी की धूल में बैठा यह “सुपरमैन” एक बार फिर यह साबित कर गया कि असली ताकत सत्ता में नहीं, जनता के साथ खड़े होने में होती है। अब देखना यह है कि मंडी समिति और परिषद के आश्वासन कागजों तक सीमित रहते हैं या सच में किसानों और आढ़तियों के चेहरे पर खुशहाली लौटाते हैं।
यदि ऐसा नहीं हुआ, तो तय है—रुद्रपुर की सड़कों पर यह सुपरमैन फिर उड़ान भरेगा… और इस बार टकराव और भी तीखा होगा।




