यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत-रूस ऊर्जा व्यापार हाल के महीनों में वैश्विक प्रतिबंधों की वजह से दबाव में रहा है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
राष्ट्रपति पुतिन ने स्पष्ट कहा कि हम बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ईंधन की बिना रुकावट शिपमेंट जारी रखने के लिए तैयार हैं। यह घोषणा तब हुई जब दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा, उर्वरक आपूर्ति, शिपिंग और मरीटाइम लॉजिस्टिक्स जैसे कई अहम क्षेत्रों पर समझौते किए।
आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दौरान दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत और रूस 2030 तक व्यापार वृद्धि के लिए एक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर सहमत हुए हैं। मोदी ने बताया कि व्यापार को संतुलित और स्थिर बनाने के लिए नए अवसर तलाशे जा रहे हैं।
इसी सप्ताह की शुरुआत में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी संकेत दिया था कि रूस भारत को अपना तेल निर्यात फिर बढ़ाने की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के चलते आई गिरावट को अस्थायी करार दिया था।
भारत सबसे बड़ा खरीदार
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस के समुद्री तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था। लेकिन अमेरिका द्वारा रूसी कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए बैन के बाद भारत ने हाल के महीनों में तेल आयात में कटौती की है। इसके साथ ही यूरोप द्वारा रूसी क्रूड ऑयल से बने पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद पर रोक लगाने का फैसला भी इस व्यापार पर असर डाल रहा है।
वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार 65.70 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 4.26 बिलियन डॉलर और आयात 61.44 बिलियन डॉलर था। दोनों देश अब इस व्यापार को 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
अगले साल भारत ब्रिक्स की करेगा अध्यक्षता
पुतिन ने सांस्कृतिक सहयोग को लेकर भी बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि दोनों देश फिल्म फेस्टिवल आयोजित कर रहे हैं और एक नया रूसी टीवी चैनल भारत में ब्रॉडकास्ट शुरू करेगा, जिससे भारतीय दर्शकों को रूस के बारे में अधिक जानने का मौका मिलेगा।
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इसके साथ ही पुतिन ने ब्रिक्स पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक फाउंडिंग मेंबर के तौर पर भारत और रूस ने वैश्विक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई है। अगले साल भारत ब्रिक्स की अध्यक्षता करेगा, और रूस हर संभव समर्थन देने के लिए तैयार है। यह बैठक न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा बल्कि राजनीतिक, कूटनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग के लिहाज से भी दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
टोयोटा कंपनी की इस कार में पुतिन और मोदी एकसाथ बैठकर एयरपोर्ट से निकले. सबसे ज्यादा सुरक्षा में चलने वाले दुनिया के चुनिंदा नेताओं में शुमार पुतिन और पीएम मोदी आखिर अपनी किले जैसी बख्तरबंद गाड़ियों को छोड़कर इस कार में क्यों बैठे, लोग इस सवाल का जवाब खोजने में जुटे हैं. आइए इसकी वजह बताते हैं.राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार शाम दिल्ली की धरती पर कदम रखा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रोटोकॉल तोड़कर खुद उनकी अगवानी करने एयरपोर्ट गए. लेकिन जिस चीज ने सबसे ज्यादा लोगों का ध्यान खींचा, वो थी वाइट कलर की फॉर्च्यूनर कार.
दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरे पुतिन का पीएम मोदी
पीएम मोदी और पुतिन अपनी बख्तरबंद गाड़ियां छोड़कर एक आम कार में क्यों बैठे, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. लेकिन इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं. हो सकता है कि दोनों ने सुरक्षा से ज्यादा, संदेश देने के लिए इस गाड़ी का इस्तेमाल किया हो. पश्चिमी देशों को मैसेज दिया हो कि हम उनकी गाड़ी में नहीं, मेड इन इंडिया गाड़ी की सवारी ज्यादा पसंद करते हैं.
केवल रूसी राष्ट्रपति ही नहीं, बल्कि रूस के रक्षा मंत्री ने भी इसी गाड़ी की सवारी की. यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव को देखते हुए यह अहम संदेश हो सकता है. ऐसे में इस बात की संभावना ज्यादा है कि ऐसा संदेश देने के लिए किया गया हो.
दूसरा कारण मेड इन इंडिया कार का संदेश देने का हो सकता है. फॉर्च्यूनर कार को बनाने वाली कंपनी भले ही जापान की हो, लेकिन अब ये गाड़ी भारत में बनती है. कर्नाटक के बिदादी में इसका प्लांट है. यानी यह मेड इन इंडिया कार है. फॉर्च्यूनर कार को देश में वीआईपी मूवमेंट के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.
बताया जा रहा है कि इस फॉर्च्यूनर कार को खासतौर से रूस के राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिहाज से तैयार किया गया था. इस गाड़ी में ऐसे फीचर हैं, जो किसी भी तरह के हमले को आसानी से झेल सकते हैं. इतना ही नहीं, इस कार में पुतिन के बैठने से पहले रूसी सुरक्षा एजेंसियों ने उसे क्लियर किया था.
इस कार में रूसी राष्ट्रपति के सफर करने का एक संदेश ये भी हो सकता है कि उन्हें भारत की सुरक्षा व्यवस्था में पूरा भरोसा है. बहरहाल पीएम मोदी और पुतिन की यह कार डिप्लोमेसी लोगों के बीच चर्चा की विषय बनी हुई है. हालांकि कई लोग इस पर भी हैरानी जता रहे हैं कि दोनों नेताओं को ले जाने के लिए महाराष्ट्र नंबर की कार को क्यों चुना गया.

