संपादकीय भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड में प्री-SIR गतिविधियों की शुरुआत लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, सशक्त व विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। “प्रत्येक मतदाता तक पहुंच, समन्वय और संवाद” जैसे उद्देश्यपूर्ण अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान किसी भी पात्र मतदाता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम द्वारा दी गई जानकारी इस बात को रेखांकित करती है कि निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को कितनी गंभीरता और तकनीकी दक्षता के साथ आगे बढ़ा रहा है। वर्ष 2003 की मतदाता सूची से 40 वर्ष तक के मतदाताओं की BLO एप के माध्यम से सीधी मैपिंग तथा अन्य मतदाताओं की प्रोजनी के आधार पर पहचान — यह पहल फर्जी प्रविष्टियों को रोकने और वास्तविक पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
हालांकि, यह भी एक चिंता का विषय है कि प्रदेश के 11,733 बूथों के मुकाबले अभी केवल 4,155 बूथ लेवल एजेंट ही नियुक्त हैं। यह आंकड़ा राजनीतिक दलों की निष्क्रियता को उजागर करता है। निर्वाचन प्रक्रिया की सफलता में जहां प्रशासन की भूमिका अहम है, वहीं राजनैतिक दलों की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
जनपद स्तर पर हेल्प डेस्क की स्थापना और BLO के माध्यम से घर-घर पहुंच — ये सभी प्रयास बतलाते हैं कि इस बार मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जा रही। प्री-SIR केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह मतदाता के अधिकारों की रक्षा और लोकतंत्र की नींव को और मजबूत करने का अभियान है। अब आवश्यकता है कि जनता, राजनीतिक दल और प्रशासन — तीनों मिलकर इस प्रक्रिया को सफल बनाएं।

