जिंदगी जिंदाबाद के सामाजिक यज्ञ में डॉ. किशोर चंदोला की सहभागिता बनी प्रेरणा

Spread the love

रुद्रपुर। सामाजिक सरोकारों को जमीन पर उतारने वाली संस्था जिंदगी जिंदाबाद के सामूहिक विवाह समारोह में एक ऐसा क्षण भी आया, जिसने पूरे आयोजन को और गरिमा प्रदान की। सिटी क्लब में आयोजित इस समारोह में उल्लेखनीय सहयोग के लिए चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के संरक्षक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. किशोर चंदोला को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

डॉ. किशोर चंदोला ने न केवल मंच से नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया, बल्कि अपने विचारों के माध्यम से सामाजिक सेवा की वास्तविक परिभाषा भी रखी। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन समाज के उस वर्ग को सम्मान और आत्मविश्वास देते हैं, जो आर्थिक कारणों से पीछे रह जाता है। उन्होंने खुले मन से जिंदगी जिंदाबाद संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बीते पाँच वर्षों से संस्था सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ समाज के जरूरतमंदों के लिए कार्य कर रही है, जो आज के समय में दुर्लभ उदाहरण है।

डॉ. चंदोला ने यह भी स्पष्ट किया कि समाजसेवा केवल भाषणों से नहीं, बल्कि निरंतर सहयोग और सहभागिता से आगे बढ़ती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी जिंदगी जिंदाबाद संस्था के हर सकारात्मक और जनहितकारी कार्य में उनका सहयोग बना रहेगा।

समारोह में संस्था के संस्थापक करमजीत सिंह चानना सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी, गणमान्य नागरिक एवं समिति से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे। कुल मिलाकर यह आयोजन केवल विवाह संस्कार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने वालों—जैसे डॉ. किशोर चंदोला—की भूमिका को रेखांकित करता हुआ एक प्रेरक सामाजिक संदेश भी दे गया।

सिटी क्लब में आयोजित जिंदगी जिंदाबाद के सामूहिक विवाह समारोह में डॉ. चंदोला की भूमिका केवल औपचारिक सम्मान तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने इसे मानवीय संवेदना से जीवंत कर दिया। डॉ. चंदोला ने प्रत्येक नवदम्पत्ति को ₹51, ₹5100  राशि प्रदान कर आशीर्वाद दिया, साथ ही विवाह हेतु दान-दहेज खुले हाथों से दिया। इतना ही नहीं, अतिरिक्त गृहस्थी सामान के लिए भी उन्होंने अलग से निश्चित पूंजी उपलब्ध कराई। उनका यह उदार योगदान समाज के सक्षम वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत है, जो दिखाता है कि सच्ची समाजसेवा शब्दों से नहीं, कर्मों से होती है।


Spread the love