उत्तरायणी (घुघुतिया त्यार) कौतिक में संस्कृति, सेवा और सम्मान का अद्भुत संगम

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रुद्रपुर में शैल सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में आयोजित उत्तरायणी (घुघुतिया त्यार) कौतिक इस वर्ष केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति, जनसेवा और सामाजिक सहभागिता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। कार्यक्रम में जहां एक ओर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय पहल भी की गई।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
कार्यक्रम के अवसर पर चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के सौजन्य से वसुंधरा  दवाइयों का वितरण किया गया। स्वास्थ्य शिविर में हर विभाग की सेवाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए आमजन को लाभ पहुंचाया गया, जिसकी चारों ओर सराहना हुई।
शैल सांस्कृतिक समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डॉ. किशोर चंदोला का परिषद के पदाधिकारियों द्वारा बुके भेंट कर एवं पारंपरिक पहाड़ी टोपी पहनाकर भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर समाज और स्वास्थ्य क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया।

कलाकार एवं प्रस्तुतियाँ
उत्तरायणी, मकर संक्रान्ति, उत्तरायणी (घुघुतिया त्यार) महोत्सव–2026 को दिव्य एवं भव्य स्वरूप प्रदान करने हेतु दिनांक 13 जनवरी 2026 को सुविख्यात लोक गायक गजेन्द्र राणा, लोक गायिका डॉ. कुसुम भट्ट, विक्रम रावत, जगदीश भट्ट, राजेन्द्र बिष्ट, सुप्रसिद्ध लोक नृत्यांगना साक्षी काला एवं लोकप्रिय कलाकार विक्की द्वारा पर्वतीय संस्कृति पर आधारित एक से एक बढ़कर मनमोहक कुमाऊँनी एवं गढ़वाली गीत-संगीत की शानदार प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी।
कार्यक्रम का कुशल निर्देशन एवं संचालन – सुरू रावत,
नृत्य निर्देशन – अक्षय राणा,
संगीत निर्देशन – विमल रावत,
लय–ताल वादन – पवन रावत, पंकज बणई एवं शिवम शर्मा
तथा अन्य सहयोगी कलाकारों द्वारा किया जाएगा।
सभी कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया और उत्तरायणी महोत्सव की सांस्कृतिक गरिमा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।


सांस्कृतिक संध्या की सबसे बड़ी आकर्षण रहीं पहाड़ की बेटी साक्षी काला, जिनकी प्रस्तुति ने पूरे पंडाल को तालियों की गड़गड़ाहट से भर दिया। लोक–संगीत और पारंपरिक नृत्य की उनकी जुगलबंदी ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। गढ़वाली–कुमाऊँनी सुरों में रची-बसी उनकी आवाज़ और आत्मविश्वास से भरा नृत्य उत्तराखंड की आत्मा से साक्षात्कार कराता नजर आया। हर गीत के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया और वातावरण पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में रंग गया। इस प्रस्तुति के बाद साक्षी काला केवल कलाकार नहीं रहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक सुपर स्टार के रूप में उभरकर सामने आईं।

दिनेश बम ने उत्तरयणी कार्यक्रम के मुख्य संयोजक के रूप में पूरी आयोजन प्रक्रिया की सशक्त रूपरेखा तैयार की। कार्यक्रम की योजना, समन्वय और सफल संचालन में उनका योगदान अत्यंत सराहनीय रहा। उनकी मेहनत और दूरदृष्टि से यह आयोजन भव्य और यादगार बना।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लकी खरबंदा, विधायक शिव अरोड़ा, राज्य मंत्री उत्तम दत्ता, डॉ. किशोर चंदोला, डी.एस. बिष्ट, कमलेंद्र सेमवाल, सुरेश परिहार, ASI भूपेन्द्र धामी, भरत लाल शाह एवं गोपाल सिंह पटवाल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन हेमंत बिष्ट द्वारा किया गया, जबकि अध्यक्षता गोपाल सिंह पटवाल ने की।
महासचिव – एडवोकेट दिवाकर पांडे,


शैल सांस्कृतिक समिति के तत्वावधान में 14 जनवरी को एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय कलाकारों के साथ–साथ विद्यालयों के बच्चों की सक्रिय भागीदारी रहेगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड की लोक–संस्कृति, परंपरागत गीत–संगीत, नृत्य और भाषाओं को नई पीढ़ी से जोड़ना है। बच्चे अपनी प्रतिभा के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक धरोहर को मंच पर जीवंत करेंगे, वहीं स्थानीय कलाकार लोक परंपराओं की समृद्ध झलक प्रस्तुत करेंगे। शैल सांस्कृतिक समिति का यह प्रयास सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और अपनी जड़ों के प्रति गर्व की भावना विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


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