उधमसिंह नगर किसान आत्महत्या मामला: पुलिसिंग पर उठे सवाल, PHQ सख्त—कोतवाली में अब केवल इंस्पेक्टर ही होंगे प्रभारी

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रुद्रपुर/देहरादून।उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बाद राज्य की पुलिस व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। इस गंभीर घटना ने न केवल स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पुलिस मुख्यालय (PHQ) को भी सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। PHQ ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन थानों को कोतवाली का दर्जा दिया गया है, वहां अब दरोगा स्तर के अधिकारी प्रभारी नहीं रहेंगे, बल्कि केवल अनुभवी इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी (कोतवाल) ही तैनात किए जाएंगे।
गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2025 में राज्य के 58 थानों का उच्चीकरण कर उन्हें कोतवाली का दर्जा दिया था। इस सूची में उधमसिंह नगर जिले का आईटीआई थाना भी शामिल था। उच्चीकरण के बाद नियमों के अनुसार यहां इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी की तैनाती होनी चाहिए थी, लेकिन इसके बावजूद चार्ज एक अपेक्षाकृत जूनियर दरोगा कुंदन सिंह रौतेला को सौंप दिया गया।
लापरवाही के आरोप, किसान को झेलनी पड़ी प्रताड़ना
किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि थाना स्तर पर उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। आरोप है कि थानाध्यक्ष की लापरवाही और लचर कार्यप्रणाली के कारण किसान को लगातार मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। न्याय न मिलने और लगातार उपेक्षा से आहत होकर सुखवंत सिंह ने अंततः खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस की छवि को लगा गहरा धक्का
इस दर्दनाक घटना के बाद पुलिस की जमकर आलोचना हो रही है। विपक्षी दलों, किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामला सामने आने के बाद राज्य पुलिस की छवि को गहरा धक्का लगा है और सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक पुलिसिंग पर बहस छिड़ गई है।
PHQ का सख्त संदेश
PHQ ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि कोतवाली स्तर के थानों में अनुभवहीन या जूनियर अधिकारियों की तैनाती किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यालय का मानना है कि बड़े और संवेदनशील थानों की कमान अनुभवी अधिकारियों के हाथ में ही होनी चाहिए, ताकि आम जनता को समय पर न्याय मिल सके और ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
फिलहाल, किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के मामले में जांच की प्रक्रिया जारी है। वहीं, PHQ के इस फैसले को राज्य में पुलिस व्यवस्था सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या इस सख्ती से भविष्य में आम नागरिकों और किसानों को पुलिस से न्याय समय पर मिल पाएगा, या फिर यह फैसला भी फाइलों तक ही सीमित रह


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