सरकार की नाकामी उजागर — घुरदौड़ी इंजीनियरिंग संस्थान में स्थानीय युवाओं से खुला विश्वासघात

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पौड़ी गढ़वाल।जनपद पौड़ी गढ़वाल स्थित गोविंद बल्लभ पंत अभियंत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, घुरदौड़ी एक बार फिर उत्तराखंड सरकार की कथनी और करनी के अंतर का प्रतीक बनकर सामने आया है। संस्थान में वर्षों से व्याप्त अव्यवस्थाएं, स्थानीय युवाओं की उपेक्षा और बाहरी जिलों के लोगों को संविदा पर नियुक्त करने की नीति ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


घुरदौड़ी, बलमणा, ग्वाड़, कोट, पाबौ, कंडोलिया, पोखड़ा, थलीसैंण, बाघाट सहित आसपास के गांवों के शिक्षित युवा लंबे समय से रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। विडंबना यह है कि इसी संस्थान में उत्तराखंड के अन्य जिलों व बाहरी क्षेत्रों से आए लोगों को प्राथमिकता के आधार पर नियुक्तियां दी जा रही हैं, जबकि स्थानीय योग्य युवाओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
सरकार एक ओर रोजगार मेलों के जरिए युवाओं को उम्मीद दिखाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर वास्तविकता यह है कि चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र जानबूझकर रोके गए हैं। आरोप है कि केंद्र और राज्य—दोनों सरकारें अपने-अपने राजनीतिक हितों और वोट बैंक की राजनीति के चलते युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही हैं। यह स्थिति न केवल बेरोजगारी को बढ़ावा दे रही है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर कर रही है।
संस्थान में स्थायी फैकल्टी की भारी कमी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव, शोध और अकादमिक वातावरण की गिरती स्थिति तथा दीर्घकालिक विकास योजना का न होना यह दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकताओं में न पहाड़ है और न ही पहाड़ का युवा। इसका सीधा परिणाम पलायन के रूप में सामने आ रहा है और गांव लगातार खाली होते जा रहे हैं।
रवींद्र जुयाल (बोडा)
इस मुद्दे पर हिमालय क्रांति पार्टी के जिला उपाध्यक्ष (पौड़ी गढ़वाल) एवं सेवानिवृत्त सहायक कमांडेंट, बीएसएफ रवींद्र जुयाल (रवि-बोडा) ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—
“घुरदौड़ी इंजीनियरिंग संस्थान में स्थानीय युवाओं के साथ खुला अन्याय हो रहा है। अपने ही क्षेत्र में पहाड़ के युवाओं को रोजगार से वंचित रखना सरकार की नीयत और नीति—दोनों को उजागर करता है। यदि तत्काल स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दिया गया, चयनित अभ्यर्थियों के लंबित नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुए और संस्थान के पुनरुत्थान के लिए ठोस व पारदर्शी कार्ययोजना लागू नहीं की गई, तो हिमालय क्रांति पार्टी व्यापक जनआंदोलन छेड़ेगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
अब सवाल साफ है—
क्या सरकार पहाड़ के युवाओं को उनका हक देगी, या उन्हें केवल चुनावी भाषणों तक सीमित रखेगी?


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