

लेकिन इस मिशन के बाद से चंद्रमा पर पानी मिलने की उम्मीद नहीं रही।

भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) ने 2008 के मिशन चंद्रयान-1 ने चांद की सतह पर पानी के मॉलिक्यूल्स का पता लगाया। भारत के इस मिशन ने ही दुनिया को एक नई उम्मीद दी।
✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
आर्टेमिस-II मिशन
भारत ने चंद्रमा पर वापस जाने की वैश्विक दौड़ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनके IISc की लैब में इसरो के सहयोग से चंद्र ईंटें बनाने पर काम किया जा रहा है।
यह बदलाव नासा के आर्टेमिस मिशन का आधार है, जिसका लक्ष्य मानव अंतरिक्ष उड़ान को छोटे मिशनों से आगे बढ़ाकर चंद्रमा के चारों ओर और उस पर लंबी अवधि की उपस्थिति की ओर ले जाना है।
अगला कदम आर्टेमिस II है, जो अपोलो के बाद निम्न-पृथ्वी कक्षा से परे यात्रा करने वाला पहला मानवयुक्त मिशन है। इस सप्ताह की शुरुआत में नासा, ओरियन अंतरिक्ष यान के साथ स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर में लॉन्च करेगा।
कॉम्प्लेक्स 39B तक ले जाने के कई दिनों बाद और चार आर्टेमिस II अंतरिक्ष यात्री, रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच, और जेरेमी हैनसेन, क्वारंटाइन में चले गए।
एक वेट ड्रेस रिहर्सल में रॉकेट में लीक दिखाई दिया, जिसके चल तय लॉन्च विंडो मार्च तक के लिए आगे बढ़ गई।




