विधायक शिव अरोड़ा का ऐतिहासिक संबोधन: संस्कृति को राजनीति से ऊपर रखने की घोषणा

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रुद्रपुर ,हिमाद्री जन सेवा समिति (रजि०) उत्तराखंड संस्कृत कार्यक्रम के दौरान विधायक शिव अरोड़ा का संबोधन केवल औपचारिक वक्तव्य नहीं, बल्कि पहाड़ी अस्मिता के प्रति एक स्पष्ट वैचारिक प्रतिबद्धता का उद्घोष था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति कोई संग्रहालय की वस्तु नहीं, बल्कि जीवंत चेतना है, जिसे मंचों, विद्यालयों और परिवारों के माध्यम से निरंतर जीवित रखना होगा।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


  “उत्तराखण्डस्य लोकसंस्कृत्याः भव्यं सांस्कृतिकं आयोजनम्”  उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि जब तक पहाड़ की स्त्री सशक्त है, तब तक पहाड़ की संस्कृति सुरक्षित है। ऐपण, लोकनृत्य, स्वयं सहायता समूह और पारंपरिक उत्पादों के माध्यम से महिलाएँ केवल संस्कृति नहीं बचा रहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई इबारत भी लिख रही हैं।
विधायक शिव अरोड़ा ने बच्चों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जो पीढ़ी अपनी जड़ों से कट जाती है, वह भविष्य में केवल उपभोक्ता बनती है, निर्माता नहीं। उन्होंने विद्यालयों में लोकसंस्कृति आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया और ऐसे आयोजनों को सामाजिक संस्कार का माध्यम बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास और संस्कृति को आमने-सामने खड़ा करना एक बड़ी भूल है। विकास वही टिकाऊ होता है, जिसकी नींव संस्कृति पर रखी गई हो। उन्होंने आश्वस्त किया कि जनप्रतिनिधि के रूप में वे ऐसे सांस्कृतिक प्रयासों को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि नीति और प्राथमिकता का हिस्सा बनाएंगे।
सभा के अंत में विधायक शिव अरोड़ा का यह कथन—
“यदि उत्तराखंड की आत्मा बचानी है, तो उसकी लोकसंस्कृति को राजनीति से ऊपर रखना होगा”—कार्यक्रम का सबसे प्रभावशाली और स्मरणीय क्षण बन गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से समर्थन दिया।

सांसद अजय भट्ट,
कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा,
विधायक शिव अरोड़ा, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, सीएमओ रुद्रपुर के,के अग्रवाल,भारतीय जनता पार्टी वरिष्ठ नेता अमित नारंग,

पूर्व महानिदेशक. (“डी-जी हेल्थ”   ) उत्तराखंड (स्वास्थ्य) डॉ. अमिता उप्रेती,

कमलेंद्र सेमवाल,मोहिनी बिष्ट,
भाजपा नेता भारत भूषण चुघ, बंगाली कल्याण समिति के अध्यक्ष दिलीप अधिकारी, ममता त्रिपाठी, दीपा मटेला,
सुरेश कोहली, जमील अहमद, डॉ शाह खान ,

समिति में अध्यक्ष एडवोकेट एस,एस रावत, बीएन बेलवाल, पूरन दानू , डॉ. कुंदन सिंह राठौड़ के, एस भंडारी, आदि लोगों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की रूपरेखा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


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