डिजिटल ब्लैकमेल!रुद्रपुर के स्पा सेंटरों का काला सच: मसाज के नाम पर ब्लैकमेल का धंधा?

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रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर का तेजी से विकसित होता शहर आज एक नए तरह के “साइलेंट क्राइम” की चपेट में आता दिखाई दे रहा है। शहर के प्रमुख व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों में खुले स्पा सेंटरों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हाल ही में सामने आई एक लिखित शिकायत ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


गदरपुर क्षेत्र के निवासी जसवंत पन्नू द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत के अनुसार, 30 जनवरी 2026 को वह रुद्रपुर स्थित एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर संचालित स्पा सेंटर में मसाज के लिए गए थे। शिकायत में आरोप है कि निर्धारित शुल्क अदा करने के बाद भी वहां कार्यरत दो युवतियों ने उन्हें घेर लिया, मोबाइल फोन छीन लिया और अतिरिक्त धन की मांग करते हुए कथित रूप से धमकी दी कि “पैसे नहीं दिए तो फोटो वायरल कर बदनाम कर देंगे।”
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि बाद में एक अन्य व्यक्ति, जिसने स्वयं को विकास चावला उर्फ खुदुर चावला बताया, वहां आया और कथित रूप से मारपीट, बंधक बनाकर रखने तथा ब्लैकमेल करने जैसी घटनाएं हुईं। आवेदक का दावा है कि वह किसी तरह वहां से निकलने में सफल हुआ।
यदि यह आरोप सत्य हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति के साथ हुई घटना नहीं, बल्कि शहर में चल रहे एक संभावित संगठित ब्लैकमेल नेटवर्क का संकेत हो सकता है।
सवाल केवल एक स्पा का नहीं, पूरे सिस्टम का है
रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और देहरादून जैसे मैदानी क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में स्पा सेंटरों की बाढ़ सी आ गई है। हर गली-मोहल्ले और कॉम्प्लेक्स में “हेल्थ स्पा”, “वेलनेस सेंटर”, “थाई मसाज”, “अरोमा थेरेपी” के बोर्ड चमकते दिख जाते हैं।
लेकिन सवाल यह है:
इन सेंटरों को लाइसेंस किस आधार पर दिया जा रहा है?
क्या नियमित पुलिस व प्रशासनिक सत्यापन होता है?
क्या कर्मचारियों का बैकग्राउंड चेक अनिवार्य है?
क्या सीसीटीवी, रजिस्टर और ग्राहक एंट्री की जांच होती है?
अगर शिकायत में लगाए गए आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल एक सेंटर की गलती नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र की विफलता है।
ब्लैकमेल का नया मॉडल?
सूत्र बताते हैं कि कई शहरों में एक पैटर्न देखने को मिला है—
ग्राहक को सामान्य सेवा के नाम पर बुलाया जाता है।
फिर अतिरिक्त सेवा या आपत्तिजनक स्थिति पैदा की जाती है।
मोबाइल से फोटो/वीडियो लेकर वायरल करने की धमकी दी जाती है।
फिर मोटी रकम वसूली जाती है।
यह एक तरह का “हनी-ट्रैप ब्लैकमेल मॉडल” है, जिसमें ग्राहक सामाजिक बदनामी के डर से शिकायत दर्ज कराने से कतराता है।
यदि जसवंत पन्नू ने साहस दिखाकर शिकायत दर्ज कराई है, तो यह प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है।
जिम्मेदारी किसकी?
इस पूरे मामले में कई स्तरों पर जवाबदेही बनती है:
1. स्पा संचालक
यदि सेंटर में अवैध गतिविधियां चल रही हैं या कर्मचारियों द्वारा ग्राहकों को धमकाया जा रहा है, तो इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी संचालक की बनती है।
2. बिल्डिंग प्रबंधन
जिस व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में सेंटर संचालित हो रहा है, क्या वहां के प्रबंधन ने किरायेदार की गतिविधियों की जांच की?
डिजिटल ब्लैकमेल  यह संगठित अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है।

क्रमशः रुद्रपुर के सभी गुप्त संचालकों के नाम


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