

हल्द्वानी, 12 फरवरी। नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर की शांत सुबह गुरुवार को उस वक्त दहशत में बदल गई, जब कोतवाली क्षेत्र स्थित नवीन गल्ला मंडी परिसर में एक युवती और युवक के रक्तरंजित शव बरामद हुए। मंडी में काम करने पहुंचे व्यापारियों और मजदूरों ने जब परिसर के एक कोने में दोनों को लहूलुहान हालत में पड़ा देखा तो सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और कुछ ही देर में पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
पुलिस जांच में मृतकों की पहचान 22 वर्षीय लक्ष्मी पोखरिया, पुत्री हेम चंद्र पोखरिया, निवासी ओखलकांडा ब्लॉक (नैनीताल) और 30 वर्षीय शुभम कुमार टम्टा, निवासी अल्मोड़ा के रूप में हुई है। दोनों की हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई। उनके सिर और चेहरे को भारी पत्थर से कुचल दिया गया था। घटनास्थल से खून से सना एक बड़ा पत्थर बरामद हुआ है, जिसे फॉरेंसिक टीम ने अहम साक्ष्य के रूप में कब्जे में लिया है।
सुबह मंडी पहुंचे मजदूरों ने देखा भयावह दृश्य
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रोज की तरह सुबह करीब 6 बजे जब मंडी में गतिविधियां शुरू हुईं तो कुछ मजदूरों की नजर परिसर के पीछे की ओर पड़ी, जहां दो लोग अचेत अवस्था में पड़े दिखाई दिए। पास जाकर देखा तो दोनों के चेहरे बुरी तरह क्षत-विक्षत थे और आसपास खून फैला हुआ था। दृश्य इतना भयावह था कि कई लोग सिहर उठे। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पहचान में आई मुश्किल, परिजनों को बुलाया गया
शवों की स्थिति इतनी खराब थी कि पहली नजर में पहचान करना मुश्किल हो गया। कोतवाल विजय मेहता ने बताया कि मृतका की पहचान उसके भाई सुरेश चंद्र पोखरिया ने की, जो सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने बहन की गुमशुदगी की आशंका जताते हुए तहरीर दी है। लक्ष्मी बीएससी की छात्रा थी और पढ़ाई के सिलसिले में अक्सर हल्द्वानी आती-जाती थी।
मृतक युवक की पहचान उसकी जेब से मिले आधार कार्ड के जरिए हुई। आधार में दर्ज जन्मतिथि 31 दिसंबर 1995 और मोबाइल नंबर के आधार पर परिजनों से संपर्क कर पुष्टि कराई गई। शुभम टम्टा के परिजन भी अल्मोड़ा से हल्द्वानी पहुंचे।
हत्या का तरीका दर्शाता है गहरी रंजिश?
जिस प्रकार दोनों के सिर पत्थर से कुचले गए, उससे पुलिस भी हैरान है। प्रारंभिक जांच में यह साफ है कि हत्या बेहद नजदीक से और गुस्से में की गई प्रतीत होती है। पत्थर के वार इतने तीव्र थे कि चेहरों की पहचान मिटाने का प्रयास भी माना जा रहा है। इससे यह आशंका बलवती हो रही है कि हत्यारों की मृतकों से कोई निजी रंजिश रही हो या फिर किसी भावनात्मक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया हो।
पुलिस प्रेम प्रसंग, आपसी विवाद, आर्थिक लेन-देन और पुरानी दुश्मनी—सभी एंगल से जांच कर रही है। दोनों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और सोशल मीडिया गतिविधियों को खंगाला जा रहा है।
सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही एसपी सिटी मनोज कत्याल, सीओ अमित सैनी और कोतवाली प्रभारी विजय मेहता मौके पर पहुंचे। मंडी परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त कर ली गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों मंडी परिसर में कब और कैसे पहुंचे। क्या वे रात में वहां आए थे या किसी ने उन्हें बुलाया था?
सूत्रों के अनुसार, फुटेज में देर रात कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देने की संभावना है, जिनकी तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस ने मंडी में कार्यरत सुरक्षा कर्मियों और आसपास के चौकीदारों से भी पूछताछ की है।
विशेष टीम गठित, जल्द खुलासे का दावा
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष पुलिस टीम गठित की गई है। टीम में सर्विलांस, एसओजी और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी।
फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से खून के नमूने, पत्थर, कपड़ों के रेशे और अन्य संभावित साक्ष्य एकत्र किए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का सही समय और वार की प्रकृति स्पष्ट होगी, जिससे जांच को दिशा मिलेगी।
क्या प्रेम प्रसंग का मामला?
स्थानीय चर्चाओं में यह भी सामने आ रहा है कि दोनों के बीच जान-पहचान हो सकती थी। हालांकि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है। यदि दोनों परिचित थे, तो सवाल उठता है कि वे मंडी परिसर जैसे सुनसान स्थान पर क्यों पहुंचे? क्या किसी तीसरे व्यक्ति ने उन्हें वहां बुलाया था? या फिर किसी विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया?
जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि क्या यह ऑनर किलिंग या सामाजिक दबाव से जुड़ा मामला तो नहीं। फिलहाल पुलिस किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।
परिवारों में कोहराम, क्षेत्र में आक्रोश
घटना की खबर मिलते ही लक्ष्मी के गांव ओखलकांडा और शुभम के पैतृक क्षेत्र अल्मोड़ा में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। लक्ष्मी के भाई ने बताया कि वह पढ़ाई में मेधावी थी और भविष्य को लेकर कई सपने संजोए हुए थी। वहीं शुभम के परिजनों ने हत्या की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है।
हल्द्वानी के व्यापारिक संगठनों ने भी घटना पर चिंता जताई है और मंडी क्षेत्र में रात्रि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
नवीन गल्ला मंडी जैसा व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र, जहां दिन में सैकड़ों लोग आते-जाते हैं, वहां इस प्रकार की वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि हत्या देर रात हुई, तो क्या वहां पर्याप्त निगरानी नहीं थी? क्या सीसीटीवी कैमरे सक्रिय थे? इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हाल के महीनों में शहर में अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे भय का माहौल है। पुलिस गश्त और निगरानी बढ़ाने की मांग की जा रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा राज
दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, सिर पर गंभीर चोटें प्राथमिक कारण प्रतीत होती हैं, लेकिन विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारण की पुष्टि होगी। यह भी जांच का विषय है कि क्या हत्या से पहले किसी प्रकार का संघर्ष हुआ था या मृतकों को पहले बेहोश किया गया था।
कई सवाल अब भी अनुत्तरित
यह दोहरा हत्याकांड अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया है—
क्या दोनों किसी संबंध में थे?
क्या यह पूर्व नियोजित हत्या थी?
क्या हत्यारे परिचित थे?
क्या घटना स्थल ही हत्या का स्थान है या शव वहां लाकर फेंके गए?
इन सभी पहलुओं पर पुलिस गहनता से जांच कर रही है।
निष्कर्ष
हल्द्वानी की सुबह को खून से रंग देने वाली इस घटना ने पूरे कुमाऊं मंडल को झकझोर दिया है। लक्ष्मी पोखरिया और शुभम टम्टा की निर्मम हत्या ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शहरों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है। पुलिस ने जल्द खुलासे का भरोसा दिया है, लेकिन तब तक यह दोहरा हत्याकांड रहस्य और भय का प्रतीक बना रहेगा।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस सनसनीखेज वारदात के पीछे छिपे कारणों से पर्दा उठेगा। फिलहाल, पूरा शहर न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।




