

खासकर यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) को बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया गया है। इससे मध्य पूर्व में शिया-सुन्नी विभाजन और गहरा हो गया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
ईरान ने GCC के छह सुन्नी बहुल देशों को निशाना बनाकर नुकसान पहुंचाया है। इससे क्षेत्र की राजनीति बदल गई है और उम्मा (मुस्लिम समुदाय) की एकता के विचार पर गहरा असर पड़ा है।
डिएगो गार्सिया पर किया हमला
ईरान ने अपनी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी बेस डिएगो गार्सिया पर हमला किया है। इससे साफ है कि तेहरान तेजी से लंबी दूरी की मिसाइलें बना रहा था। भविष्य में यह यूरोपीय देशों को भी धमकी दे सकता था। सऊदी अरब ने खुले तौर पर कहा है कि ईरान पर भरोसा नहीं है।
बाकी GCC देश बहुत गुस्से में हैं क्योंकि उनकी तेल आधारित अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। ईरान के हमलों से तेल उत्पादन और निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है। सबसे खराब स्थिति में ये छह देश जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं।
अमेरिका के सामने चुनौती
अमेरिका के सामने होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन (जहाजों की आवाजाही) की आजादी बहाल करने की बड़ी चुनौती है। राष्ट्रपति ट्रंप को अब यूरोपीय सहयोगी और जापान से समर्थन मिल गया है। वे फारस की खाड़ी में महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते दोबारा खोलने में मदद करेंगे।
अमेरिका जानता है कि ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए वैश्विक तेल यातायात बहाल करना जरूरी है। इसके लिए अमेरिका और इजरायल को ईरानी मिसाइलों को जहाजों या तेल सुविधाओं पर हमला करने से रोकना होगा। यह एंटी-मिसाइल सिस्टम, हवाई हमलों या जमीन पर सैनिक भेजकर किया जा सकता है।
ईरान ने मांगी मदद
ईरान के नेतृत्व को अमेरिका-इजरायल ने निशाना बनाया है लेकिन IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) अभी हार नहीं मान रहा। वह लगातार दुश्मनों और खाड़ी देशों पर मिसाइलें दाग रहा है। ईरान ने युद्ध से पहले चीन और रूस की मदद से GCC क्षेत्र में लक्ष्यों के GPS कोऑर्डिनेट्स पहले से तैयार कर लिए थे। इसलिए सभी हमले सटीक हुए हैं।
ईरान इजरायल पर क्लस्टर बम मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है।
इससे लगता है कि तेहरान अगले कदम के रूप में MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंट रीएंट्री व्हीकल) वारहेड वाली मिसाइलों पर प्रयोग कर रहा है। MIRV मिसाइलों को रोकना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि छोटे-छोटे वारहेड एक साथ अलग हो जाते हैं और एंटी-बैलिस्टिक डिफेंस उन्हें पकड़ नहीं पाता।
एपिक फ्यूरी के बाद बिगड़ा माहौल
पिछले दशकों में कथित तौर पर ईरान ने अपने प्रॉक्सी (समर्थित समूहों) से मध्य-पूर्व में अस्थिरता फैलाई लेकिन GCC देश इजरायल और अमेरिका के खिलाफ ईरान के हमलों से दूर रहे। अब ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (अमेरिका का यह युद्ध अभियान) के बाद पूरे क्षेत्र में अशांति है। ईरान अब क्षेत्र में अलग-थलग पड़ गया है क्योंकि उसने खाड़ी देशों को बहाना बनाकर अमेरिका को निशाना बनाया, युद्ध बढ़ाया और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरे में डाला।




