स्पेशल CBI जज अजय गुप्ता ने अपने आदेश में CBI की ओर से दी गई दलीलों, केस डायरी और रिमांड पेपर का हवाला दिया है, जिससे NEET UG 2026 पेपर लीक की साजिश की पूरी तस्वीर बेनकाब हो रही है.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
पेपर लीक की शुरुआत यहां से हुई
CBI ने कोर्ट को बताया कि आरोपी पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे इस पूरे नेटवर्क के सबसे अहम चेहरे हैं. NEET 2026 पेपर लीक की शुरुआत इन्हीं से हुई और इन्हीं के ज़रिये पेपर सबसे पहले बाजार तक पहुंचा. CBI की ओर से पेश की गई केस डायरी के मुताबिक प्रह्लाद कुलकर्णी NTA से जुड़े पेपर सेटिंग सिस्टम का हिस्सा था. एजेंसी के अनुसार उसकी परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री तक पहुंच थी. आरोप है कि इसी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए उसने मनीषा वाघमारे और अन्य लोगों के साथ मिलकर प्रश्नपत्र बाहर पहुंचाया.
लाखों की रकम वसूली, सबूत खत्म किए
CBI ने कोर्ट को बताया कि कुलकर्णी ने सिर्फ पेपर लीक ही नहीं किया, बल्कि चुनिंदा छात्रों तक सवाल और जवाब पहुंचाने के बदले मोटी रकम भी ली. जांच एजेंसी का दावा है कि यह पैसा बाद में बैंक खातों में जमा किया गया. इतना ही नहीं एग्जाम खत्म होने के बाद कुलकर्णी ने हाथ से लिखी सामग्री नष्ट कर दी ताकि सबूत मिटाए जा सकें.
27 अप्रैल को ही बाहर आ गया था पेपर!
CBI के मुताबिक मनीषा वाघमारे इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी थी. एजेंसी का दावा है कि उसने 27 अप्रैल 2026 को ही यानी एग्जाम से कई दिन पहले प्रश्नपत्र और उसके उत्तर कुछ आरोपियों तक पहुंचा दिए थे. इनमें आरोपी धनंजय भी शामिल है.
मनीषा दूसरे आरोपियों और NTA से जुड़े एक सरकारी कर्मचारी के संपर्क में थी. जांच एजेंसी के अनुसार पेपर सबसे पहले कुलकर्णी और मनीषा के नेटवर्क से बाहर आया, जिसके बाद यह अलग-अलग लोगों तक पहुंचता चला गया.
ऐसे फैला पूरा पेपर लीक नेटवर्क
CBI की जांच के मुताबिक आरोपी धनंजय लोखंडे को मनीषा वाघमारे से पेपर मिला. इसके बाद यह प्रश्नपत्र शुभम खैरनार तक पहुंचा और फिर वहां से यश यादव, मंगीलाल खटीक, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल समेत दूसरे आरोपियों तक फैलाया गया.
राजस्थान SOG द्वारा की गई जांच में पता चला कि असली एग्जाम में 3 मई को आए कई सवाल पहले ही लीक होकर फैल चुके थे. आरोप है कि इन आरोपियों ने ही सवालों को लीक कर सर्कुलेट किया. एजेंसी का दावा है कि पूरा खेल पैसों के लिए किया गया.
CBI का दावा, अभी और बड़े नाम सामने आएंगे
कोर्ट में CBI ने कहा कि यह सिर्फ कुछ लोगों का काम नहीं, बल्कि एक संगठित सिंडिकेट है. एजेंसी के मुताबिक कुलकर्णी और मनीषा अभी तक उन सभी लोगों के नाम नहीं बता रहे हैं, जो इस नेटवर्क में शामिल हैं. CBI ने कोर्ट को बताया कि कई डिजिटल सबूत, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और दूसरे लिंक अभी खंगाले जाने बाकी हैं. आरोपियों को देश के दूसरे हिस्सों में ले जाकर पूछताछ करनी है, इसलिए रिमांड की ज़रूरत है.
कुलकर्णी और मनीषा के वकील की दलील
सुनवाई के दौरान पीवी कुलकर्णी के वकील ने 14 दिन की रिमांड मांगे जाने का विरोध किया. वकील ने कहा कि कुलकर्णी का NTA के साथ पेपर बनाने का कॉन्ट्रैक्ट था. NTA कई लोगों से पेपर सेट करवाता है और उनसे सवाल लेता है, लेकिन किसी को नहीं पता होता कि NTA किसका पेपर या कौन से सवाल असली एग्जाम में शामिल करेगा. सवाल चुनना सिर्फ NTA का काम है.
वकील ने कहा कि अभी तक NTA से कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, इसलिए कुलकर्णी की गिरफ्तारी का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि मनीषा के खिलाफ भी CBI के पास कोई पुख्ता सबूत नहीं है और वह गिरफ्तारी से पहले 24 घंटे तक पुणे पुलिस की गैरकानूनी हिरासत में रही. वकील ने कहा कि एजेंसी के पास पहले से पर्याप्त सामग्री है और ज्यादा पुलिस कस्टडी की जरूरत नहीं है.
कोर्ट ने क्या आदेश दिया
CBI और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने माना कि मामला बेहद गंभीर है और जांच अभी शुरुआती लेकिन बेहद महत्वपूर्ण चरण में है. कोर्ट ने कहा कि पूरे नेटवर्क तक पहुंचने और बाकी आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए दोनों आरोपियों से पूछताछ जरूरी है. इसी के मद्देनज़र कोर्ट ने पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे को 10 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया. 25 मई को इन दोनों को फिर से कोर्ट में पेश किया जाएगा.
