नौतपा (Nautapa) का प्रकोप गर्मी का वह भीषण दौर माना जाता है, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं। यह अवधि हर साल 25 मई से 2 जून तक रहती है। इन नौ दिनों में तापमान 45°C से 50°C तक पहुंच जाता है और चिलचिलाती लू लोगों को बेहाल कर देती है। मौसम विभाग के अनुसार इस दौरान उत्तर भारत के कई राज्यों में हीटवेव की स्थिति बनी रहती है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार नौतपा जितना अधिक तपता है, मानसून उतना ही बेहतर माना जाता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस समय सूर्य की किरणें पृथ्वी पर लगभग सीधी पड़ती हैं, जिससे गर्मी और लू का प्रभाव बढ़ जाता है।
नौतपा का आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व भी बेहद खास माना जाता है। सनातन परंपरा में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, इसलिए इस दौरान सूर्य उपासना, अर्घ्य और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया जाता है। मान्यता है कि प्यासे मनुष्यों, पशु-पक्षियों को पानी पिलाना, सत्तू, मटका, छाता और तरबूज का दान करना पुण्यदायी होता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्र देव हैं, जिन्हें शीतलता का प्रतीक माना जाता है। जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब धरती का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है। पौराणिक मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि नौतपा के दौरान जितनी अधिक गर्मी पड़ती है, आगे चलकर उतनी ही अच्छी वर्षा होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लगातार भीषण गर्मी और लू के संपर्क में रहने से डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी का सेवन करना जरूरी है। दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें और बाहर जाते समय सिर को सूती कपड़े या छतरी से ढककर रखें।
इसके अलावा ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और बासी भोजन से परहेज करने की सलाह दी गई है। चाय, कॉफी और अधिक कैफीन वाले पेय पदार्थों का अधिक सेवन भी नुकसानदायक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करके नौतपा के प्रकोप से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
