इस यात्रा को भारत के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करने के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
युवाओं और विकास साझेदारी पर फोकस
यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत के अहम साझेदार देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है, ताकि आने वाले समय में भारतीय युवाओं के लिए अधिक अवसर बन सकें.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी लिखा कि यह यात्रा कई महत्वपूर्ण बैठकों और कार्यक्रमों का हिस्सा होगी, जिनका लक्ष्य आपसी सहयोग बढ़ाना है.
इंडोनेशिया दौरा: रणनीतिक साझेदारी को मजबूती
पीएम मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया में रहेंगे, जहां वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर वहां जा रहे हैं.
उन्होंने बताया कि भारत और इंडोनेशिया के बीच पहले से ही व्यापक रणनीतिक साझेदारी है और यह उनका पहला द्विपक्षीय दौरा होगा, जो 2018 के बाद हो रहा है.
इस दौरान पीएम मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा भी करेंगे. साथ ही वह भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे.
ऑस्ट्रेलिया दौरा: रक्षा और तकनीक पर बातचीत
इंडोनेशिया के बाद पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न जाएंगे, जहां वह प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ बैठक करेंगे.
इस यात्रा में रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, निवेश, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी. पीएम मोदी मेलबर्न में भारतीय प्रवासियों से भी मुलाकात करेंगे.
इसके अलावा खेल और स्पोर्ट्स साइंस जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर बात होगी.
न्यूजीलैंड दौरा: व्यापार और संबंधों पर जोर
ऑस्ट्रेलिया के बाद पीएम मोदी न्यूजीलैंड के ऑकलैंड जाएंगे, जहां वह प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से मुलाकात करेंगे.
इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी. हाल ही में दोनों देशों ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत आगे बढ़ाई है.
पीएम मोदी वहां भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात करेंगे.
भारत की विदेश नीति पर असर
पीएम मोदी ने कहा कि यह दौरा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’, ‘महासागर विजन’ और एक स्वतंत्र व खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की नीति को और मजबूत करेगा.
यह यात्रा भारत के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कूटनीतिक और आर्थिक पकड़ को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.
