उत्तराखंड,बरसात की पहली बड़ी परीक्षा में उत्तराखंड की निर्माण व्यवस्था और सरकारी तैयारियों की पोल खुल गई। लखवाड़ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना का निर्माणाधीन हिस्सा दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर भरभराकर गिर गया, जबकि प्रेमनगर में टौंस नदी पर बना अस्थायी पुल तेज बहाव में बह गया। राज्यभर में 120 सड़कें बंद होने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
इन घटनाओं ने करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की गुणवत्ता और निर्माण कार्यों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पहली ही तेज बारिश में निर्माणाधीन ढांचा ढह जाए और अस्थायी पुल बह जाए, तो यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, जवाबदेही और संभावित भ्रष्टाचार की भी जांच का विषय बनता है।
लखवाड़ परियोजना के मलबे में ड्रिलिंग मशीनें, जेसीबी, डंपर और अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए। सौभाग्य से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यदि यह हादसा दिन में होता तो बड़ा नुकसान हो सकता था। वहीं टौंस नदी का पुल बहने से लोगों को करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ी।
राज्य में पौड़ी, चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी समेत कई जिलों में सड़कें बंद हैं और जौनसार क्षेत्र के 13 मोटर मार्गों पर यातायात ठप है। मौसम विभाग ने देहरादून सहित छह जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली परियोजनाओं और बरसात से पहले किए गए सुरक्षा इंतजामों की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कब होगी? यदि निर्माण में लापरवाही या भ्रष्टाचार सामने आता है तो जिम्मेदार अधिकारियों, निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि जनता के धन और लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों की जवाबदेही तय हो सके।
