उत्तराखंड/लंदन/ब्रिटेन में रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले में गिरफ्तार उत्तराखंड के रामनगर निवासी भारतीय मर्चेंट नेवी कप्तान अजय पंत को बड़ा कानूनी झटका लगा है। लंदन की साउथवार्क क्राउन कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय के लोग अदालत के बाहर पहुंचकर उनके प्रति नैतिक समर्थन और एकजुटता का संदेश देते दिखाई दिए।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
सुनवाई से पहले सोशल मीडिया पर एक अपील वायरल हुई थी, जिसमें भारतीय समुदाय से 16 जुलाई को दोपहर 1:30 बजे अदालत परिसर में शांतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से उपस्थित रहने का आग्रह किया गया था। अपील का असर सुनवाई के दौरान स्पष्ट रूप से देखने को मिला और कई लोग अदालत पहुंचे।
क्या है मामला?
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर के चिलकिया गांव निवासी 38 वर्षीय कप्तान अजय पंत पिछले महीने से ब्रिटिश हिरासत में हैं। ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार 14 जून को रॉयल मरीन और नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) ने MV Smirtos नामक ऑयल टैंकर पर कार्रवाई की थी। आरोप है कि जहाज पर करीब 98 हजार टन रूसी कच्चा तेल लदा था, जो ब्रिटेन और यूरोपीय संघ द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन करता है।
अजय पंत पर Russia (Sanctions) (EU Exit) Regulations, 2019 के तहत आरोप लगाए गए हैं। अभियोजन पक्ष का दावा है कि उन्हें जहाज पर मौजूद कार्गो की जानकारी थी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो उन्हें अधिकतम 10 वर्ष तक की जेल की सजा हो सकती है।
जमानत क्यों हुई खारिज?
वीडियो लिंक के माध्यम से हुई सुनवाई में अजय पंत ने जमानत की मांग की, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया। अदालत का कहना था कि उनके फरार होने अथवा रूस से सहायता लेकर देश छोड़ने की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
इस बीच अजय पंत ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को निरस्त करने के लिए भी आवेदन दायर किया है, जिस पर 12 नवंबर को सुनवाई होगी। वहीं मामले का लगभग चार सप्ताह का ट्रायल 15 दिसंबर से शुरू होने की संभावना है।
भारतीय समुदाय अब इस मामले की अगली सुनवाई पर नजर बनाए हुए है और अजय पंत के पक्ष में कानूनी प्रक्रिया के निष्पक्ष संचालन की उम्मीद जता रहा है।
