उत्तरकाशी में राज्य आंदोलनकारियों का धरना, छह दिन की मोहलत के बाद 2 अक्टूबर को काला दिवस का ऐलान

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उत्तरकाशी। पूर्व में दिए गए 10 दिवसीय अल्टीमेटम के बावजूद मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों ने शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय उत्तरकाशी पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने शासन-प्रशासन को छह दिन का नया समय देते हुए चेतावनी दी कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो 2 अक्टूबर को काला दिवस मनाया जाएगा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


आंदोलनकारियों के अनुसार, उनकी प्रमुख मांगों में डॉ. विजेंद्र सिंह पोखरियाल की रोकी गई पेंशन बहाल करना, मूल निवास 1950 लागू करना, हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू-कानून, राज्य आंदोलनकारियों को ₹30 हजार मासिक सम्मान पेंशन, राज्य सेनानी का दर्जा और 31 दिसंबर 2021 से पहले के लंबित चिन्हिकरण आवेदनों का शीघ्र निस्तारण शामिल हैं।
धरने का नेतृत्व चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति उत्तराखंड के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र सिंह पोखरियाल सहित पदाधिकारियों ने किया। आंदोलनकारियों ने कहा कि डॉ. पोखरियाल के मामले में न्यायालय से बरी होने के बावजूद पेंशन बहाल नहीं किए जाने से उनमें रोष है। उन्होंने शासन से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की।
धरने के दौरान जिलाध्यक्ष विजय बहादुर रावत, रवांई-यमुना घाटी अध्यक्ष पृथ्वीराज कपूर, जिला कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंह रावत और विशन सिंह कुंजन सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।
आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार को छह दिन का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 2 अक्टूबर को उत्तरकाशी सहित प्रदेशभर में काली पट्टी बांधकर काला दिवस मनाया जाएगा। इस दौरान राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ लंबित मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड की मूल अवधारणा से जुड़े मुद्दों को भी आंदोलन के केंद्र में रखा है। उनका कहना है कि मूल निवास, मजबूत भू-कानून और स्थायी राजधानी जैसे विषय राज्य निर्माण आंदोलन की मूल भावना से जुड़े हैं। इसके अलावा प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध, अंकिता भंडारी हत्याकांड, भू-माफिया और नकल माफिया जैसे मुद्दों पर भी सरकार से प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई।
धरने में चतर सिंह राणा, मूलचंद सिंह पंवार, तेग सिंह राणा, खुशहाल सिंह बिष्ट, लखीराम नौटियाल, विजेंद्र सिंह राठौर, कन्हैया सिंह रावत, विजयपाल सिंह, चैन सिंह पंवार, प्रमोद सिंह रावत, रविंद्र प्रसाद भट्ट, कुलदीप कलूड़ा, अरविंद बुटोला, घनश्याम प्रसाद बहुगुणा, भरता देवी, सुनील गुसाईं, जयेंद्र पाल सिंह नेगी, सुबेंद्र सिंह, हरीश सिंह गुसाईं सहित अनेक आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
आंदोलनकारियों ने कहा कि छह दिन की समयसीमा समाप्त होने के बाद अगली रणनीति तय की जाएगी। उनका कहना है कि मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।


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