राहुल गांधी ने आज के प्रदर्शन को लोकतंत्र का तांडव कहते हुए प्रदर्शन की झलकियां साझा की हैं।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को सकते में डाल दियाहै।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के अन्य नेताओं ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उससे जुड़े फैसलों की कानूनी वैधता की जांच कराने, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई करने और देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने सहित 10 तरह की राहत मांगी गई है।

याचिकाकर्ताओं ने मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच और मतदाता सूची से हटाए गए नामों के बारे में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी की है। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर यह मामला ‘राहुल गांधी बनाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया’ के नाम से सूचीबद्ध है। याचिका के मुताबिक, कांग्रेस की कानूनी टीम ने राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से करीब एक से दो घंटे पहले ही इसे दाखिल कर दिया था। शाम 4:30 बजे की समयसीमा से पहले राहुल गांधी के कोर्ट नहीं पहुंच पाने के कारण उनके वकील एस प्रसन्ना ने याचिका दायर की। इससे पहले राहुल गांधी सैकड़ों समर्थकों के साथ इंडिया ब्लॉक के मार्च में शामिल होकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे थे। मार्च में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव भी शामिल थे।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर

सुप्रीम कोर्ट से क्या-क्या मांग की गई है?

याचिका में चुनाव आयोग के कामकाज, SIR के तहत मतदाता सूची में किए गए बदलावों और मतदाताओं को उपलब्ध प्रक्रियात्मक सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की 10 प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं।

1. SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड पेश करे चुनाव आयोग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि चुनाव आयोग को SIR से संबंधित सभी फाइलें, समझौते, बैठकों के मिनट्स और दर्ज आपत्तियों के रिकॉर्ड अदालत में पेश करने का निर्देश दिया जाए। इसके साथ ही 24 जून 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू करने के फैसले से संबंधित ECINET और ERONET के एक्सेस लॉग भी मांगे गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच से प्रक्रिया से जुड़े फैसलों की समीक्षा की जा सकेगी। इस मांग को संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत अधिकारों की सुरक्षा तथा अनुच्छेद 324 के क्रियान्वयन से जोड़ा गया है।

2. SIR से जुड़े फैसलों की कानूनी वैधता की जांच हो

याचिका में विवादित फैसलों की कानूनी समीक्षा कराने की मांग की गई है। इसमें यह जांचने का अनुरोध किया गया है कि संबंधित फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023, संविधान के अनुच्छेद 324 और अधिनियम की धारा 18 के अनुरूप हैं या नहीं। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों, विशेष रूप से 1995 के शेषन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में स्थापित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया है। मांग की गई है कि यदि कोई फैसला उचित कानूनी अधिकार के बिना लिया गया पाया जाता है, तो उसे रद्द किया जाए।

3. नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो

याचिका में मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत भी कार्रवाई की जानी चाहिए। यह मांग मतदाता सूची से जुड़े कामकाज में नियमों के पालन और जिम्मेदारी तय करने से संबंधित है। हालांकि, याचिका में की गई यह मांग अपने आप में किसी अधिकारी के दोषी पाए जाने या उसके खिलाफ कार्रवाई का न्यायिक आदेश नहीं है।

4. शिकायतों पर लिए गए फैसलों का रिकॉर्ड रखा जाए

याचिका में चुनाव आयोग को मौजूदा मामले और इससे जुड़ी शिकायतों पर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग भी की गई है। साथ ही, SIR से संबंधित प्रत्येक फैसले को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के अनुरूप लेने और उसका उचित रिकॉर्ड रखने की बात कही गई है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि शिकायतों पर कार्रवाई और उनसे जुड़े फैसलों की प्रक्रिया स्पष्ट हो, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित मामलों में किस आधार पर निर्णय लिए गए।

5. ऑनलाइन फॉर्म 6 में नियमों के मुताबिक बदलाव हों

याचिका में ऑनलाइन फॉर्म 6 को मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के अनुरूप रखने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया अपनाए बिना तय फॉर्म में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। इस मांग का उद्देश्य फॉर्म से जुड़ी प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के अनुरूप बनाए रखना है। याचिका में आग्रह किया गया है कि फॉर्म में किसी भी तरह के बदलाव के लिए औपचारिक प्रक्रिया का पालन किया जाए।

6. मतदाता सूची और EVM की स्वतंत्र जांच कराई जाए

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। प्रस्तावित समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने का अनुरोध किया गया है। इस समिति के सामने कई जिम्मेदारियां रखने की मांग की गई है। इनमें SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और उसमें किए गए बदलावों की जांच, ECINET और ERONET डेटाबेस तक पहुंच से संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा तथा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के तकनीकी डिजाइन, आर्किटेक्चर, नीतियों और प्रक्रियाओं की जांच शामिल है। याचिका में मतदाता सूची और EVM से संबंधित इन पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा कराने का आग्रह किया गया है। यह भी स्पष्ट है कि समिति गठित करने की मांग याचिकाकर्ताओं की ओर से की गई है; इसे सुप्रीम कोर्ट का स्वीकृत निर्देश नहीं माना जा सकता।

7. SIR में हटाए गए नामों की सूची और कारण सार्वजनिक हों

याचिका में SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के नामों की बूथवार सूची प्रकाशित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही प्रत्येक नाम हटाने का कारण बताने और सूची को मतदाताओं के लिंग तथा उम्र के आधार पर वर्गीकृत करने का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, लेकिन वे मतदान के योग्य हैं, उनके नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। इस मांग के तहत नाम हटाने की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने और योग्य मतदाताओं के नाम बहाल करने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

8. नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना नाम न हटाए जाएं

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि किसी मतदाता का नाम कानूनी नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए बिना मतदाता सूची से न हटाया जाए। इसके अलावा, पंजाब और अन्य चुनाव वाले राज्यों में योग्य मतदाताओं को निर्धारित अंतिम तारीख तक अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने की अनुमति देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इस व्यवस्था से पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने का अवसर मिल सकेगा।

9. सभी राज्यों में SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगे

याचिका की प्रमुख मांगों में देश के सभी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाना भी शामिल है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि जब तक अदालत इस मामले में उठाए गए सवालों पर फैसला नहीं कर लेती, तब तक प्रक्रिया को रोक दिया जाना चाहिए। विपक्ष ने इस मांग को योग्य मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने से जोड़ा है। हालांकि, याचिका में रोक लगाने का अनुरोध किया गया है, इसका अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है।

10. मताधिकार की रक्षा के लिए अन्य उचित आदेश भी दिए जाएं

याचिका के अंतिम बिंदु में सुप्रीम कोर्ट से मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अन्य उचित राहत देने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से ऐसे आदेश जारी करने की मांग की है, जिन्हें चुनावी प्रक्रिया और प्रत्येक योग्य नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए जरूरी समझा जाए। इस तरह याचिका में SIR के रिकॉर्ड की जांच से लेकर अधिकारियों की जवाबदेही, मतदाता सूची में पारदर्शिता, EVM की समीक्षा और प्रक्रिया पर अंतरिम रोक तक कई तरह के अनुरोध शामिल हैं।

याचिका की मांगें और अदालत के आदेश अलग हैं

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऊपर बताई गई 10 मांगें राहुल गांधी और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई हैं। ये अदालत द्वारा जारी किए गए निर्देश या मंजूर की गई राहतें नहीं हैं। SIR पर रोक लगाने, रिकॉर्ड पेश करने और स्वतंत्र जांच समिति गठित करने जैसे मुद्दों पर अदालत का क्या रुख होगा, यह न्यायिक कार्यवाही और उसके आदेशों पर निर्भर करेगा।