देहरादून में 23 से 25 अक्टूबर तक सजेगा 16वां ‘किताब कौतिक’, हजारों पुस्तकों के बीच साहित्य, संस्कृति और रचनात्मकता का संगम

‘आओ, दोस्ती करें किताबों से’ के संदेश के साथ दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में होगा तीन दिवसीय पुस्तक मेला, बाल लेखन कार्यशाला में बच्चों द्वारा तैयार हस्तलिखित पुस्तकें भी होंगी आकर्षण का केंद्र

देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, साहित्य और रचनात्मक परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से देहरादून में 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक तीन दिवसीय ‘देहरादून किताब कौतिक’ का आयोजन किया जाएगा। क्रिएटिव उत्तराखंड संस्था की ओर से आयोजित होने वाला यह 16वां किताब कौतिक दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के हॉल, ओपन थिएटर और गलियारों में सजेगा। पुस्तक मेले की थीम ‘आओ, दोस्ती करें किताबों से’ रखी गई है। आयोजन में हजारों पुस्तकों के साथ साहित्यिक परिचर्चाएं, करियर काउंसलिंग, बाल लेखन कार्यशालाएं, विज्ञान गतिविधियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर

आयोजन को भव्य और सुव्यवस्थित रूप देने के साथ ही इसकी जानकारी आमजन तक पहुंचाने के लिए बुधवार को प्रेस क्लब देहरादून में दोपहर दो बजे आयोजन समिति ने प्रेस वार्ता की। इस दौरान संस्था के पदाधिकारियों ने किताब कौतिक की रूपरेखा, उद्देश्य और तीन दिवसीय कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।

उत्तराखंड में 15 सफल आयोजन, अब देहरादून में 16वां पड़ाव

क्रिएटिव उत्तराखंड एवं म्योर पहाड़ के अध्यक्ष दयाल पांडे ने बताया कि संस्था अब तक उत्तराखंड के विभिन्न कस्बों और शहरों में 15 सफल किताब कौतिक आयोजित कर चुकी है। टनकपुर, बैजनाथ, चंपावत, पिथौरागढ़, द्वाराहाट, भीमताल, नानकमत्ता, रानीखेत, नई टिहरी, पंतनगर, गैरसैंण और डीडीहाट सहित अनेक स्थानों पर इस अभियान को लोगों का सहयोग मिला है।

उन्होंने कहा कि किताब कौतिक केवल पुस्तकें खरीदने और बेचने का आयोजन नहीं है, बल्कि यह समाज में पढ़ने-लिखने की संस्कृति विकसित करने का एक व्यापक प्रयास है। इसका उद्देश्य युवाओं और बच्चों में पुस्तकों के प्रति रुचि पैदा करना, उनकी कल्पनाशक्ति को बढ़ावा देना तथा उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को साहित्य के माध्यम से आगे बढ़ाना है।

दयाल पांडे के अनुसार, देहरादून में आयोजित होने वाला 16वां किताब कौतिक इस अभियान को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। इसमें साहित्य, शिक्षा, कला और संस्कृति से जुड़े लोगों को एक साझा मंच मिलेगा।

लेखकों से सीधा संवाद, साहित्यिक परिचर्चा और करियर काउंसलिंग

किताब कौतिक अभियान के सदस्य प्रवीन कुमार भट्ट ने बताया कि इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य बच्चों और युवाओं के मन में जिज्ञासा, रचनात्मकता तथा पढ़ने की आदत का बीजारोपण करना है। इसके लिए पुस्तक मेले में विभिन्न आयु वर्गों और रुचियों को ध्यान में रखते हुए कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखकों के साथ सीधा संवाद, साहित्यिक परिचर्चा, काव्य गोष्ठी और विषय विशेषज्ञों के साथ संवाद सत्र होंगे। इसके अतिरिक्त स्कूली बच्चों और आम लोगों के लिए करियर काउंसलिंग की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि विद्यार्थी अपनी रुचि, क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

बच्चों के लिए विज्ञान कोना, नेचर वॉक और साहसिक गतिविधियां भी आयोजित होंगी। आयोजन स्थल पर हस्तशिल्प के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां स्थानीय कला और शिल्प से जुड़ी सामग्री देखने का अवसर मिलेगा। आमंत्रित कलाकारों की प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक संध्याएं भी जीवंत होंगी।

पपेट निर्माण, वॉल पेंटिंग और भाषा-संस्कृति की कार्यशालाएं

पुस्तक मेले में केवल पुस्तकों और साहित्य तक गतिविधियां सीमित नहीं रहेंगी। बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाने के लिए पपेट निर्माण, भाषा-संस्कृति और वॉल पेंटिंग से संबंधित कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। विभिन्न विद्यालयों के बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं भी होंगी।

आयोजकों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, रंगकर्मी और विषय विशेषज्ञ देहरादून पहुंचेंगे। इससे विद्यार्थियों, शिक्षकों, साहित्य प्रेमियों और आम नागरिकों को अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी लोगों से मिलने तथा उनके विचारों को समझने का अवसर मिलेगा।

बच्चों की हस्तलिखित पुस्तकें होंगी खास आकर्षण

देहरादून किताब कौतिक के पहले चरण में 14 से 18 अक्टूबर तक विभिन्न विद्यालयों के बच्चों के लिए पांच दिवसीय ‘बाल प्रहरी बाल लेखन कार्यशाला’ आयोजित की गई थी। इस कार्यशाला में भाग लेने वाले बच्चों ने स्वयं अपनी हस्तलिखित पुस्तकें तैयार की हैं।

इन पुस्तकों को पुस्तक मेले में विशेष स्टॉल के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा, जिसका संचालन भी बच्चे करेंगे। यह पहल विद्यार्थियों को लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाने, अपने विचारों को शब्दों में व्यक्त करने और अपनी रचनात्मक क्षमता को सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर देगी।

बच्चों की ओर से तैयार की गई इन पुस्तकों के माध्यम से उन्हें यह अनुभव भी मिलेगा कि पढ़ना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण अपने विचारों को लिखना और दूसरों तक पहुंचाना भी है।

पुस्तक संस्कृति को जन अभियान बनाने की पहल

किताब कौतिक जैसे आयोजनों का महत्व ऐसे समय में और बढ़ जाता है, जब बच्चों और युवाओं का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों में व्यस्त रहता है। पुस्तक मेले के जरिए उन्हें साहित्य, ज्ञान-विज्ञान, रचनात्मक लेखन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

आयोजन समिति का मानना है कि पुस्तकों से जुड़ाव बच्चों में भाषा कौशल, कल्पनाशक्ति और विचार करने की क्षमता को मजबूत करता है। तीन दिवसीय देहरादून किताब कौतिक इसी सोच के साथ साहित्य और संस्कृति को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करेगा।

प्रेस वार्ता में हेम पंत, दयाल पांडे, प्रवीन कुमार भट्ट, विजय भट्ट सहित विभिन्न पत्रकार मौजूद रहे। आयोजकों ने उम्मीद जताई कि देहरादून के इस आयोजन में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और साहित्य प्रेमियों की भागीदारी से पुस्तक संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा और ‘आओ, दोस्ती करें किताबों से’ का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचेगा।