खुला पत्र: पांच वर्षों से ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में हरियाणा के अभ्यर्थियों के चयन के रुझान की हो उच्चस्तरीय जांच
उत्तराखंड के 4,012 पदों में 3,600 अभ्यर्थियों के हरियाणा से होने के दावे पर उठे सवाल, 2027 के चुनाव से पहले सरकार दे जवाब
सेवा में:
माननीय केंद्रीय संचार मंत्री, भारत सरकार
माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड शासन
माननीय मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन
उत्तराखंड के सभी लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद, कैबिनेट मंत्री एवं सत्ता पक्ष के विधायक।
विषय: ग्रामीण डाक सेवक भर्ती के पिछले पांच वर्षों के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच और उत्तराखंड के युवाओं के रोजगार हितों की रक्षा के संबंध में।
महोदय,
उत्तराखंड राज्य का निर्माण केवल एक भौगोलिक सीमा बनाने के लिए नहीं हुआ था। इस राज्य के निर्माण के पीछे युवाओं को रोजगार, स्थानीय लोगों को अवसर, पलायन पर रोक और पहाड़ के भविष्य को सुरक्षित करने का सपना था। हजारों राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान से बने इस प्रदेश में आज यदि स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के अवसरों को लेकर सवाल उठाने पड़ रहे हैं, तो सरकार और जनप्रतिनिधियों को इसका जवाब देना चाहिए।
ग्रामीण डाक सेवक भर्ती को लेकर सामने आ रहे आंकड़े गंभीर चिंता पैदा करते हैं। दावा किया जा रहा है कि उत्तराखंड में 4,012 पदों में से लगभग 3,600 पदों पर हरियाणा के अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। पिछले पांच वर्षों के भर्ती परिणामों में भी हरियाणा के अभ्यर्थियों के लगातार चयन होने की बात कही जा रही है। सीमांत जिले पिथौरागढ़ में 65 पदों में 60 चयनित अभ्यर्थियों के हरियाणा से होने की खबर ने इस विषय को और गंभीर बना दिया है।
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद की मांग है कि वर्ष 2021 से 2026 तक के ग्रामीण डाक सेवक भर्ती रिकॉर्ड की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
हम केंद्रीय संचार मंत्री से मांग करते हैं कि वे डाक विभाग के संबंधित अधिकारियों से पांच वर्षों की भर्ती का राज्यवार और जिलेवार विवरण तलब करें। कुल पदों, चयनित अभ्यर्थियों, मेरिट सूची, शैक्षिक प्रमाणपत्रों, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया की जांच कराई जाए। यदि किसी अभ्यर्थी के प्रमाणपत्रों या चयन प्रक्रिया में अनियमितता मिलती है, तो नियमानुसार कार्रवाई हो।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन से भी आग्रह है कि वे केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर इस मामले की जांच सुनिश्चित करें। उत्तराखंड के पांचों लोकसभा सांसद—अनिल बलूनी, अजय भट्ट, त्रिवेंद्र सिंह रावत, माला राज्यलक्ष्मी शाह और अजय टम्टा—इस मुद्दे को संसद में उठाएं। राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, कल्पना सैनी और नरेश बंसल भी युवाओं की चिंता को केंद्र सरकार तक पहुंचाएं।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल, रेखा आर्य, सौरभ बहुगुणा, खजान दास, भरत सिंह चौधरी, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा सहित सत्ता पक्ष के सभी विधायक इस मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा विरोध हरियाणा या किसी अन्य राज्य के युवाओं से नहीं है। देश के प्रत्येक पात्र नागरिक को नियमों के अनुसार रोजगार पाने का अधिकार है। लेकिन उत्तराखंड के युवाओं के मन में उठ रहे सवालों का जवाब देना भी सरकार की जिम्मेदारी है। यदि चयन पूरी तरह नियमों के अनुसार हुआ है, तो सरकार आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट करे। यदि कहीं अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हमारी प्राथमिकता उत्तराखंड के युवा, उनका भविष्य और राज्य निर्माण आंदोलन की भावना है। केवल राज्य स्थापना दिवस मनाने से आंदोलनकारियों के सपने पूरे नहीं होंगे; रोजगार और पलायन जैसे बुनियादी सवालों पर भी ठोस कदम उठाने होंगे।
हम मांग करते हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पांच वर्षों के भर्ती रिकॉर्ड की जांच पूरी कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। यदि सरकार ने समय रहते जवाब नहीं दिया, तो उत्तराखंड की जनता विधानसभा चुनाव में अपने लोकतांत्रिक अधिकार से जवाब मांगेगी।
हमारी प्राथमिकता हमारे लोग हैं। उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य पर चुप्पी अब स्वीकार नहीं होगी।
सादर,
अवतार सिंह बिष्ट
अध्यक्ष
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद, उत्तराखंड
उत्तराखंड के 4,012 पदों में 3,600 अभ्यर्थियों के हरियाणा से होने के दावे पर उठे सवाल, 2027 के चुनाव से पहले सरकार दे जवाब
