उत्तराखंड के शेष 2440 राजस्व गांवों को सिविल पुलिस के दायरे में लाने की योजना वित्तीय स्वीकृति के अभाव में अटकी हुई है। गृह विभाग ने इन गांवों में पुलिस व्यवस्था मजबूत करने के लिए नौ नए थाने और 44 पुलिस चौकियां खोलने का प्रस्ताव तैयार किया है।

इसके लिए पुलिस कर्मियों के नए पदों का भी सृजन किया जाना है। प्रस्ताव अभी वित्त विभाग में लंबित है। वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद ही इस दिशा में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकेगा।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर

राज्य में पर्यटन का दायरा बढ़ने के साथ ही राजस्व क्षेत्रों में अपराध के मामले बढ़ने लगे हैं। इसे देखते हुए ही हाईकोर्ट के निर्देश पर राजस्व पुलिस व्यवस्था समाप्त कर सभी राजस्व गांवों को नियमित पुलिस के अधीन लाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

पहले चरण में 1983 राजस्व गांवों को सिविल पुलिस के दायरे में शामिल किया गया। अब शेष गांवों में भी नियमित पुलिस व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति, आबादी और पुलिसिंग की जरूरतों के आधार पर ढांचा तैयार किया गया है।

शेष गांवों में पुलिस व्यवस्था के विस्तार के लिए नौ नए थानों और 44 चौकियों की स्थापना प्रस्तावित है। इनके संचालन के लिए आवश्यक पुलिस बल की तैनाती करनी होगी। वर्तमान मानकों के अनुसार प्रति थाना 16 पद और प्रति चौकी 11 पुलिस कर्मियों की आवश्यकता है।

इसके लिए नए पदों के सृजन के साथ भवन और अन्य संसाधनों की व्यवस्था भी जरूरी होगी। पुलिस मुख्यालय के इस विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज चुका है।

aगृह विभाग अपने स्तर पर प्रक्रिया पूरी कर चुका है। लंबे समय से यह प्रस्ताव वित्त विभाग में लंबित चल रहा है। सचिव गृह शैलेश बगौली का कहना है कि वित्त की स्वीकृति के पश्चचात आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।