हमारी संस्कृति, हमारी पहचान — उत्तरायणी (घुघुतिया त्यार) महोत्सव 2026 : रुद्रपुर में लोकसंस्कृति का विराट उत्सव!शैल सांस्कृतिक समिति (शैल परिषद),

रुद्रपुर,उत्तराखंड की आत्मा उसकी लोकसंस्कृति, लोकपर्व और सामूहिक चेतना में बसती है। पर्व केवल तिथि नहीं होते, वे पीढ़ियों को जोड़ने वाले सेतु होते हैं। ऐसे ही पर्वों में उत्तरायणी, […]

संपादकीय | सोशल मीडिया, सस्ती लोकप्रियता और अंकिता को न्याय की पुकार

“सत्य परेशान हो सकता है, पर पराजित नहीं”—यह पंक्ति आज के शोरगुल भरे सोशल मीडिया युग में और अधिक प्रासंगिक हो उठती है। आदर्श जीवन की पहचान टीआरपी या ट्रेंडिंग […]

अंकिता भंडारी की हत्या मामले ने उत्तराखंड की राजनीति में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। हाल ही में इस घटना को लेकर अभिनेत्री उर्मिला सनावर के द्वारा कुछ बातें सोशल मीडिया में कही गई हैं और इसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।

केंद्र सरकार ने इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। कांग्रेस ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया है। बीजेपी नेतृत्व की भी नजर इस पर बनी हुई है। ✍️ अवतार सिंह बिष्ट […]

आस्था, शहादत और संस्कारों का जीवंत संगम!सिंह सभा गुरुद्वारा जगतपुरा आवास विकास

आज सिंह सभा गुरुद्वारा, जगतपुरा आवास विकास में आयोजित धार्मिक समागम केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि इतिहास, त्याग और धर्मनिष्ठा की उस अमर परंपरा का जीवंत स्मरण था, जिसने भारतीय […]

उत्तराखंड,सोशल मीडिया पर फर्जी ऑडियो फैलाने का आरोप, दुष्यंत कुमार गौतम ने गृह सचिव को लिखा पत्रझूठी व भ्रामक सामग्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग

भ्रामक खबर का ठप्पा अक्सर वही सरकारें लगाती हैं, जिन्हें सवाल असहज करते हैं। दुष्यंत कुमार गौतम का मामला इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण है कि सत्ता के नजदीक बैठे […]

संपादकीय,आस्था, कानून और पाखंड के बीच फँसा रुद्रपुर

भारत के कुछ शहरों को कानूनी रूप से पूरी तरह शाकाहारी घोषित किया गया है—पालीताना, ऋषिकेश, हरिद्वार, पुष्कर और सीमित अर्थों में अयोध्या। इन स्थानों पर यह निर्णय किसी एक […]

20 वर्षों का इंतज़ार खत्म: विधायक शिव अरोड़ा ने मकरन्दपुर की पुरानी मांग को विकास में बदला”

रुद्रपुर के विधायक शिव अरोरा ने 20 वर्षों से लंबित मकरन्दपुर टीन शेड की मांग पूरी कर यह साबित किया है कि संवेदनशील नेतृत्व ही सच्चा विकास लाता है। 25 […]

कर्ज़ में डूबता उत्तराखंड: विकास के नाम पर लूट का गणित और कमीशनखोरी की अर्थव्यवस्था

उत्तराखंड, जिसे राज्य आंदोलनकारियों ने “छोटा, सुंदर और आत्मनिर्भर पर्वतीय राज्य” के रूप में देखा था, आज 25 वर्षों में कर्ज़ का बोझ ढोता हुआ ऐसा प्रदेश बन चुका है, […]

अंकिता की चुप्पी नहीं, सवाल बोल रहे हैं — उत्तराखंड की अस्मिता कटघरे में, सत्ता की साख दांव पर”

उत्तराखंड की राजनीति, प्रशासन और सत्ता के गलियारों में जब भी अंकिता भंडारी हत्याकांड का नाम आता है, तो केवल एक अपराध नहीं, बल्कि राज्य की आत्मा पर लगा एक […]

अंकिता की चीख, सत्ता की चुप्पी और वीआईपी का साया: उत्तराखंड की अस्मिता के कठघरे में राजसत्ता”

उत्तराखंड की शांत वादियों में गूंजने वाली एक बेटी की चीख आज भी सत्ता के गलियारों में अनसुनी है। अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक जघन्य अपराध नहीं, बल्कि यह उस […]