रुद्रपुर की अनाज मंडी में उतरे “सुपरमैन” ठुकराल: जब जनहित के लिए सड़कों पर उतरा जननायक

रामपुर रोड की नवनिर्मित अनाज मंडी आज भले ही घास–फूस, जंग लगे शटरों और नशेड़ियों के अड्डे के रूप में बदहाली की तस्वीर पेश कर रही हो, लेकिन गुरुवार को […]

बनभूलपुरा: 29 एकड़ जमीन, 500 परिवार और 17 साल की न्यायिक अनिश्चितता — अब 10 दिसंबर को होगा फैसला

हल्द्वानी।बनभूलपुरा आज एक बार फिर इतिहास के सबसे तनावपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। रेलवे की 29 एकड़ जमीन पर बसे 500 से अधिक परिवारों का भविष्य अब 10 दिसंबर को […]

रूद्रपुर में मुख्यमंत्री धामी का 4 दिसंबर को आगमन, पं. रामसुमेर शुक्ल की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम में होंगे शामिल

रूद्रपुर/खटीमा। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी 4 दिसम्बर 2025 (गुरुवार) को ऊधमसिंहनगर जनपद के भ्रमण पर रहेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा वी.वी.आई.पी. श्रेणी का एवं अतिगोपनीय रखा गया […]

बारात में मारपीट से युवक की मौत, रिपोर्ट दर्ज न होने पर एसएसपी कार्यालय का घेराव

रूद्रपुर। बाजपुर में बीते दिनों एक बारात के दौरान हुई मारपीट में रम्पुरा निवासी युवक की मौत के मामले में अभी तक रिपोर्ट दर्ज न होने से मृतक के परिजनों […]

जागर: देवभूमि की जीवित आत्मा पर एक आध्यात्मिक दृष्टि (संपादकीय)संस्कृति खबर | देवभूमि की जीवंत आत्मा है जागर परंपरा

उत्तराखंड की जागर परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोकआस्था, आध्यात्म और जन–जीवन का जीवंत संगम है, जिसमें देवताओं को “जगाकर” मनुष्य अपने दुख, भय और समस्याओं का समाधान […]

राजधानी देहरादून में स्थित जिस राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन किया गया है, वह स्वयं में इतिहास, विरासत और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम है। ब्रिटिशकाल से लेकर अब तक के सफर को इस भवन ने बेहद करीब से देखा है।

यह न केवल उत्तराखंड की राजनीतिक पहचान को दर्शाता है, बल्कि राज्य के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। राज्य गठन के 25 साल बाद देहरादून के […]

देवव्रत महेश रेखे: वैदिक साधना से रचा गया 200 वर्षों बाद का इतिहास, काशी बनी साक्षी!क्या है दंडक्रम पारायण? – वैदिक साधना का सर्वोच्च शिखर

देवव्रत महेश रेखे: वैदिक साधना से रचा गया 200 वर्षों बाद का इतिहास, काशी बनी साक्षी काशी। भारत की सनातन परंपरा, हजारों वर्षों की वैदिक साधना और मंत्र-संस्कृति की जीवंत […]

उत्तराखंड कीलोक-सांस्कृतिक पहचान उसके पारंपरिक नृत्यों में गहराई से समाई हुई है। कुमाऊँ और गढ़वाल दोनों ही क्षेत्रों में नृत्य जीवन के आनंद, संघर्ष, वीरता और अध्यात्म के अभिव्यक्ति माध्यम हैं। झोड़ा, चांचरी, झुमैलो और चौंफुला जैसे सामूहिक नृत्य सामाजिक एकता और उल्लास को दर्शाते हैं, जबकि छोलिया और रणभूत जैसे नृत्य शौर्य, युद्धकला और वीरगति का सम्मान प्रस्तुत करते हैं। पांडव नृत्य महाभारत की कथाओं पर आधारित एक अनूठी लोक-नाट्य परंपरा है, जिसमें पौराणिक पात्रों की ऊर्जा कलाकारों में समाहित होने की लोकमान्यता भी जुड़ी है। वहीं थड़िया, मंडाण, सरौं, हारुल, भगनोल और मुखोटा नृत्य अलग-अलग अवसरों, ऋतुओं और देव-उत्सवों से संबंध रखते हैं। इन सभी नृत्यों में प्रकृति के प्रति प्रेम, सामाजिक सामूहिकता, अध्यात्म और लोक-स्मृतियों के संरक्षण का भाव प्रमुख रूप से दिखाई देता है। उत्तराखंड के लोक नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और पहचान के जीवंत प्रतीक हैं।

उत्तराखंड के लोकनृत्य — परंपरा, आध्यात्म, सामाजिकता और सामुदायिक चेतना की अनंत यात्रा ✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड की आत्मा […]

जिले की कोतवाली पुलिस ने 42 लाख रुपये से अधिक की ठगी करने वाले शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है। थाने में दर्ज मुकदमे में फरार अपराधी कई महीनों से पुलिस को चकमा देकर फरारी काट रहा था।

उस पर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। पुलिस को मिले इनपुट के आधार पर उसे देहरादून से गिरफ्तार कर लिया गया। ✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान […]

उत्तराखंड मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) से पहले राज्य में इसे लेकर तैयारियां जोरों पर है। इसके लिए मौजूदा मतदाता सूची का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान किया जा रहा है।

वर्ष 2003 के बाद दूसरे राज्यों से आकर यहां निवास करने और मतदाता बनने वालों का फिलहाल अलग डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल तब किया जाएगा […]