✍️ संपादकीय लेखउत्तराखंड की आपदाएं और विस्थापन की त्रासदी?उत्तराखंड की आपदाएं और सरकार का खोखला प्रबंधन

✍️ संपादकीय लेखउत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि यह भूमि अब लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रही है। पहाड़ टूट रहे हैं, नदियां उफान […]

कांग्रेस संगठन सृजन अभियान से पार्टी में आएगी नई ऊर्जा – धीरेंद्र प्रताप

रुड़की, 2 सितम्बर।उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि प्रदेश में चल रहा कांग्रेस संगठन सृजन अभियान पार्टी में नई ऊर्जा और नए रक्त […]

संपादकीय:हेमकुंट साहिब रोपवे : आस्था और विकास का अद्वितीय संगम? 12.4 किलोमीटर लंबी रोपवे को मंजूरी 2700 करोड़ से अधिक की लागत

उत्तराखण्ड सचिवालय में राज्य सरकार और एन.एच.एल.एम.एल के बीच हुए समझौते के तहत गोविंदघाट से श्री हेमकुंट साहिब तक 12.4 किलोमीटर लंबी रोपवे परियोजना को मंजूरी मिलना एक ऐतिहासिक उपलब्धि […]

संपादकीय :तीलू रौतेली पुरस्कार: नारी शक्ति का उत्सव और समाज निर्माण का संकल्प’13 चयनित महिलाओं और 33 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों

उत्तराखंड की धरती हमेशा से वीरांगनाओं और जननायकों की कर्मभूमि रही है। इस देवभूमि की हर घाटी और हर गांव में साहस, संघर्ष और त्याग की कहानियां पीढ़ी दर पीढ़ी […]

मसूरी गोलीकांड: शहादत की गाथा और अधूरे सपनों का सच

उत्तराखंड राज्य आंदोलन का इतिहास बलिदानों से भरा पड़ा है। 1 सितम्बर 1994 के खटीमा गोलीकांड और उसके ठीक अगले दिन 2 सितम्बर को हुए मसूरी गोलीकांड ने इस पर्वतीय […]

मसूरी गोलीकांड : जब निहत्थों पर बरसीं गोलियाँ और टूटे लोकतंत्र के भ्रम?मसूरी गोलीकांड : शहादत और अधूरे सपने

मसूरी गोलीकांड : शहादत और अधूरे सपने 2 सितम्बर 1994, उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास का वह काला दिन है जब शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकाल रहे निहत्थे आंदोलनकारियों पर पुलिस और […]

आपदा में गिलहरी-सा योगदान और आंदोलनकारियों की संवेदनशीलता

उत्तराखण्ड की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर से नहीं है, बल्कि यहाँ के राज्य आंदोलनकारियों की त्यागमयी परंपरा और संवेदनशील चेतना से भी है। समय-समय पर यह […]

सीएम धामी ने खटीमा गोलीकांड के शहीदों को नमन किया: राज्य आंदोलन के सपनों को साकार करने का संकल्प

खटीमा, 01 सितम्बर 2025।उत्तराखंड राज्य निर्माण के इतिहास में 1 सितम्बर 1994 का दिन एक अमिट अध्याय है। यही वह दिन था जब खटीमा की धरती पर आंदोलनकारियों के सीने […]

खटीमा शहीद स्मारक और 1 सितंबर 1994 का राज्य आंदोलन?खटीमा गोलीकांड 1994: उत्तराखंड आंदोलन का काला दिन और अधूरी न्यायगाथाखटीमा गोलीकांड 1994: उत्तराखंड आंदोलन का काला दिन और अधूरी न्यायगाथा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी:खटीमा गोलीकांड की बरसी पर शहीद स्थल, खटीमा में आयोजित कार्यक्रम में शहीद राज्य आन्दोलनकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शहीद राज्य आन्दोलनकारियों […]

संपादकीय:भारतीय जनता पार्टी और हिंदुत्व की राजनीति?ऐतिहासिक पृष्ठभूमि!उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को समझने के लिए हमें इतिहास की गहराई में जाना होगा।

उत्तराखंड की धरती सदियों से देवभूमि के नाम से जानी जाती है। हिमालय की गोद में बसा यह प्रदेश न केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी पहचान […]