वनभूलपुरा अतिक्रमण मामला: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले बुजुर्गों की “पहचान की जंग”, स्कूल बना सहारा

हल्द्वानी। वनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित है। सुनवाई से पहले क्षेत्र के सैकड़ों लोग खुद […]

उत्तराखंड में शिवसेना की दस्तक, मिशन 2027 का आगाज़?7 दिसंबर को रुद्रपुर में ऐतिहासिक बैठक, ज्वलंत मुद्दों पर बनेगी ठोस रणनीति!शिवसेना का लक्ष्य: देवभूमि की अस्मिता, सुरक्षा और स्वाभिमान

रुद्रपुर।देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। आगामी 7 दिसंबर 2025, रविवार को रुद्रपुर में आयोजित होने जा रही शिवसेना की महत्वपूर्ण प्रदेश […]

पंडित राम सुमेर शुक्ल की 47वीं पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री धामी ने दी विकास की सौगातें, कई बड़ी घोषणाएं

रुद्रपुर, 04 दिसम्बर 2025।स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं तराई क्षेत्र के संस्थापक स्वर्गीय पंडित राम सुमेर शुक्ल की 47वीं पुण्यतिथि पर रुद्रपुर राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री […]

लोकधुनों की रंगीन शाम: कुमाऊनी, गढ़वाली, राजस्थानी और पंजाबी संस्कृति का संगम”

“चंदोला मेडिकल कॉलेज का वार्षिक उत्सव: शिक्षा, संस्कृति और उल्लास का भव्य संगम” रुद्रपुर। चंदोला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं वसुंधरा नर्सिंग कॉलेज के वार्षिकोत्सव का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ […]

शिक्षा, संस्कृति और स्वास्थ्य का संगम: चंदोला कॉलेज का वार्षिकोत्सव बनेगा प्रेरणा का उत्सव

4– दिसंबर 2025: चंदोला कॉलेज में शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति का महायज्ञ आज से शुरू उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में जब शिक्षा, चिकित्सा और संस्कृति […]

मेडिकल कॉलेज में जयंती, मंच पर खनन की उपलब्धि: मुख्यमंत्री का विकास-भाषण”

रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में पंडित राम सुमेर शुक्ला की 47वीं जयंती पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भाषण विकास के दावों और राजनीतिक उपलब्धियों का मिश्रण रहा। […]

बनभूलपुरा: 29 एकड़ जमीन, 500 परिवार और 17 साल की न्यायिक अनिश्चितता — अब 10 दिसंबर को होगा फैसला

हल्द्वानी।बनभूलपुरा आज एक बार फिर इतिहास के सबसे तनावपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। रेलवे की 29 एकड़ जमीन पर बसे 500 से अधिक परिवारों का भविष्य अब 10 दिसंबर को […]

उत्तराखंड कीलोक-सांस्कृतिक पहचान उसके पारंपरिक नृत्यों में गहराई से समाई हुई है। कुमाऊँ और गढ़वाल दोनों ही क्षेत्रों में नृत्य जीवन के आनंद, संघर्ष, वीरता और अध्यात्म के अभिव्यक्ति माध्यम हैं। झोड़ा, चांचरी, झुमैलो और चौंफुला जैसे सामूहिक नृत्य सामाजिक एकता और उल्लास को दर्शाते हैं, जबकि छोलिया और रणभूत जैसे नृत्य शौर्य, युद्धकला और वीरगति का सम्मान प्रस्तुत करते हैं। पांडव नृत्य महाभारत की कथाओं पर आधारित एक अनूठी लोक-नाट्य परंपरा है, जिसमें पौराणिक पात्रों की ऊर्जा कलाकारों में समाहित होने की लोकमान्यता भी जुड़ी है। वहीं थड़िया, मंडाण, सरौं, हारुल, भगनोल और मुखोटा नृत्य अलग-अलग अवसरों, ऋतुओं और देव-उत्सवों से संबंध रखते हैं। इन सभी नृत्यों में प्रकृति के प्रति प्रेम, सामाजिक सामूहिकता, अध्यात्म और लोक-स्मृतियों के संरक्षण का भाव प्रमुख रूप से दिखाई देता है। उत्तराखंड के लोक नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और पहचान के जीवंत प्रतीक हैं।

उत्तराखंड के लोकनृत्य — परंपरा, आध्यात्म, सामाजिकता और सामुदायिक चेतना की अनंत यात्रा ✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड की आत्मा […]

“रुद्रपुर 4 दिसंबर को देगा इतिहास को सलाम — पंडित रामसुमेर शुक्ल स्मृति समारोह बनेगा तराई की गौरवगाथा का भव्य अध्याय”

संपादकीय :रुद्रपुर की सरज़मीं एक ऐतिहासिक क्षण की दहलीज़ पर खड़ी है। आगामी 4 दिसंबर को पंडित राम सुमेर शुक्ल स्मृति राजकीय मेडिकल कॉलेज में आयोजित होने वाला पंडित रामसुमेर […]

मेट्रोपोलिस सोसायटी विवाद पर हाईकोर्ट का निर्णय – लोकतंत्र की जीत, बंद दरवाजों की हार? मेट्रोपोलिस सोसायटी मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सभी 1600 घरों को मिलेगी सदस्यता

मेट्रोपोलिस सोसायटी मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सभी 1600 घरों को मिलेगी सदस्यता रूद्रपुर। मेट्रोपोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (एमआरडब्लूए) के उपनियमों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद […]