धामी सरकार की उपलब्धियां और सकारात्मक पहल

उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कार्यकाल एक स्थिर और निर्णायक नेतृत्व का उदाहरण बनकर उभर रहा है। साढ़े तीन वर्षों की अवधि में धामी सरकार ने […]

देहरादून पुलिस ने महिला सुरक्षा सर्वे रिपोर्ट पर उठाए सवाल

देहरादून को देश के 10 असुरक्षित शहरों में शामिल करने वाली पी वैल्यू एनालिटिक्स की हालिया रिपोर्ट पर राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने आपत्ति जताई है। आयोगों […]

✍️ संपादकीय लेखउत्तराखंड की आपदाएं और विस्थापन की त्रासदी?उत्तराखंड की आपदाएं और सरकार का खोखला प्रबंधन

✍️ संपादकीय लेखउत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि यह भूमि अब लगातार प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रही है। पहाड़ टूट रहे हैं, नदियां उफान […]

संपादकीय:हेमकुंट साहिब रोपवे : आस्था और विकास का अद्वितीय संगम? 12.4 किलोमीटर लंबी रोपवे को मंजूरी 2700 करोड़ से अधिक की लागत

उत्तराखण्ड सचिवालय में राज्य सरकार और एन.एच.एल.एम.एल के बीच हुए समझौते के तहत गोविंदघाट से श्री हेमकुंट साहिब तक 12.4 किलोमीटर लंबी रोपवे परियोजना को मंजूरी मिलना एक ऐतिहासिक उपलब्धि […]

हल्द्वानी: खटीमा मसूरी गोलीकांड के 31वें शहीद दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि

हल्द्वानी/देहरादून, 2 सितम्बर।मसूरी गोलीकांड के 31वें शहीद दिवस पर प्रदेशभर में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी हुकुम […]

संपादकीय :तीलू रौतेली पुरस्कार: नारी शक्ति का उत्सव और समाज निर्माण का संकल्प’13 चयनित महिलाओं और 33 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों

उत्तराखंड की धरती हमेशा से वीरांगनाओं और जननायकों की कर्मभूमि रही है। इस देवभूमि की हर घाटी और हर गांव में साहस, संघर्ष और त्याग की कहानियां पीढ़ी दर पीढ़ी […]

मसूरी गोलीकांड: शहादत की गाथा और अधूरे सपनों का सच

उत्तराखंड राज्य आंदोलन का इतिहास बलिदानों से भरा पड़ा है। 1 सितम्बर 1994 के खटीमा गोलीकांड और उसके ठीक अगले दिन 2 सितम्बर को हुए मसूरी गोलीकांड ने इस पर्वतीय […]

मसूरी गोलीकांड : जब निहत्थों पर बरसीं गोलियाँ और टूटे लोकतंत्र के भ्रम?मसूरी गोलीकांड : शहादत और अधूरे सपने

मसूरी गोलीकांड : शहादत और अधूरे सपने 2 सितम्बर 1994, उत्तराखंड आंदोलन के इतिहास का वह काला दिन है जब शांतिपूर्ण मौन जुलूस निकाल रहे निहत्थे आंदोलनकारियों पर पुलिस और […]

सीएम धामी ने खटीमा गोलीकांड के शहीदों को नमन किया: राज्य आंदोलन के सपनों को साकार करने का संकल्प

खटीमा, 01 सितम्बर 2025।उत्तराखंड राज्य निर्माण के इतिहास में 1 सितम्बर 1994 का दिन एक अमिट अध्याय है। यही वह दिन था जब खटीमा की धरती पर आंदोलनकारियों के सीने […]

खटीमा शहीद स्मारक और 1 सितंबर 1994 का राज्य आंदोलन?खटीमा गोलीकांड 1994: उत्तराखंड आंदोलन का काला दिन और अधूरी न्यायगाथाखटीमा गोलीकांड 1994: उत्तराखंड आंदोलन का काला दिन और अधूरी न्यायगाथा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी:खटीमा गोलीकांड की बरसी पर शहीद स्थल, खटीमा में आयोजित कार्यक्रम में शहीद राज्य आन्दोलनकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान शहीद राज्य आन्दोलनकारियों […]