संपादकीय: ‘कंबल वाले बाबा’ और आज का डिजिटल युवा: आखिर क्यों नीम करोली बाबा के दर पर सिर झुका रही है नई पीढ़ी?

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नैनीताल (उत्तराखंड): आज का परिवेश तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सोशल मीडिया की चकाचौंध से घिरा हुआ है। ऐसे दौर में जहां युवा पीढ़ी को अक्सर अपनी संस्कृति और अध्यात्म से दूर माना जाता है, वहीं एक बिल्कुल उलट और सुखद तस्वीर देवभूमि उत्तराखंड के कैंची धाम से सामने आ रही है [2608858-2026-08-04]। लैपटॉप बैग टांगे, हाथ में आधुनिक गैजेट्स लिए और कॉर्पोरेट जगत के तनाव से थके लाखों युवा आज 20वीं सदी के महान संत नीम करोली बाबा के चरणों में आत्मिक शांति की खोज कर रहे हैं . यह महज एक धार्मिक झुकाव नहीं, बल्कि युवा मानस में उपजी गहरी वैचारिक और आध्यात्मिक क्रांति है।
रील्स की नकली दुनिया बनाम बाबा की सादगी

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


आज की युवा पीढ़ी ‘दिखावे’ और सोशल मीडिया पर लाइक्स-कमेंट्स की अंधी दौड़ से भीतर से खोखली और अकेली महसूस कर रही है। डिप्रेशन, एंग्जायटी और ‘बर्नआउट’ (काम का अत्यधिक तनाव) इस पीढ़ी की सबसे बड़ी समस्याएं बन चुकी हैं। ऐसे में बाबा नीम करोली की सादगी युवाओं को एक नया दृष्टिकोण देती है। बिना किसी तामझाम के, हमेशा एक साधारण लकड़ी की चौकी पर बैठने वाले और साधारण कंबल ओढ़ने वाले बाबा का स्वरूप युवाओं को यह सिखाता है कि असली सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि मन के भीतर है।
टेक आइकन्स और सेलिब्रिटीज का प्रभाव
युवाओं के बीच इस श्रद्धा भाव के पीछे एक बड़ा कारण उनके वैश्विक रोल मॉडल्स भी हैं। आज का जो युवा स्टीव जॉब्स (Apple) और मार्क जुकरबर्ग (Meta) जैसी टेक हस्तियों को अपना आदर्श मानता है, जब वह यह पढ़ता है कि अपने संकट के दिनों में इन दिग्गजों को जीवन की राह कैंची धाम आकर मिली, तो उसकी जिज्ञासा श्रद्धा में बदल जाती है। इसके अलावा, भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जैसी समकालीन हस्तियों की बाबा के प्रति अटूट आस्था ने युवाओं को यह संदेश दिया है कि सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी जमीन से जुड़े रहना और अध्यात्म की शरण में जाना कितना जरूरी है।
कठिन कर्मकांड नहीं, ‘लव, सर्व, रिमेम्बर’ का सरल मंत्र
युवा पीढ़ी जटिल धार्मिक कर्मकांडों, अंधविश्वासों और कठिन नियमों से दूर भागती है। बाबा नीम करोली महाराज की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि उन्होंने कभी कोई लंबा-चौड़ा उपदेश नहीं दिया, न ही कोई कठिन साधना बताई। उनका पूरा दर्शन तीन बेहद सरल शब्दों में सिमटा हुआ था—”सभी से प्रेम करो (Love everyone), सभी की सेवा करो (Serve everyone), और ईश्वर को याद रखो (Remember God)”। बाबा का यह व्यावहारिक ज्ञान आज के युवाओं को बहुत आसानी से समझ आता है और वे इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में उतार पा रहे हैं।
धन और करियर पर व्यावहारिक दृष्टिकोण
आज का युवा करियर और पैसे को लेकर काफी महत्वाकांक्षी है, लेकिन साथ ही वह उलझन में भी रहता है। बाबा के आर्थिक उपदेश इस पीढ़ी को बहुत प्रभावित करते हैं। बाबा कहते थे कि “पैसे की जमाखोरी मत करो, उसका एक हिस्सा समाज और गरीबों की भलाई में लगाओ, तो ईश्वर तुम्हारी तिजोरी कभी खाली नहीं होने देगा।” यह सीख युवाओं को केवल पैसा कमाना ही नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान बनना भी सिखाती है।

कैंची धाम में उमड़ रहा युवाओं का यह सैलाब इस बात का प्रमाण है कि भारत की युवा पीढ़ी भटकी हुई नहीं है [2608858-2026-08-04]। वे बस एक ऐसे मार्गदर्शक की तलाश में थे जो उनकी आधुनिक भाषा को समझ सके और उन्हें बिना किसी शर्त के स्वीकार कर सके। ‘कंबल वाले बाबा’ का दरबार आज के डिजिटल युवाओं के लिए एक ऐसा ‘डिजिटल डिटॉक्स’ केंद्र बन गया है, जहाँ नेटवर्क भले ही चला जाए, लेकिन सीधे ईश्वर से कनेक्शन जुड़ जाता है।


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