

सामूहिक विवाह भारतीय समाज की उस करुणा का प्रतीक है, जहाँ सामर्थ्यवान लोग असमर्थों के सपनों को अपना समझकर साकार करते हैं। रुद्रपुर की चर्चित सामाजिक संस्था “जिंदगी जिंदाबाद” पिछले कई वर्षों से निर्धन कन्याओं के विवाह का उत्तरदायित्व निभाती आ रही है। हर वर्ष दर्जनों बेटियाँ सम्मानपूर्वक गृहस्थी में प्रवेश करती हैं और समाज यह मानकर संतोष करता है कि किसी बेटी की आँखों में आँसू नहीं, बल्कि भरोसा है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
लेकिन इसी भरोसे के मंडप पर जब एक ऐसा तथ्य सामने आता है, जो न केवल चौंकाता है बल्कि झकझोरता भी है—तो सवाल उठना स्वाभाविक है। हालिया चर्चा के अनुसार, एक शादीशुदा जोड़े द्वारा पुनः जिंदगी जिंदाबाद के मंच पर विवाह संपन्न किया जाना, और वह भी दान-दहेज सहित—अब सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि समाज, संस्था और सहयोगियों के विवेक की परीक्षा बन गया है।
सवाल पहला: यह चूक कैसे हुई?
जिंदगी जिंदाबाद का दावा है कि विवाह आधार कार्ड, माता-पिता की सहमति और सत्यापन के बाद ही संपन्न कराए जाते हैं। फिर प्रश्न उठता है कि यदि प्रक्रिया इतनी सुदृढ़ है, तो एक पहले से विवाहित जोड़ा मंडप तक कैसे पहुँच गया?
क्या दस्तावेज़ों की जाँच औपचारिक थी?
क्या सामाजिक दबाव में आँखें मूँद ली गईं?
या फिर “भलाई करते-करते” शंका करने का साहस ही नहीं जुटाया गया?
यह सवाल इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सामूहिक विवाह दान और विश्वास से चलते हैं—और विश्वास में छोटी-सी दरार भी बड़ा नुकसान कर सकती है।
सवाल दूसरा: मंशा क्या थी—लालच या लालसा?
यहाँ दो संभावनाएँ सामने आती हैं, और दोनों ही समाज को सोचने पर मजबूर करती हैं।
पहली—दहेज और सामग्री के लालच में पुनर्विवाह।
यदि यह सच है, तो यह सामूहिक विवाह मंच का खुला दुरुपयोग है। यह उस “लुटेरी दुल्हन” प्रवृत्ति का विस्तार है, जहाँ विवाह सामाजिक संस्कार नहीं, बल्कि लाभ का सौदा बन जाता है।
दूसरी संभावना—अधूरे सपनों की पूर्ति।
हो सकता है कि पहली शादी साधारण रही हो, सामाजिक-आर्थिक सीमाओं में बँधी हो, और दूसरी बार भव्यता के माध्यम से वे सपने पूरे किए गए हों जो पहले संभव नहीं थे।
लेकिन प्रश्न यह है—क्या निर्धन कन्याओं के लिए बने मंच का उपयोग व्यक्तिगत “शो-ऑफ” के लिए किया जाना उचित है?
सहयोगियों की संवेदना को लगी ठेस
जिंदगी जिंदाबाद के हर आयोजन के पीछे व्यापारी, डॉक्टर, समाजसेवी, पत्रकार और आम नागरिकों का सहयोग होता है। कोई साड़ी देता है, कोई गृहस्थी का सामान, कोई नकद सहयोग।
अब कल्पना कीजिए—जब किसी सहयोगी को यह ज्ञात हो कि उसके दान से एक शादीशुदा जोड़े का पुनर्विवाह कराया गया, तो उसे कैसा लगेगा?
निश्चय ही यह भावनात्मक आघात है।
यह सहयोग की भावना को कमजोर करता है और भविष्य के दान पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
संस्था पर कटाक्ष, लेकिन उद्देश्य सुधार
यह संपादकीय जिंदगी जिंदाबाद के पूरे कार्य को नकारने का प्रयास नहीं है। संस्था ने वर्षों में जो सामाजिक पूँजी अर्जित की है, वह एक घटना से समाप्त नहीं होती।
लेकिन सवाल उठाना भी समाज का अधिकार है।
जब मंच सार्वजनिक है, सहयोग सार्वजनिक है, तो जवाबदेही भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
आज शहर में यह चर्चा है—
“क्या सामूहिक विवाह मंच अब अवसरवादी लोगों के लिए खुला हो गया है?”
“क्या गरीब कन्याओं के नाम पर कुछ लोग लाभ उठा रहे हैं?”
ये सवाल संस्था के लिए चेतावनी हैं, आरोप नहीं—बशर्ते संस्था इन्हें उसी भाव से ले।
मीडिया की भूमिका और हलचल
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स जैसी प्रतिष्ठित मीडिया में यह खबर आने के बाद यह स्वाभाविक है कि शहर में हलचल मचे।
मीडिया का काम ही यही है—सुविधा नहीं, सच्चाई दिखाना।
यदि ऐसी खबरों से संस्थाएँ असहज होती हैं, तो उसे “मीडिया का षड्यंत्र” कहना आसान है, लेकिन आत्ममंथन करना कठिन।
अब आगे क्या?
जिंदगी जिंदाबाद जैसी संस्थाओं को अब तीन ठोस कदम उठाने होंगे—
- सत्यापन प्रक्रिया को और कठोर बनाना—केवल दस्तावेज़ नहीं, सामाजिक जाँच भी।
- पारदर्शिता—यदि चूक हुई है, तो स्वीकार करना।
- स्पष्ट नियम—पुनर्विवाह, दिखावटी विवाह या पहले से विवाहित जोड़ों के लिए मंच बंद।
मंडप पवित्र रहे
सामूहिक विवाह केवल रस्म नहीं, सामाजिक विश्वास का यज्ञ है।
यदि उसमें स्वार्थ की आहुति पड़ने लगी, तो आंच सबको लगेगी—संस्था को भी, सहयोगियों को भी और समाज को भी।
जिंदगी जिंदाबाद के लिए यह समय आत्ममंथन का है, आत्मरक्षा का नहीं।
क्योंकि यदि आज सवालों का जवाब नहीं दिया गया, तो कल सहयोग का हाथ रुक सकता है।
और अंत में—
गरीब कन्याओं के नाम पर कोई भी “लुटेरी दुल्हन” या अवसरवादी जोड़ा यदि मंडप तक पहुँचा है, तो दोष केवल उसका नहीं, व्यवस्था का भी है।
अब देखना यह है कि जिंदगी जिंदाबाद इस कटाक्ष को सुधार में बदलती है—या इसे भी “सेवा के शोर” में दबा दिया जाता है।
उपरोक्त घटनाक्रम पिछले वर्ष से हुए शादी समारोह की है




