किच्छा/सिरौलीकलां। ऊधमसिंह नगर की किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव को लेकर मतदान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन मतगणना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक इंतजार लगातार बढ़ रहा है। 22 सितंबर को दोनों नगर पालिकाओं में मतदान हुआ था। मूल कार्यक्रम के अनुसार 24 सितंबर को मतगणना होनी थी, लेकिन चुनावी विवाद और हाई कोर्ट में चल रहे मामले के कारण मतगणना रोक दी गई।
हाई कोर्ट में क्या हुआ?
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले कोर्ट को बताया था कि 22 सितंबर को मतदान कराया जाएगा, लेकिन मतदान के बाद मतगणना को अग्रिम आदेश तक स्थगित कर दिया गया।
24 सितंबर को हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने मतगणना स्थगित करने वाली संशोधित अधिसूचना पर रोक लगा दी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब मतदान कराया जा चुका है तो मतगणना रोकने का आधार क्या है। कोर्ट के आदेश के बाद दोनों निकायों की मतगणना का रास्ता साफ हुआ और राज्य निर्वाचन आयोग को नई अधिसूचना जारी करनी थी। सरकार और निर्वाचन आयोग से दो सप्ताह में जवाब भी मांगा गया।
विवाद की असली जड़ क्या है?
पूरे विवाद की जड़ सिरौलीकलां को किच्छा नगर पालिका से अलग कर स्वतंत्र नगर पालिका बनाए जाने से जुड़ी है।
याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार की 2025 की अधिसूचनाओं और बाद में किच्छा तथा सिरौलीकलां में अलग-अलग चुनाव कराने की प्रक्रिया को चुनौती दी। उनका तर्क है कि सिरौलीकलां पहले किच्छा नगर पालिका का हिस्सा रहा है और उसे अलग निकाय के रूप में गठित करने की प्रक्रिया पर पहले से न्यायालय में विवाद चल रहा है।
याचिकाओं में उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश) नगर पालिका अधिनियम, 1916 की विभिन्न धाराओं, आरक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक पुनर्गठन से संबंधित प्रावधानों का भी हवाला दिया गया है। यह मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार मुख्य मामले में आगे की सुनवाई अक्टूबर में होनी है।
सिरौलीकलां में पहली बार पालिका चुनाव
सिरौलीकलां के लिए यह चुनाव विशेष महत्व रखता है। यहां पहली बार स्वतंत्र नगर पालिका के रूप में अध्यक्ष और सभासदों का चुनाव हुआ।
सिरौलीकलां में 11,591 मतदाता हैं। यहां चार मतदान केंद्र और 13 मतदान केंद्र/बूथ बनाए गए थे। अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस की राशिदा और निर्दलीय फरहीन जहां सहित उम्मीदवार मैदान में थे।
किच्छा में 52,240 मतदाताओं के लिए मतदान की व्यवस्था की गई थी। दोनों निकायों को मिलाकर करीब 63,831 मतदाता चुनाव प्रक्रिया में शामिल थे।
मतदान के दौरान किच्छा में हंगामा
22 सितंबर को मतदान के दौरान किच्छा में राजनीतिक विवाद भी सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार विधायक तिलकराज बेहड़ और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के समर्थकों के बीच विवाद की स्थिति बनी और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। बाद में दोनों नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
सिरौलीकलां में मतदान अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण बताया गया। दोनों क्षेत्रों में मतदान पूरा होने के बाद मतपेटियां सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाई गईं।
जिला प्रशासन की भूमिका
चुनाव से पहले जिला प्रशासन ने सुरक्षा और मतदान व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की थीं। जिलाधिकारी/जिला निर्वाचन अधिकारी नितिन सिंह भदौरिया के स्तर से मतदान केंद्रों पर बैरिकेडिंग, सीसीटीवी, प्रकाश, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की गई। पुलिस और पीएसी की तैनाती भी की गई थी।
किच्छा में 19 मतदान केंद्र और 56 बूथ तथा सिरौलीकलां में चार मतदान केंद्र और 13 बूथ बनाए गए थे।
जिला प्रशासन ने शांतिपूर्ण चुनाव के लिए दोनों निकायों की निर्धारित परिधि में शराब की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगाया था। मूल चुनाव कार्यक्रम में 24 सितंबर को मतगणना प्रस्तावित थी।
अब सबसे बड़ा सवाल—मतगणना कब?
24 सितंबर के हाई कोर्ट आदेश के बाद मतगणना पर लगी रोक हटने का रास्ता साफ हो चुका है, लेकिन 26 सितंबर तक नई मतगणना तिथि घोषित नहीं हुई थी।
किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ ने 26 सितंबर को आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार और निर्वाचन आयोग मतगणना की तारीख घोषित नहीं कर रहे हैं। उन्होंने जल्द तारीख घोषित नहीं होने पर हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने की चेतावनी दी है। यह उनका राजनीतिक आरोप/कानूनी कदम है, न कि न्यायालय द्वारा स्थापित तथ्य।
अब प्रशासन के सामने क्या जिम्मेदारी?
अब निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन पर हैं। आयोग को हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप नई मतगणना तिथि और विस्तृत कार्यक्रम स्पष्ट करना होगा। इसके बाद जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि स्ट्रांग रूम की सुरक्षा, मतपेटियों की निगरानी, मतगणना केंद्र की व्यवस्था, सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रत्याशियों/एजेंटों की उपस्थिति संबंधी व्यवस्था को पारदर्शी ढंग से सुनिश्चित करे।
किच्छा और सिरौलीकलां की जनता का सवाल सीधा है—जब मतदान हो चुका है और हाई कोर्ट ने मतगणना पर लगाई गई रोक हटा दी है, तो मतगणना की तारीख घोषित होने में देरी क्यों?
अब मतदाताओं और प्रत्याशियों की निगाह राज्य निर्वाचन आयोग की अगली अधिसूचना पर टिकी है।
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किच्छा-सिरौलीकलां मतगणना में देरी क्यों?
हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी तारीख का इंतजार, प्रशासन और निर्वाचन आयोग से 10 सीधे सवाल
किच्छा। किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका चुनाव में 22 सितंबर को मतदान हो चुका है। मतदाताओं ने अपना फैसला मतपेटियों में बंद कर दिया, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल मतगणना को लेकर है। हाई कोर्ट के 24 सितंबर के आदेश के बाद मतगणना पर लगी रोक से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद मतगणना की तारीख को लेकर इंतजार क्यों है?
पहला सवाल: जब मतदान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हो चुका है तो मतगणना की नई तारीख घोषित करने में देरी क्यों?
दूसरा सवाल: मतपेटियां/चुनाव सामग्री किस स्ट्रांग रूम में रखी गई है और उसकी 24 घंटे सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
तीसरा सवाल: स्ट्रांग रूम की निगरानी के लिए सीसीटीवी व्यवस्था लगातार चालू है या नहीं?
चौथा सवाल: प्रत्याशियों और उनके एजेंटों को स्ट्रांग रूम की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी नियमित रूप से क्यों नहीं दी जा रही?
पांचवां सवाल: हाई कोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने मतगणना को लेकर अब तक क्या औपचारिक कार्रवाई की?
छठा सवाल: क्या जिला प्रशासन को मतगणना कराने के संबंध में आयोग से कोई लिखित निर्देश प्राप्त हुआ है?
सातवां सवाल: यदि निर्देश प्राप्त हो चुके हैं तो मतगणना की तारीख सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
आठवां सवाल: किच्छा और सिरौलीकलां के चुनाव से जुड़े न्यायालयीन मामले की अगली सुनवाई तक चुनाव प्रक्रिया की स्थिति क्या रहेगी?
नौवां सवाल: क्या मतगणना में देरी से प्रत्याशियों और मतदाताओं के बीच अनिश्चितता बढ़ने की स्थिति को प्रशासन गंभीरता से देख रहा है?
दसवां और सबसे बड़ा सवाल: जब हजारों मतदाताओं ने अपना जनादेश दे दिया है तो उस जनादेश को सार्वजनिक करने की समयबद्ध व्यवस्था आखिर कब होगी?
जनता और प्रत्याशियों को अब स्पष्ट तारीख, स्पष्ट आदेश और पारदर्शी प्रक्रिया की जानकारी चाहिए। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्यायालय के आदेशों का अनुपालन ही इस पूरे मामले में विश्वास बनाए रखने का आधार होगा।
