उत्तराखंड पर आसमानी आफत: पहाड़ से मैदान तक भारी बारिश का अलर्ट, नेपाल की जलप्रलय ने बढ़ाई चिंताहिमालय पर मंडरा रहा दोहरा खतरा: नेपाल में तबाही के बाद उत्तराखंड की नदियां उफान पर, कई जिलों में अलर्ट

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उत्तराखंड पर मानसून की मार, पहाड़ से मैदान तक बढ़ा खतरा; नेपाल की जलप्रलय ने बढ़ाई चिंता

देहरादून/हल्द्वानी/रुद्रप्रयाग/बागेश्वर/रुद्रपुर। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर रौद्र रूप में दिखाई दे रहा है। राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 31 अगस्त को प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। देहरादून, बागेश्वर, चमोली और नैनीताल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चम्पावत और ऊधम सिंह नगर सहित कई जिलों में भारी बारिश, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली को लेकर चेतावनी जारी की गई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

लगातार बारिश के कारण नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में जलभराव और खेतों में पानी भरने की समस्या सामने आ रही है। मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए शासन-प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

देहरादून और बागेश्वर में एहतियात के तौर पर 31 अगस्त को कक्षा 12 तक के सभी सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रियल टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है।

देहरादून में लगातार बारिश, स्कूल बंद

राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कई घंटों से बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम केंद्र ने गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना जताई है। लगातार बारिश के कारण शहर के निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। रिस्पना और बिंदाल नदियों में पानी का बहाव तेज हुआ है।

हालात को देखते हुए जिलाधिकारी ने कक्षा 12 तक के सभी शासकीय और गैर-शासकीय स्कूलों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

बागेश्वर में सरयू का जलस्तर बढ़ा, बिजली आपूर्ति प्रभावित

बागेश्वर जिले में भी भारी बारिश का असर दिखाई दे रहा है। कपकोट के बघर क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। जिले में आकाशीय बिजली गिरने से कई ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने की सूचना है, जिसके कारण अनेक क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई।

मौसम के गंभीर रुख को देखते हुए जिले में कक्षा 12 तक के स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने का निर्णय लिया गया। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।

केदारघाटी में बारिश, सोनप्रयाग में उफनते नाले बने चुनौती

रुद्रप्रयाग जिले की केदारघाटी में भी लगातार बारिश हो रही है। केदारनाथ धाम में खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह दिखाई दे रहा है। हालांकि सोनप्रयाग क्षेत्र में भारी बारिश के कारण बरसाती नाले उफान पर हैं। कई स्थानों पर सड़क पर मलबा और पानी आने से आवागमन प्रभावित होने की स्थिति बनी है।

यात्रा मार्ग पर प्रशासन और संबंधित विभागों को सतर्क रखा गया है। संवेदनशील स्थानों पर मौसम और सड़क की स्थिति की निगरानी की जा रही है।

चमोली में भूस्खलन का खतरा

चमोली जिले में बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य पहाड़ी संपर्क मार्गों पर भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। बारिश के दौरान पहाड़ों से मलबा आने की घटनाओं को देखते हुए जेसीबी और अन्य मशीनरी को तैनात रखा गया है ताकि मार्ग बाधित होने की स्थिति में जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके।

चमोली की मौजूदा स्थिति ने वर्ष 2021 की ऋषिगंगा-धौलीगंगा आपदा की याद भी ताजा कर दी है। विशेषज्ञ लंबे समय से हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान, ग्लेशियरों में बदलाव और अनियोजित मानवीय गतिविधियों को लेकर चेतावनी देते रहे हैं।

नैनीताल में गौला का जलस्तर बढ़ा

नैनीताल जिले में भी लगातार बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। गौला नदी में तेज बहाव के कारण कई स्थानों पर कटाव की स्थिति सामने आई है। नदी किनारे रहने वाली बस्तियों में प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क किया गया है।

प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और अचानक बढ़ते जलस्तर की स्थिति में तत्काल ऊंचे स्थानों की ओर जाने की अपील की है।

तराई में जलभराव की चुनौती

ऊधम सिंह नगर और हरिद्वार सहित मैदानी जिलों में भी बारिश का प्रभाव दिखाई दे रहा है। कई क्षेत्रों में जलभराव के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ी है।

ऊधम सिंह नगर में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन को जलभराव वाले क्षेत्रों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों और नालों के जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए तटीय इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

अगले 48 से 72 घंटे अहम

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार प्रदेश में अगले 48 से 72 घंटों के दौरान मानसूनी गतिविधियां सक्रिय रह सकती हैं। एक सितंबर को देहरादून और टिहरी में बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके बाद भी सितंबर के शुरुआती दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुककर मध्यम से भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

इस स्थिति में भूस्खलन, सड़क बाधित होने, नदी-नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव जैसी परिस्थितियों से निपटना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहेगा।

नेपाल की आपदा ने हिमालयी क्षेत्र की चिंता बढ़ाई

उत्तराखंड में भारी बारिश के बीच पड़ोसी नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने पूरे हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या 780 से अधिक बताई जा रही है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में भारतीय नागरिकों की संख्या भी बताई जा रही है।

नेपाल में हुई इस त्रासदी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हिमालयी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे तापमान, ग्लेशियरों में बदलाव और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव का आने वाले समय में क्या प्रभाव पड़ेगा।

भोटेकोशी नदी के जलस्तर में फिर वृद्धि की सूचना ने भी चिंता बढ़ाई है। संभावित बाढ़ को लेकर संबंधित क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल से निकलने वाली नदियों का प्रभाव भारत के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच सकता है।

हिमालय से मैदान तक नदी तंत्र पर नजर

नेपाल की त्रिशूली नदी का पानी नारायणी नदी के रास्ते गंडक नदी तंत्र में पहुंचता है। वाल्मीकि नगर गंडक बैराज से पानी का डिस्चार्ज बढ़ने की स्थिति में उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। महाराजगंज सहित कई क्षेत्रों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई है।

इस पूरी स्थिति ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि हिमालयी नदियों का प्रभाव केवल पर्वतीय राज्यों तक सीमित नहीं रहता। नेपाल, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के नदी तंत्र एक-दूसरे से जुड़े हैं। ऐसे में किसी बड़े जलप्रवाह का असर कई राज्यों तक पहुंच सकता है।

ग्लेशियरों में बदलाव चिंता का विषय

भीलगंगा घाटी के खतलिंग ग्लेशियर के पीछे खिसकने की जानकारी भी हिमालयी पर्यावरण को लेकर गंभीर सवाल उठाती है। ग्लेशियरों के सिकुड़ने और पीछे हटने की प्रक्रिया जलवायु परिवर्तन से जुड़ी बड़ी चिंता मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार ग्लेशियरों में बदलाव का असर भविष्य में जल उपलब्धता, नदियों के प्रवाह और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाओं पर पड़ सकता है।

नेपाल की आपदा में हिमस्खलन और ग्लेशियर टूटने की भूमिका

काठमांडू स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर डिजास्टर स्टडीज के निदेशक बसंत राज अधिकारी के अनुसार नेपाल की हालिया आपदा में बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के पहाड़ से नीचे गिरने, नदी तक पहुंचने और उसके बाद विशाल जलप्रवाह बनने की प्रक्रिया सामने आई है।

उन्होंने इस घटना की तुलना उत्तराखंड के चमोली में वर्ष 2021 में हुई आपदा से की। चमोली में रोंटी पीक क्षेत्र से विशाल मात्रा में चट्टान और बर्फ नीचे गिरी थी, जिसके बाद ऋषिगंगा और धौलीगंगा घाटियों में विनाशकारी मलबा और पानी का प्रवाह आया था।

विशेषज्ञों के अनुसार इतनी बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टान के अचानक नीचे आने से अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न हो सकती है। नेपाल की घटना को लेकर वैज्ञानिकों ने इसके प्रभाव की तुलना बड़े विस्फोटों से पैदा होने वाली ऊर्जा के स्तर से की है।

काठमांडू विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग से जुड़े विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि प्रभावित क्षेत्र में अत्यधिक बारिश की स्थिति प्रमुख कारण के रूप में सामने नहीं आई थी, जबकि पहाड़ों में तापमान अपेक्षाकृत अधिक था। तापमान बढ़ने से बर्फ तेजी से पिघल सकती है और ग्लेशियर की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार लांगटांग घाटी में लिरुंग चोटी की उत्तरी ढलान पर ग्लेशियर के लटकते हिस्से के टूटने से बाढ़ की शुरुआत हुई। टूटे हुए हिस्से के लगभग 1,400 मीटर की ऊंचाई से नीचे गिरने की बात सामने आई है।

अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के भूकंपीय उपकरणों ने भी इस घटना के दौरान जमीन में हलचल दर्ज की। शुरुआती स्तर पर इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया, बाद के विश्लेषण में ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद हुए मलबे के प्रवाह से इसका संबंध सामने आने की बात कही गई।

ईवी की बढ़ती संख्या बदलेगी उत्तराखंड की बिजली मांग

एक ओर राज्य मानसून, बाढ़ और आपदा की चुनौती से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों का स्वरूप भी तेजी से बदलने की तैयारी है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता-2027 मानकों में वाहनों की औसत ईंधन खपत घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर दिया गया है।

प्रस्तावित व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2027-28 से 2031-32 तक लागू करने की योजना से जुड़ी है। इसके तहत वाहन कंपनियों की बिक्री, औसत ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन का आकलन किया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों को क्रेडिट और निर्धारित मानकों से पीछे रहने वाली कंपनियों को डेबिट का प्रावधान प्रस्तावित है।

बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन और रेंज एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहनों को सुपर क्रेडिट देने का प्रस्ताव है। इसका सीधा असर इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और बिक्री पर पड़ सकता है।

उत्तराखंड में वर्तमान में लगभग 1,02,702 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत बताए गए हैं। वर्ष 2025-26 में 21,272 नए ईवी पंजीकरण हुए। मौजूदा समय में ईवी चार्जिंग के लिए करीब 15.7 लाख यूनिट बिजली की खपत बताई गई है। अनुमान है कि 2028-29 तक यह खपत बढ़कर करीब 234.8 लाख यूनिट तक पहुंच सकती है।

ऊर्जा विभाग के अनुसार राज्य में ईवी चार्जिंग स्टेशनों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए तंत्र विकसित करने पर काम चल रहा है। इससे आने वाले वर्षों में परिवहन क्षेत्र बिजली का एक महत्वपूर्ण नया उपभोक्ता बन सकता है।

प्रधानमंत्री के जन्मदिन से सेवा संकल्प अभियान

प्राकृतिक आपदा और विकास से जुड़ी खबरों के बीच प्रदेश भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से शुरू होने वाले सेवा संकल्प अभियान को घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। रविवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में अभियान की रूपरेखा पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के साथ सेवा कार्यों को भी आगे बढ़ाया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के जन्मदिन को सेवा कार्यक्रमों के माध्यम से मनाने को उन्होंने सार्थक पहल बताया।

अभियान के क्षेत्रीय संयोजक कुलदीप चहल ने कार्यकर्ताओं से घर-घर पहुंचकर कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सेवा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया जा सकता है। कार्यशाला में उत्तराखंड में भाजपा की आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर भी कार्यकर्ताओं को सक्रिय रहने का संदेश दिया गया।

हल्द्वानी में शुद्धिकरण विवाद ने लिया कानूनी मोड़

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद अब कानूनी स्तर तक पहुंच गया है। श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दी गई तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज किया है।

तहरीर देने वालों में विनोद आर्य और अमित कुमार शामिल बताए गए हैं। न्यास के सदस्य विनोद आर्य ने कहा कि रामलीला मैदान में किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाकर कार्यक्रम नहीं किया गया था। उनके अनुसार यह भगवान राम के दरबार की साफ-सफाई और शुद्धिकरण से जुड़ा कार्यक्रम था।

मामले में शिकायतकर्ताओं की ओर से अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता से संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी है।

उधर, कांग्रेस ने इस घटना के विरोध में रविवार शाम रामलीला मैदान में मौन प्रदर्शन किया। बारिश के बावजूद कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए और घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

इस घटनाक्रम ने हल्द्वानी में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात सार्वजनिक रूप से रख रहे हैं और अब पुलिस जांच के परिणाम पर निगाहें टिकी हैं।

देहरादून में छात्र की पिटाई का वीडियो वायरल

राजधानी देहरादून में छात्र की पिटाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। वायरल वीडियो में कुछ युवक कार के भीतर एक छात्र से सवाल पूछते और उसके जवाब नहीं देने पर उसे थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि युवक छात्र से विभिन्न शॉर्ट फॉर्म की फुलफॉर्म पूछ रहे थे। जवाब देने में असमर्थ रहने पर उसकी पिटाई की गई। वीडियो में छात्र को कई बार थप्पड़ मारे जाने की बात सामने आई है। कुछ सवालों के सही जवाब देने के बाद भी उसके साथ मारपीट किए जाने का दावा किया जा रहा है।

वीडियो के दूसरे हिस्से में एक युवक छात्र को सॉस खाने के लिए देता दिखाई देता है। छात्र इसके लिए मना करते हुए एकादशी व्रत होने की बात कहता है। इसके बाद युवक उससे व्रत के बारे में सवाल करते हैं और कथित तौर पर इंटरनेट पर जानकारी तलाशते हैं। इसके बाद बातचीत फिर विवाद में बदलती दिखाई देती है।

घटना को रैगिंग से भी जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रेमनगर थाना पुलिस के अनुसार घटना को लेकर अभी औपचारिक शिकायत प्राप्त होने की बात सामने नहीं आई थी, हालांकि वायरल वीडियो के आधार पर जानकारी जुटाई जा रही है।

एक अन्य वीडियो में दोनों पक्ष घटना को पुराना बताते हुए समझौते की बात करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस की जांच के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

हिमालयी संकट ने बढ़ाई जिम्मेदारी

उत्तराखंड में भारी बारिश, नेपाल में ग्लेशियर से जुड़ी आपदा, नदियों के बढ़ते जलस्तर, भूस्खलन और तापमान में बदलाव की घटनाएं एक व्यापक हिमालयी चुनौती की ओर संकेत करती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, जलविद्युत, पर्यटन और निर्माण गतिविधियों के विस्तार के साथ प्राकृतिक संवेदनशीलता को समझना भी उतना ही जरूरी है।

वर्तमान परिस्थितियों में प्रशासन के सामने तत्काल चुनौती लोगों की सुरक्षा, सड़क संपर्क बनाए रखना, नदी किनारे बसे इलाकों की निगरानी और आपदा की स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाने की है। दीर्घकालिक स्तर पर ग्लेशियरों, नदी घाटियों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और बदलते मौसम की वैज्ञानिक निगरानी को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

उत्तराखंड की मौजूदा स्थिति यह संदेश दे रही है कि मानसून की हर तेज बारिश को केवल मौसम की घटना मानकर आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं है। हिमालय की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और विकास की नीतियों के बीच बेहतर संतुलन बनाना आने वाले समय की बड़ी जरूरत है।


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