2 अक्टूबर को काला दिवस मनाएंगे राज्य आंदोलनकारी: डॉ विजेंद्र पोखरियाल–केंद्रीय अभियान समिति अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट

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2 अक्टूबर को काला दिवस मनाएंगे राज्य आंदोलनकारी: विजेंद्र पोखरियाल–अवतार सिंह बिष्ट
उत्तरकाशी। चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों की लंबित मांगों पर शासन-प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई न होने के आरोपों के बीच आंदोलनकारियों ने एक बार फिर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। उत्तरकाशी में जिलाधिकारी कार्यालय पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने कहा कि पूर्व में दिए गए 10 दिवसीय अल्टीमेटम के बावजूद ठोस निर्णय नहीं होने से उनमें नाराजगी है। अब शासन-प्रशासन को छह दिन का नया समय दिया गया है। आंदोलनकारियों के अनुसार, इस अवधि में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो 2 अक्टूबर को काला दिवस मनाया जाएगा।
केंद्रीय अभियान समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तरकाशी के आंदोलनकारियों द्वारा उठाए गए सवाल केवल एक जिले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य आंदोलनकारियों से जुड़े कई पुराने मुद्दों से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर के कार्यक्रम में राज्य आंदोलनकारी काली पट्टी बांधकर अपनी मांगों और प्रदेश से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर धरना-प्रदर्शन करेंगे तथा उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
बिष्ट ने कहा कि आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में कोर्ट से बरी होने के बाद डॉ. विजेंद्र सिंह पोखरियाल की रोकी गई पेंशन की बहाली, राज्य आंदोलनकारियों को ₹30 हजार मासिक सम्मान पेंशन, लंबित चिन्हिकरण आवेदनों का निस्तारण, राज्य आंदोलनकारियों को उचित सम्मान एवं अधिकार दिए जाने जैसे विषय शामिल हैं। इसके साथ ही आंदोलनकारी मूल निवास 1950, सशक्त भू-कानून और उत्तराखंड की स्थायी राजधानी जैसे मुद्दों को भी आंदोलन के एजेंडे में प्रमुखता से उठा रहे हैं।
उत्तरकाशी में हुए धरने में डॉ. विजेंद्र सिंह पोखरियाल ने कहा कि आंदोलनकारियों को लगातार आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई अब तक सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि यदि छह दिन की नई समयसीमा में सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है तो 2 अक्टूबर को व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
केंद्रीय अभियान समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट ने प्रदेश के विभिन्न जिलों के राज्य आंदोलनकारियों से 2 अक्टूबर के कार्यक्रम में अपने-अपने स्तर पर भागीदारी करने की अपील की। प्रस्तावित कार्यक्रम में काली पट्टी बांधकर अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन, राज्य आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि और लंबित मांगों को लेकर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की बात कही गई है।
आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराधों और चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड सहित कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी अपने प्रस्तावित आंदोलन में उठाने की बात कही है। इसके अलावा प्रदेश में कथित भू-माफिया और नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई, युवाओं के हितों की रक्षा तथा राज्य निर्माण की मूल अवधारणाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य जिन उद्देश्यों और जनभावनाओं के आधार पर बनाया गया था, उन उद्देश्यों पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। स्थायी राजधानी, मूल निवास और सशक्त भू-कानून जैसे विषय लंबे समय से सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि राज्य निर्माण आंदोलनकारियों की मांगों को लेकर उन्हें कई बार आश्वासन मिले, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ।
अवतार सिंह बिष्ट ने कहा कि अब आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर का कार्यक्रम प्रदेशभर में आंदोलनकारियों के बीच एकजुटता और लंबित मांगों को फिर से प्रमुखता से उठाने का अवसर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन का अगला स्वरूप शासन-प्रशासन की छह दिन की अवधि में होने वाली कार्रवाई के आधार पर तय किया जाएगा।
उत्तरकाशी में हुए धरने में चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति उत्तराखंड के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र पोखरियाल, जिलाध्यक्ष विजय बहादुर रावत, रवांई-यमुना घाटी अध्यक्ष पृथ्वीराज कपूर, जिला कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंह रावत और विशन सिंह कुंजन सहित बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद रहे।
धरने में चतर सिंह राणा, मूलचंद सिंह पंवार, तेग सिंह राणा, खुशहाल सिंह बिष्ट, लखीराम नौटियाल, विजेंद्र सिंह राठौर, कन्हैया सिंह रावत, विजयपाल सिंह, चैन सिंह पंवार, प्रमोद सिंह रावत, रविंद्र प्रसाद भट्ट, कुलदीप कलूड़ा, अरविंद बुटोला, यूकेडी नेता घनश्याम प्रसाद बहुगुणा, भरता देवी, सुनील गुसाईं, जयेंद्र पाल सिंह नेगी, सुबेंद्र सिंह, हरीश सिंह गुसाईं, हरिपाल लाल, सुरेंद्र सिंह पंवार, शिवानंद, गोबर सिंह, मायाराम कंडियाल, मुंशी देवी, सोना देवी, चंद्रा देवी, चरण सिंह पंवार, धर्म नंद नौटियाल, राम लाल, प्रताप सिंह चौहान और मोर सिंह रावत सहित अन्य आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
आंदोलनकारियों ने कहा कि छह दिन की अवधि में सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ तो 2 अक्टूबर को काला दिवस मनाने के साथ आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति तय की जाएगी। समिति की ओर से मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष/उपाध्यक्ष, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी मांगों और प्रस्तावित कार्यक्रम की जानकारी भेजी गई है।
केंद्रीय अभियान समिति के अध्यक्ष अवतार सिंह बिष्ट का संदेश:
राज्य आंदोलनकारियों की मांगों, शहीदों के सम्मान, मूल निवास, भू-कानून, स्थायी राजधानी और उत्तराखंड की मूल अवधारणा से जुड़े मुद्दों को लेकर 2 अक्टूबर के कार्यक्रम में प्रदेशभर के आंदोलनकारियों की भागीदारी का आह्वान किया गया है। आंदोलनकारियों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य अपनी लंबित मांगों को लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से शासन के समक्ष रखना है।


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