

रुद्रपुर, 30 जनवरी 2026भारतीय रिज़र्व बैंक, देहरादून द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार को होटल सोनिया, रुद्रपुर में आयोजित की गई। टाउनहॉल मीटिंग के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के लगभग 150 उद्यमियों ने प्रतिभाग किया। बैठक की अध्यक्षता भारतीय रिज़र्व बैंक, देहरादून के क्षेत्रीय निदेशक अरविंद कुमार ने की।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय निदेशक अरविंद कुमार ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और जनपद उधम सिंह नगर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विकास की व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म उद्यम किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं और रोजगार सृजन में इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्यमियों से इस मंच का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया तथा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एमएसएमई सेक्टर के लिए उठाए गए नए कदमों और हालिया पहलों की जानकारी भी साझा की।
बैठक के दौरान उद्यमियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए गए और उनकी विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान करने का प्रयास किया गया।
इस अवसर पर नैनीताल बैंक के सीएमडी सुशील कुमार लाल, भारतीय रिज़र्व बैंक के सहायक महाप्रबंधक परमदीप सिंह, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एवं पंजाब नेशनल बैंक के उपमहाप्रबंधक, साथ ही उधम सिंह नगर के जिला अग्रणी प्रबंधक चिराग पटेल, महाप्रबंधक उद्योग विपिन कुमार, जेम (GeM) पोर्टल के प्रतिनिधि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
हालांकि, मंच पर उद्यमिता के विकास और सहयोग की बातें गूंजती रहीं, लेकिन बैठक के बाहर जमीन पर जूझ रहे लघु व सूक्ष्म उद्यमियों की पीड़ा भी उतनी ही मुखर होकर सामने आई। शिवसेना कुमाऊँ मंडल प्रभारी दर्शन भट्ट ने इस पूरे आयोजन पर तीखा सवाल उठाते हुए व्यंग्यात्मक कटाक्ष किया।
पुरन चंद भट्ट ने कहा, “जब कोई लघु या सूक्ष्म उद्योग लगाने के लिए फाइल बनाकर दफ्तरों के चक्कर लगाता है, तो उसे सिर्फ तारीखें और आश्वासन मिलते हैं। तीन-तीन साल बीत जाते हैं, लेकिन न तो फाइल आगे बढ़ती है और न ही किसी अधिकारी के पास सुनवाई का समय होता है। सेमिनारों में रोजगार देने की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन जो वास्तव में उद्योग लगाना चाहता है, उसके तलवे घिस जाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार और बैंकिंग संस्थानों द्वारा आयोजित अधिकांश सेमिनारों की जानकारी आम उद्यमियों तक पहुंचती ही नहीं। “हमें तो ऐसे कार्यक्रमों का पता भी समाचार माध्यमों से चलता है। अब इस सेमिनार में कौन लोग बुलाए गए और कौन छूट गए, यह आयोजन समिति ही जाने। सवाल यह है कि जिन लोगों को वास्तव में मार्गदर्शन और सहयोग की जरूरत है, वे इन मंचों से बाहर क्यों रह जाते हैं?”
पुरन चंद भट्ट ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “टाउनहॉल मीटिंग में एयरकंडीशन कमरों में बैठकर योजनाओं की चर्चा करना आसान है, लेकिन बाहर खड़े उस उद्यमी की कोई सुनता नहीं, जो बैंक से लोन, उद्योग विभाग से एनओसी और बिजली-पानी के कनेक्शन के लिए वर्षों से भटक रहा है। अगर यही हाल रहा तो सेमिनार रोजगार का नहीं, सिर्फ भाषणों का उद्योग बनकर रह जाएंगे।”
उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसे आयोजनों की सूचना समय पर सार्वजनिक की जाए, वास्तविक लघु व सूक्ष्म उद्यमियों को आमंत्रित किया जाए और बैठकों में उठे सवालों का फॉलो-अप भी तय समय सीमा में किया जाए, ताकि मंच की बातें फाइलों तक सीमित न रहकर जमीन पर भी दिखाई दें।
कुल मिलाकर, होटल के हॉल में विकास के सपने दिखाए गए, लेकिन बाहर खड़े कई उद्यमियों की आंखों में अब भी वही पुराना सवाल तैरता रहा—“सेमिनार के बाद हमारा काम कब चलेगा?”
कुमाऊँ मंडल शिवसेना प्रमुख पुरानचंद भट्ट ने उत्तराखंड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सुगमता परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि MSME एक्ट 2006 का मूल उद्देश्य लघु उद्यमियों को समय पर भुगतान दिलाना था, लेकिन आज वही परिषद उद्यमियों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है। कानून में स्पष्ट है कि 45 दिन में भुगतान न होने पर परिषद चार माह के भीतर फैसला करेगी, परंतु उत्तराखंड में मामले 2 से 3 साल तक लटके पड़े हैं, जो सीधे-सीधे कानून और न्याय दोनों का मज़ाक है।
भट्ट ने कहा कि परिषद की कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी सरकार ने समय रहते पुनर्गठन नहीं किया, जिससे सैकड़ों उद्यमी आर्थिक संकट में फँस गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि परिषद का तत्काल पुनर्गठन किया जाए और लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा हो, अन्यथा शिवसेना आंदोलन के लिए बाध्य होगी।





