पौड़ी में 77वां गणतंत्र दिवस: हिमालयी चेतना, राज्य सरोकार और उत्तराखंड के भविष्य पर गंभीर मंथन

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पौड़ी (उत्तराखंड)।देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर पौड़ी जनपद में इस वर्ष का आयोजन केवल औपचारिक झंडारोहण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कार्यक्रम उत्तराखंड की आत्मा, उसकी पीड़ा, उसके संघर्ष और उसके भविष्य को लेकर एक गंभीर वैचारिक मंच के रूप में उभरा। गणतंत्र दिवस के इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार, संपादक एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन से जुड़े अवतार सिंह बिष्ट द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का विधिवत झंडारोहण किया गया, जिसके साथ ही पूरे परिसर में राष्ट्रगान की गूंज सुनाई दी और वातावरण देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया।


इस अवसर पर हिमालय क्रांति पार्टी के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सरोकारों पर केंद्रित एक गोष्ठी एवं विचार-विमर्श सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें समाजसेवी, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, राज्य आंदोलनकारी, सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

मनोज जुयाल फिल्म डायरेक्टर उत्तराखंड
लक्ष्मण सिंह रावत, राष्ट्रीय संगठन सचिव


गणतंत्र दिवस: केवल उत्सव नहीं, आत्ममंथन का दिन
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गान के साथ हुआ। ध्वज फहराने के उपरांत अपने संबोधन में मुख्य अतिथि अवतार सिंह बिष्ट ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक सरकारी पर्व नहीं है, बल्कि यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि संविधान की आत्मा जनता में बसती है।
उन्होंने कहा—
“उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक राज्य नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सभ्यता, संघर्षशील समाज और हिमालयी चेतना का नाम है। जब हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं, तो हमें यह भी पूछना चाहिए कि क्या उत्तराखंड के मूल निवासियों को संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार वास्तव में मिल पा रहे हैं?”
उन्होंने राज्य निर्माण के 25 वर्षों के अनुभवों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस सपने के साथ उत्तराखंड बना था—रोजगार, पलायन-मुक्त पहाड़, सशक्त ग्राम व्यवस्था और सांस्कृतिक संरक्षण—वह सपना आज भी अधूरा है।
हिमालय क्रांति पार्टी का स्पष्ट संदेश
कार्यक्रम में हिमालय क्रांति पार्टी के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पार्टी का उद्देश्य सत्ता की राजनीति से अधिक राज्य के मूल प्रश्नों को सामने लाना है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड में—
तेजी से हो रहा पलायन,
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का अभाव,
शिक्षा और स्वास्थ्य की बदहाल स्थिति,
जल, जंगल और जमीन पर बाहरी नियंत्रण,
तथा राज्य आंदोलन की मूल भावना से लगातार समझौता
ये सभी विषय आज भी जस के तस बने हुए हैं।
गोष्ठी में उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों पर खुली चर्चा
गणतंत्र दिवस के इस आयोजन को औपचारिकता से आगे ले जाते हुए उत्तराखंड राज्य के संदर्भ में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें उपस्थित वक्ताओं ने खुलकर अपने विचार रखे।
अनिल जोशी (विशेष अतिथि)
उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओ ने कहा कि उत्तराखंड के गांव आज भी नीति-निर्माताओं की प्राथमिकता में नहीं हैं।
उन्होंने कहा—
“जब तक गांव में सम्मानजनक जीवन और रोजगार नहीं होगा, तब तक गणतंत्र की असली भावना अधूरी रहेगी।”
वक्ताओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ
गोष्ठी में अनेक वक्ताओं ने उत्तराखंड के वर्तमान हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त की—
दिनेश बिष्ट (महासचिव, संचालन) ने कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए कहा कि हिमालयी समाज को अब केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि नीतिगत लड़ाई लड़नी होगी।
लाल सिंह बिष्ट, पौड़ी जिला उपाध्यक्ष रविन्द्र जुयाल, शंकर दत्त, कन्हैया लाल डबरियल, शिवानंद नौटियाल ने राज्य आंदोलन की स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि किस हुए प्रकार जनआंदोलन की ऊर्जा को सत्ता ने धीरे-धीरे कमजोर किया।

रेखा बालोनी गीतों के माध्यम से उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों सांस्कृतिक धरोहर को गीतों के माध्यम से उठाती एक महिला

ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद सभा को संबोधित करने वाले प्रमुख वक्ता
अजय बिष्ट — अध्यक्ष, हिमालय क्रांति पार्टी

अवतार सिंह विष्ट — मुख्य अतिथि, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी व संपादक हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स

दिनेश बिष्ट — संचालनकर्ता
लाल सिंह बिष्ट — महासचिव

सहित अन्य वक्ताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन और प्रशासनिक उदासीनता जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
ग्रामीणों की भागीदारी: असली गणतंत्र की तस्वीर
इस आयोजन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता रही ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी।
ग्रामीणों ने खुलकर कहा कि योजनाएं कागजों पर तो बनती हैं, लेकिन जमीन पर उनका असर दिखाई नहीं देता।
कई ग्रामीणों ने कहा कि—
सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है,
स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर नहीं हैं,
और युवाओं को रोजगार के लिए मैदानों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।
उत्तराखंड और संविधान: सवाल भी, संकल्प भी
गोष्ठी के दौरान यह प्रश्न बार-बार उठता रहा कि क्या उत्तराखंड में संविधान की मूल भावना—समान अवसर, सामाजिक न्याय और विकेंद्रीकरण—वास्तव में लागू हो पा रही है?
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि—
राज्य आंदोलनकारियों की उपेक्षा,
नीति-निर्माण में स्थानीय समाज की अनदेखी,
और बाहरी पूंजी के दबाव में लिए गए फैसले
गणतंत्र की आत्मा को कमजोर कर रहे हैं।
गणतंत्र दिवस और उत्तराखंड का भविष्य
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि गणतंत्र दिवस केवल झंडारोहण और परेड का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और पुनर्संकल्प का अवसर है।
मुख्य अतिथि अवतार सिंह बिष्ट ने अपने समापन वक्तव्य में कहा—
“यदि हमें वास्तव में गणतंत्र को मजबूत करना है, तो उत्तराखंड जैसे राज्यों की पीड़ा को समझना होगा। जब तक पहाड़ का युवा सुरक्षित नहीं, तब तक राष्ट्र की प्रगति अधूरी है।”

26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर पौड़ी मुख्यालय में पार्टी द्वारा वर्ष 2026 के कैलेंडर का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर संगठन के उत्कृष्ट एवं समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान पत्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने संविधान, लोकतंत्र और उत्तराखंड हित में संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई तथा कार्यकर्ताओं के योगदान की सराहना की।


एक सार्थक आयोजन
पौड़ी जनपद में आयोजित यह गणतंत्र दिवस समारोह इस बात का उदाहरण बना कि कैसे राष्ट्रीय पर्वों को स्थानीय सरोकारों, विचार विमर्श और जनभागीदारी से जोड़ा जा सकता है।
यह आयोजन न केवल राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा, बल्कि उत्तराखंड के भविष्य को लेकर एक सजग चेतावनी और सकारात्मक संवाद का मंच भी बना।
77वें गणतंत्र दिवस पर पौड़ी से उठी यह आवाज साफ संकेत देती है कि उत्तराखंड का समाज अब केवल प्रतीकों से नहीं, बल्कि ठोस नीति और ईमानदार नेतृत्व से अपने गणतंत्र को मजबूत देखना चाहता है।

हिमालय क्रांति पार्टी  द्वारा कार्यक्रम/आयोजन में प्रमुख रूप से अजय बिष्ट (केंद्रीय अध्यक्ष) कार्यक्रम के  मुख्य अतिथि अवतार सिंह विष्ट, संपादक हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स,

दिनेश बिष्ट, लाल सिंह बिष्ट, रविन्द्र जुयाल, शंकर दत्त, अनिल जोशी, कन्हैया लाल डबरियल, शिवानंद नौटियाल, कुलवंत सिंह नेगी, लक्ष्मण सिंह रावत, देवेंद्र सिंह, विजेश चन्द्र बिष्ट, राम सिंह रावत, महेश चन्द्र डौ, दिनेश सिंह रावत, महेश आर्य,  मनोज जुयाल (फिल्म डायरेक्टर, उत्तराखंड), विपिन कुकरेती, बृजेश शर्मा (दिल्ली), संजय कुमार (दिल्ली), गब्बर सिंह चौहान (पौड़ी), पूजा चमोली, रेखा बालोनी, भारतीय बिष्ट, ग्रुप सिंह भंडारी, संजय सिंह, सत्येंद्र सिंह रावत, अरविंद सिंह रावत, सुरेश चमोली, देवेंद्र गोसाई, पपेंद्र सिंह रावत, मनमोहन, गौरव तथा रमेश सिंह बेलवाल की उल्लेखनीय उपस्थिति/भागीदारी रही।ए


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