हिंदू धर्म में होली मनाने के बाद रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. रंग पंचमी का त्योहार होली के बाद पांचवे दिन मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि रंग पंचमी के त्योहार की शुरुआत द्वापर युग में हुई थी.

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हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. हिंदू धर्म में रंग पंचंमी का त्योहार बहुत विशेष माना गया है.

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/संपादक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर, (उत्तराखंड)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रंग पंचंमी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने होली खेली थी. रंग पंचंमी के दिन ही देवी-देवता होली खेलने धरती पर आए थे. रंग पंचमी के दिन देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन देवी-देवताओं को गुलाल लगाया जाता है. इस दिन देवी-देवताओं की पूजा अर्चना के साथ-साथ कुछ उपाय भी किए जाते हैं. मान्यता है कि इस दिन उपाय करने जीवन की सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल रंग पंचंमी का त्योहार कब मानाया जाएगा और इस दिन क्या उपाय करने चाहिए.

कब है रंग पंचमी?

वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 18 मार्च को रात 10 बजकर 9 मिनट पर शुरू हो जाएगी. वहीं इस पंचमी तिथि का समापन 20 मार्च को रात को 12 बजकर 36 मिनट पर होगा. हिंदू धर्म में उदया तिथि मान्य होती है. ऐसेऐसे में उदया तिथि के अनुसार, रंग पचमी का त्योहार इस साल 19 मार्च मनाया जाएगा.

रंग पंचमी के उपाय

  • रंग पंचमी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए. उन्हें लाल गुलाल चढ़ाना चाहिए. कनकधरा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. इससे जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं.
  • रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा करनी चाहिए. उन्हें लाल वस्त्र चढ़ाना चाहिए. लाल चंदन लगाना चाहिए. इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है.
  • रंग पंचमी के दिन पीले वस्त्र में एक सिक्का और हल्दी की एक गांठ डालकर उसे अच्छे से बांधकर रख देना चाहिए. इसके बाद माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. पूजा के बाद उसे तीजोरी में रख देना चाहिए.
  • इस दिन माता लक्ष्मी को सफेद रंग की मिठाई या सफेद खीर का भोग लगाना चाहिए. इससे घर में धन-धान्य में बढ़ोतरी होती है.
  • रंग पंचमी के दिन वट वृक्ष की 108 परिक्रमा करनी चाहिए. साथ ही भगवान विष्णु का नाम लेकर लाल रंग का धागा बांधना चाहिए. इससे विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं.
  • इस दिन पीले रंग की कोई चीज पर्स में रखना चाहिए. इससे आर्थिक तरक्की होती है.
  • साथ ही भगवान श्रीकृष्ण को गुलाल लगाया जाता है. इसी दिन श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा वृंदावन में होली के त्योहार का अंतिम दिन होता है. धार्मिक मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने होली खेली थी. यही वजह है कि इसी दिन होली खेलने के लिए देवी देवता धरती लोक पर आए थे. उनकी इसी होली के उपलक्ष में रंगपंचमी का त्योहार मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान को रंग लगाने से भक्तों पर उनकी कृपा होती है, जीवन में आने वाली परेशानी और समस्याएं खत्म हो जाती हैं. आइए जानते हैं कि इस किस दिन है रंग पंचमी, शुभ मुहूर्त से लेकर इसक महत्व…

    कब है रंग पंचमी ( Rang Panchami 2024 Date and Time)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि 18 मार्च 2025 को रात 10 बजकर 9 मिनट से शुरू होगी. इसका समापन अगले दिन 19 मार्च 2025 को रात 12 बजकर 36 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए रंग पंचमी का त्योहार 19 मार्च 2025 को मनाया जाएगा. इस दिन सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण और राधे रानी की पूजा अर्चना करने के साथ ही उन्हें रंग लगाना बेहद शुभ और लाभकारी होता है.

    रंग पंचमी पर ये है शुभ मुहूर्त (Rang Panchami Shubh Muhurat)

    रंग पंचमी पर अलग अलग पहर और मुहूर्त में विशेष संयोग और शुभ मुहूर्त बन रहे हैं. इनमें ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा. वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 29 मिनट से 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगा. वहीं निशिता मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा.

    रंग पंचमी का महत्व (Rang Panchami Importance)

    धार्मिक मान्यताओ के अनुसार, रंग पंचमी का त्योहार होली के 5 दिन बाद आता है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी ने होली खेली थी. दोनों ने एक दूसरे को गुलाल लगाया था. इस मौके पर देवी देवता धरती पर आए थे. उन्होंने भी इस त्योहार को मनाया था. इसीलिए इसे रंग पंचमी का त्योहार कहा जाता है. माना जाता है कि रंग पंचमी के दिन देवी-देवताओं को गुलाल और अबीर चढ़ाने से कुंडली से दोष दूर हो जाते हैं. जीवन में सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है. उनकी कृपा प्राप्त होती है.


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